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अध्यापकों की कमी पर ग्रामीणों ने जड़ा स्कूल पर ताला

Tue, 06 Dec 2016 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल Updated Tue, 06 Dec 2016 12:25 AM IST
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Shortage of teachers at the school the villagers smashed the lock, Karnal, Indri
अध्यापकों की कमी पर ग्रामीणों ने जड़ा स्कूल पर ताला - फोटो : Amar Ujala
 कस्बे के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इंद्री खंड में 11 प्राथमिक पाठशालाएं तो ऐसी हैं, लेकिन एक भी स्थायी अध्यापक नहीं है। वहीं 30 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक-एक शिक्षक नियुक्त हैं। इससे परेशान होकर सोमवार को गांव बुटानखेड़ी के ग्रामीणों ने प्राइमरी और मिडिल स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और विरोधस्वरूप ग्रामीण स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को लेकर स्कूल के गेट के सामने बैठ गए।
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ग्रामीणों ने सरकार और शिक्षामंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। मामले की सूचना मिलते ही कार्यकारी खंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र सचदेवा मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीण स्कूल में तुरंत अध्यापक को नियुक्त करने की मांग पर अड़े रहे। खंड शिक्षा अधिकारी ने मामले के बारे में डीईओ सुरेश गौरिया से बात की। जिला शिक्षा अधिकारी ने बुटानखेड़ी के स्कूल में दो अस्थायी शिक्षक भेजने की बात कही। अधिकारी के आश्वासन के बाद ही करीब डेढ़ घंटे बाद ग्रामीणों ने स्कूल का ताला खोला। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि दो शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो वह सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।  
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बता दें कि पिछले दिनों चोरपुरा के सरकारी स्कूल का रिजल्ट खराब आने के कारण भी लोगों ने स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया था। बाद में जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले में हस्तक्षेप करके लोगों को शांत किया था। ग्रामीण सूरजभान, बीरबल, काला, शिवकुमार, बीरबल, संजना, रेखा, सरोज और नानकी ने बताया कि स्कूल में काफी दिनों से स्थायी शिक्षक नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि अभी भी करीब 200 बच्चे स्कूल में जाते हैं, लेकिन स्कूल में शिक्षक नहीं होने से बच्चों को लिखना पढ़ना नहीं आता। शिक्षक न होने से बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। उन्होंने बताया कि गरीब परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल में ऐसे हालात होने से उनके बच्चे लेकिन स्कूलों में ऐसे हालात होने से उनके बच्चे खेतों के नौकर बनकर रह जाएंगे। कई बार स्थानीय प्रशासन व मंत्री के सामने समस्या रखी है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।  
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ये है स्थिति
इंद्री क्षेत्र में 102 प्राथमिक पाठशालाएं हैं। इनमें पहली से पांचवीं कक्षा के 7293 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 30 पाठशालाएं तो ऐसी हैं, जो केवल एक-एक अध्यापक के सहारे चल रही हैं। वहीं 11 पाठशालाओं में शिक्षकों की संख्या जीरो है। धनौरा जागीर में 102 बच्चों पर एक शिक्षक, डबकौली कलां गांव में 129 बच्चों पर एक अध्यापक, चौगांव स्कूल में 122 बच्चों पर एक अध्यापक। वहीं कई स्कूलों में स्थिति इसके विपरीत भी है, बदरपुर में 35 बच्चों पर चार अध्यापक, कादराबाद में आठ बच्चों पर दो शिक्षक, सैयद छपरा के स्कूल में 57 बच्चों पर एक शिक्षक, छपरियों पर 45 बच्चों पर एक अध्यापक, डबकौली खुर्द में 42 बच्चों पर एक अध्यापक, खुखनी में 64 पर एक, उड़ाना में 63 पर एक, उमरपुर में 78 पर एक और मनकमाजरा स्कूल में 50 बच्चों पर एक शिक्षक, गोरगढ़ में 61 बच्चों पर एक अध्यापक, जपती छपरा सिकलीगर में 64 पर एक, कमालपुर गडरियान में 49 बच्चों पर एक, कमालपुर रोड़ान में 49 पर एकगोरगढ़ में 61 बच्चों पर एक अध्यापक, जपती छपरा सिकलीगर में 64 पर एक, कमालपुर गडरियान में 49 बच्चों पर एक, कमालपुर रोड़ान में 49 पर एक है।


स्कूल की इंचार्ज बिना बताए स्कूल में नहीं आई है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिन अध्यापकों को यहां पर अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया था, उनकी लापरवाही भी सामने आ रही है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शीघ्र ही इस स्कूल में स्थायी अध्यापकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। एक शिक्षक के यहां अस्थायी तौर पर ऑर्डर किए हुए हैं, लेकिन वह अनुपस्थित है, उसे सस्पेंड किया जाएगा।
 -रविंद्र सचदेवा, खंड शिक्षा अधिकारी, इंद्री
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