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सत्र शुरू हुए डेढ़ महीना पार, किताबें नहीं तैयार, करना होगा इंतजार
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। स्कूलों का सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ माह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को किताबों का इंतजार है। किताबें मिलना तो दूर अभी तक तैयार भी नहीं हुई हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा।
विभाग की ओर से चार दिन पहले ही इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव कर नए पाठ्यक्रम को लॉन्च किया है। ऐसे में इन किताबों के छपने के बाद जिलों और स्कूलों तक पहुंचने में समय लगेगा। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षा अधिकारियों की ओर से नई किताबों की पीडीएफ भी विभाग से मांगी गई है। ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई चलती रहे।
इधर, कुछ शिक्षकों का दावा है कि किताबें आने में जून का महीना भी लग सकता है। यदि किताबें नहीं आई तो समय और पढ़ाई दोनों खराब होंगे। बिना किताबों के पढ़ाना मुश्किल है। विभाग की ओर से कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें दी जाती हैं। जिले के 779 राजकीय स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक एक लाख पांच हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
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तीन साल पुरानी किताबें पढ़ रहे विद्यार्थी
स्कूलों में किताबें नहीं आने के कारण विभाग की ओर से फिलहाल पुरानी किताबें ही सीनियर विद्यार्थियों से लेकर नए विद्यार्थियों को दे दी गई थी। ऐसे में विद्यार्थी इन्हीं तीन साल पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं, क्योंकि 2020 में कोरोना के कारण किताबें बंट नहीं पाई थी। वहीं 2021 में कोरोना के कारण विभाग की ओर से किताबें भेजी ही नहीं गई। किताबों की जगह प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में 300 रुपये डलवाए गए थे।
बदलाव : गांधी के संग सावरकर भी पढ़ेंगे विद्यार्थी
कक्षा छठी से दसवीं तक की इतिहास की किताबों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। इनमें प्रदेश की ऐतिहासिक घटनाओं पर ज्यादा जोर दिया है। पुराने सिलेबस का बहुत कम हिस्सा ही रखा गया है। नए सिलेबस में विदेशी आक्रमणों से जुड़ी जानकारियां एक पेज में समेटी गई हैं। महापुरुषों को एक पैराग्राफ की जगह एक-एक पेज दिया गया है। महात्मा गांधी व अन्य महापुरुषों के साथ वीर सावरकर भी पढ़ाए जाएंगे। 1857 के संघर्ष को विद्रोह या गदर नहीं, बल्कि आजादी की पहली क्रांति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें हरियाणा के योगदान को भी दर्शाया है।
किताबें आने में कुछ देरी हो सकती हैं, क्योंकि इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव हुआ है। अभी विभाग की ओर से किताबें भेजने को लेकर कोई सूचना नहीं आई है। फिलहाल हमने पीडीएफ भेजने के लिए लिखा है। ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारु रहे और शिक्षक भी पढ़ा सकें। पुरानी किताबों से तो पढ़ाई चल ही रही है।
-रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
टैबलेट भी नहीं हुए शुरू
करनाल। विभाग की ओर से कक्षा 10वीं और 12वीं के कुल 23700 विद्यार्थियों को टैबलेट जारी हुए हैं। शुुरुआत में कुछ विद्यार्थियों को ही टैबलेट मिल पाए हैं। अन्य विद्यार्थियों के टैबबलेट अभी स्कूलों के पास ही हैं, क्योंकि इनके सिम कार्ड एक्टिव नहीं हुए हैं। ऐसे में विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं कर सकते। डीईईओ रोहताश वर्मा का कहना है कि एक सप्ताह में सभी विद्यार्थियों के टैबलेट के सिम कार्ड एक्टिव हो जाएंगे।
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करनाल। स्कूलों का सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ माह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को किताबों का इंतजार है। किताबें मिलना तो दूर अभी तक तैयार भी नहीं हुई हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा।
विभाग की ओर से चार दिन पहले ही इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव कर नए पाठ्यक्रम को लॉन्च किया है। ऐसे में इन किताबों के छपने के बाद जिलों और स्कूलों तक पहुंचने में समय लगेगा। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षा अधिकारियों की ओर से नई किताबों की पीडीएफ भी विभाग से मांगी गई है। ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई चलती रहे।
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इधर, कुछ शिक्षकों का दावा है कि किताबें आने में जून का महीना भी लग सकता है। यदि किताबें नहीं आई तो समय और पढ़ाई दोनों खराब होंगे। बिना किताबों के पढ़ाना मुश्किल है। विभाग की ओर से कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें दी जाती हैं। जिले के 779 राजकीय स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक एक लाख पांच हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
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तीन साल पुरानी किताबें पढ़ रहे विद्यार्थी
स्कूलों में किताबें नहीं आने के कारण विभाग की ओर से फिलहाल पुरानी किताबें ही सीनियर विद्यार्थियों से लेकर नए विद्यार्थियों को दे दी गई थी। ऐसे में विद्यार्थी इन्हीं तीन साल पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं, क्योंकि 2020 में कोरोना के कारण किताबें बंट नहीं पाई थी। वहीं 2021 में कोरोना के कारण विभाग की ओर से किताबें भेजी ही नहीं गई। किताबों की जगह प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में 300 रुपये डलवाए गए थे।
बदलाव : गांधी के संग सावरकर भी पढ़ेंगे विद्यार्थी
कक्षा छठी से दसवीं तक की इतिहास की किताबों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। इनमें प्रदेश की ऐतिहासिक घटनाओं पर ज्यादा जोर दिया है। पुराने सिलेबस का बहुत कम हिस्सा ही रखा गया है। नए सिलेबस में विदेशी आक्रमणों से जुड़ी जानकारियां एक पेज में समेटी गई हैं। महापुरुषों को एक पैराग्राफ की जगह एक-एक पेज दिया गया है। महात्मा गांधी व अन्य महापुरुषों के साथ वीर सावरकर भी पढ़ाए जाएंगे। 1857 के संघर्ष को विद्रोह या गदर नहीं, बल्कि आजादी की पहली क्रांति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें हरियाणा के योगदान को भी दर्शाया है।
किताबें आने में कुछ देरी हो सकती हैं, क्योंकि इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव हुआ है। अभी विभाग की ओर से किताबें भेजने को लेकर कोई सूचना नहीं आई है। फिलहाल हमने पीडीएफ भेजने के लिए लिखा है। ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारु रहे और शिक्षक भी पढ़ा सकें। पुरानी किताबों से तो पढ़ाई चल ही रही है।
-रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
टैबलेट भी नहीं हुए शुरू
करनाल। विभाग की ओर से कक्षा 10वीं और 12वीं के कुल 23700 विद्यार्थियों को टैबलेट जारी हुए हैं। शुुरुआत में कुछ विद्यार्थियों को ही टैबलेट मिल पाए हैं। अन्य विद्यार्थियों के टैबबलेट अभी स्कूलों के पास ही हैं, क्योंकि इनके सिम कार्ड एक्टिव नहीं हुए हैं। ऐसे में विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं कर सकते। डीईईओ रोहताश वर्मा का कहना है कि एक सप्ताह में सभी विद्यार्थियों के टैबलेट के सिम कार्ड एक्टिव हो जाएंगे।