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Karnal News: स्कूलों में बेटियों के लिए अलग शौचालय जरूरी, सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें हों दुरस्त

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Feb 2026 01:04 AM IST
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Separate toilets for girls are essential in schools, sanitary pad vending machines should be in good condition.
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। स्कूलों और कॉलेजों के अलावा शहर के बाजारों में महिलाओं व बेटियों के लिए अलग से शौचालय होने चाहिए। इनमें सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें भी लगी होनी चाहिए। ताकि जरूरत पर इसका इस्तेमाल किया जा सके। बाजार, स्कूल, कॉलेज या किसी कार्यालय में जब महिलाओं या बेटियों को इसकी जरूरत पड़ती है और मौके पर उपलब्ध नहीं होता तो वे असहज महसूस करती हैं। प्रशासन और सभी कार्यालय व विभागों के अध्यक्ष इस पर संज्ञान लें। यह कहना है शहर की विभिन्न वर्गों से जुड़ीं प्रबुद्ध महिलाओं का वीरवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद का आयोजन किया गया। इस दौरान महिला सुरक्षा, महिलाओं व शहर से जुड़े मुद्दे, शौचालयों के हालात व सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों की स्थिति पर सभी ने अपने विचार रखे।
सभी ने रखी अपनी राय-
- अधिवक्ता विनय शर्मा का कहना है कि सड़कों पर रात में नशेड़ी घूमते हैं, महिलाओं का निकलना मुश्किल होता है। पुलिस सख्ती करे।

- अधिवक्ता मोनिका शर्मा का कहना है कि महिला पुलिस के लिए राइडर चलाई जानी चाहिए। ताकि जरूरत पर केवल महिला पुलिस बुला सकें।
- इनरव्हील क्लब से पूनम मुकुल का है कि कई जगह व्यवस्था की खामियों के कारण बेटियां पीछे रह जाती हैं। सुविधाएं बढ़नी चाहिए।
- निफा की महिला विंग की अध्यक्ष डॉ. भारती भारद्वाज का कहना है कि शहर के शीरो रूम और महिला शौचालय बंद रहते हैं, इन्हें खोला जाए।
- भारत विकास परिषद से प्रियंका काठपाल का कहना है कि कई जगह महिलाओं के लिए सावर्जनिक शौचालय नहीं हैं, इन्हें बनाया जाए।
- इनरव्हील क्लब से मीनू सिंगला का कहना है कि बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है। इसके कारण भी पिछड़ते हैं।
- पूर्व शिक्षिका संतोष कुमारी का कहना है कि विवादों को खत्म करने के लिए विवाह पूर्व लड़की और लड़के की काउंसलिंग होनी चाहिए।
- सीजीसी की पूर्व चेयरपर्सन अंजू शर्मा का कहना है कि बेटियों और महिलाओं के लिए कानून तो बने हैं, इन्हें सख्ती से लागू नहीं किया जाता।
- पूर्व उप जिला शिक्षा अधिकारी उर्वशी विग का कहना है कि स्कूलों की स्थिति पहले से सुधरी है। प्रबंधकों को खुद भी जिम्मेदारी समझनी होगी।
- समाजसेवी निकिता का कहना है कि शहर में सीसीटीवी और बढ़ाने की जरूरत है। अभी भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां निगरानी न होने से अपराध होता है।
- एडवोकेट तमन्ना शर्मा का कहना है कि सरकारी योजनाओं का प्रचार बढ़ना चाहिए। इसके अभाव में भी लोग लाभ नहीं उठा पाते।
- आंगनबाड़ी वर्कर बिजनेश राणा का कहना है कि स्कूल कॉलेजों में सेनेटरी नैपकिन की मशीनें लगी तो हैं पर निगरानी के अभाव में शोपीस बनी हैं।
- पूर्व बैंक अधिकारी प्रीति कुकरेजा का कहना है कि बेटियों की स्थिति को संस्थानों के अध्यक्ष को खुद समझना होगा, खराब मशीनें ठीक कराएं।
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