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कौशल बढ़ाने आए सात वैज्ञानिक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 02:14 AM IST
सार

संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि आज के कोविड-19 समय में टीकों, बीमारियों के निदान व बेहतर चिकित्सा विज्ञान के विकास के लिए आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में प्रशिक्षित जनशक्ति की तत्काल आवश्यकता है।

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Seven scientists came to enhance skills
एनडीआरआई करनाल - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में आणविक जीव विज्ञान तकनीकों का प्रशिक्षण हासिल करने के लिए सात वैज्ञानिकों का दल पहुंचा है। विभिन्न संस्थानों से आए इन वैज्ञानिकों के कौशल को निखारा जाएगा ताकि वे भविष्य में मानवों व जीवों की जरूरतों के मद्देनजर शोध कार्यों को सफल अंजाम दे सकें।

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प्रशिक्षणार्थियों में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग राजकीय कॉलेज से डा. चंदन नस्कर, भारत इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजूकेशन एंड रिसर्च चेन्नई से डा. के. अशोक, वेटरनरी कालेज नमक्कल-तमिलनाडु से के. थांगावेल कांडासेमी, सत्यभामा संस्थान चेन्नई से वैज्ञानिक कुमार चंद्रसेकरन, पोंडीचेरी यूनिवर्सिटी से राहुल गांधी, मुंबई वेटरनरी कॉलेज से डा. राजपाल शेशेराव खिल्लरे व कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय बारामुंद्रा भुवनेश्वर से राकेश जायसवारा शामिल हैं।
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संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि आज के कोविड-19 समय में टीकों, बीमारियों के निदान व बेहतर चिकित्सा विज्ञान के विकास के लिए आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में प्रशिक्षित जनशक्ति की तत्काल आवश्यकता है। उन्नत आणविक जीव विज्ञान में अनुसंधान और विकासात्मक गतिविधियों में संस्थान सबसे आगे है। अनुसूचित जाति के शोधकर्ताओं के साथ वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
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संयुक्त निदेशक अनुसंधान डा. धीर सिह ने कहा कि आने वाले दशकों में चुनौतियों का सामना करने के लिए आणविक जीव विज्ञान उपकरण मानव व पशु विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पाठ्यक्रम निदेशक डा. नरेश सेलोकर ने बताया कि 21 अगस्त से यह प्रशिक्षण शुरू हुआ और 30 अगस्त को संपन्न होगा। डा. सचिनंदन डे व डा. चांदराम ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। ये वैज्ञानिक अपने-अपने संस्थानों में दवा बनाने, टीके बनाने व बीमारियों पर शोध कार्य करेंगे।

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