फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Scientists worried about attack of foreign virus on paddy plant

Agriculture: देसी तेला की पीठ पर सवार हो धान की पौध को बौना कर रहा विदेशी वायरस, वैज्ञानिक भी चिंतित

Mon, 03 Jul 2023 01:37 AM IST
भूपेंद्र सिंह देव शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
देव शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 03 Jul 2023 01:37 AM IST
सार

पहली बार धान की नर्सरी में भी इस वायरस का प्रभाव दिखा है। छोटे पौधों की रोपाई न करने की सलाह दी गई है। सफेद पीठ वाले तेला की निगरानी की भी सलाह दी गई है। रोपाई के बाद धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। पैदावार भी घट सकती है।

विज्ञापन
Scientists worried about attack of foreign virus on paddy plant
सांकेतिक तस्वीरकरनाल में बारिश के दौरान धान के खेत में भरा पानी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल)

विस्तार

धान की रोपाई लगभग पूरी होने वाली है, लेकिन इस बार धान की पौध में ही फिजी वायरस का हमला दिखने लगा है। जिसने धान उत्पादकों के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों की भी चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि इसकी रोकथाम अभी नहीं की गई तो इससे रोपाई के बाद धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। पैदावार भी घट सकती है। वैज्ञानिकों ने इस विदेशी वायरस की पहचान के साथ-साथ उसके संवाहक बने सफेद पीठ वाले देसी कीट की भी पहचान कर ली है। इसी के आधार पर वायरस से पहले इसके संवाहक कीट की रोकथाम के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है।
विज्ञापन


करनाल सहित हरियाणा के कई जिलों में खेतों में धान की पौध (नर्सरी) में भी इस बार छोटे-बड़े (बौने) पौधे दिखे हैं। ये चिंता का विषय है, क्योंकि पिछले साल धान की फसल में कुछ क्षेत्रों में बौनेपन की समस्या देखी गई थी। धान अनुसंधान केंद्र कोल के इंचार्ज डॉ. ओपी लठवाल ने बताया कि इस वायरस का नाम ब्लैक स्ट्रीकेड ड्वार्फ है। ये अगस्त 2022 में पहली बार पहचाना गया।
विज्ञापन


कोई पुख्ता प्रमाण तो नहीं लेकिन बताया जा रहा है ये वायरस फिजी देश से यहां पहुंचा है। इसलिए इस वायरस को फिजी वायरस भी कहा जाता है। ये धान की फसल पर हमला करता है, जिसकी वजह से पौधे छोटे रह गए, बाद में भी उनमें फुटाव और बढ़वार रुक जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस साल ये पहली बार धान की नर्सरी में भी देखा जा रहा है। जो चिंता का विषय तो है ही, क्योंकि यदि पौध ही कमजोर होगी तो पौधा स्वस्थ कैसे होगा। पौध से खेतों में पहुंचकर रोपाई के बाद भी पौधे का फुटाव व बढ़वार रोक सकता है। इसलिए किसानों को अभी से सतर्क हो जाने की आवश्यकता है। इसे लेकर उन्होंने एडवाइजरी भी जारी कर दी है।


फिजी वायरस ने एक देसी कीट सफेद पीठ वाले तेला को अपना संवाहक बनाया है। ये कीट रस चूसक प्रजाति का है। जो एक पौधे से दूसरे पौधे पर बैठकर उसका रस चूसता है, साथ ही फिजी वायरस एक पौधे से दूसरे पौधे में पहुंच जाता है। इसका फैलाव रोकने के लिए किसानों को सफेद पीठ वाले कीट की निगरानी करनी होगी। पौध में यदि सफेद पीठ वाला तेला दिखाई दे या छोटे-बड़े पौधे दिखें तो पाई मेट्रोजिन 120 ग्राम या डाईनोटिफिरोन 80 ग्राम दवा को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें। -डॉ. महा सिंह जागलान, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र (एचएयू) करनाल


फिजी वायरस को फैलने से रोकने के लिए सफेद पीठ वाले तेला (डब्ल्यूबीपीएच) को रोकना बेहद आवश्यक है, इसके लिए किसानों को चेश 80 ग्राम या फिर ओसीन 120 ग्राम दवाई को स्प्रे पौध या फसल पर करना चाहिए। पौध में यदि बौने पौधे हैं तो उन्हें उखाड़कर अलग कर दें, उनकी रोपाई नहीं करनी चाहिए। पिछले दिनों किसानों को पछेती रोपाई को देर से करने को कहा गया है, अब किसान पछेती धान की रोपाई कर सकते हैं। - डॉ. ओपी लठवाल, प्रभारी, धान अनुसंधान केंद्र कोल

किसानों को सलाह
  • सफेद पीठ वाला तेला के लिए नर्सरी का लगातार करते रहें निरीक्षण
  • नर्सरी में छोटे-बड़े पौधे दिखे तो छोटे पौधों की न करें रोपाई
  • सफेद पीठ वाले कीट के लिए बताए गए कीटनाशकों का करें प्रयोग
  • कीट का प्रकोप दिखते ही केवीके व वैज्ञानिकों को दें इसकी जानकारी
  • नर्सरी के पास मेड़ों पर भी करें कीटनाशकों का स्प्रे
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed