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Karnal News: तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा शेर सिंह का पार्थिव शरीर
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शेर सिंह फाइल फोटो
इंद्री। जिस भाई के सिर पर सेहरा सजने और घोड़ी पर सवार होकर घर लौटने का इंतजार था, वह तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर बनकर घर पहुंचा। दरवाजे पर सेहरा लिए खड़ी बहन मनजीत की आंखों के सामने जब भाई का शव आया तो परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं। देश सेवा में जुटे 32 वर्षीय सैनिक शेर सिंह की सड़क हादसे में मौत से बुढनपुर बांगर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सूबेदार अमरिंदर शर्मा ने बताया कि वह एक माह की छुट्टी लेकर 12 अक्तूबर को घर के लिए निकले थे।
शेर सिंह 12 अक्तूबर को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका पहले करनाल के निजी अस्पताल में उपचार कराया गया। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ स्थित सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान बुधवार को उनकी मौत हो गई। शेर सिंह की माता सुखविंदर कौर ने बताया कि उन्हें हादसे के बारे में गांव के ही एक युवक ने फोन कर सूचना दी थी। हादसा कैसे हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। शेर सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। ग्रामीण बालकराम और अमनदीप सिंह ने कहा कि कम उम्र में देश सेवा कर रहे जवान की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक है।
2014 में सेना में हुए थे भर्ती
शेर सिंह वर्ष 2014 में करीब 18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती हुए थे। अहमदाबाद में आरटी बेस पर प्रशिक्षण लेने के बाद उनकी तैनाती नायक के पद पर 13 फील्ड रेजिमेंट, रुड़की में हुई। काम में दक्षता और कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान होने के कारण उन्हें हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग पर स्थित रायवाला में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। वह पिछले 12 वर्षों से सेना में सेवाएं दे रहे थे।
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शेर सिंह 12 अक्तूबर को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका पहले करनाल के निजी अस्पताल में उपचार कराया गया। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ स्थित सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान बुधवार को उनकी मौत हो गई। शेर सिंह की माता सुखविंदर कौर ने बताया कि उन्हें हादसे के बारे में गांव के ही एक युवक ने फोन कर सूचना दी थी। हादसा कैसे हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। शेर सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। ग्रामीण बालकराम और अमनदीप सिंह ने कहा कि कम उम्र में देश सेवा कर रहे जवान की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक है।
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2014 में सेना में हुए थे भर्ती
शेर सिंह वर्ष 2014 में करीब 18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती हुए थे। अहमदाबाद में आरटी बेस पर प्रशिक्षण लेने के बाद उनकी तैनाती नायक के पद पर 13 फील्ड रेजिमेंट, रुड़की में हुई। काम में दक्षता और कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान होने के कारण उन्हें हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग पर स्थित रायवाला में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। वह पिछले 12 वर्षों से सेना में सेवाएं दे रहे थे।
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शेर सिंह फाइल फोटो