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कम प्राकृतिक संसाधन के उपयोग वाली तकनीक पर शोध करें वैज्ञानिक:डा. अजीत सिंह यादव

Sat, 23 Aug 2025 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 23 Aug 2025 12:14 AM IST
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Scientists should research on technology that uses less natural resources: Dr. Ajit Singh Yadav
1001 एनडीआरआई के प्रकृति महोत्सव में अतिथियों को पुस्तक भेंट करते निदेशक डॉ.धीर सिंह, साथ में म
प्रकृति के साथ ज्यादती न हो, किसानों को जागरूक करना वैज्ञानिक समाज की नैतिक जिम्मेदारी- डॉ. धीर सिंह
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हरियाणा पुलिस के सहयोग से राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में आयोजित प्रकृति महोत्सव एवं डेयरी फार्मिंग-2025 में विद्यार्थियों ने हरियाणवी सांस्कृतिक बिखेरी, वहीं बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे आईसीएआर नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ.अजीत सिंह यादव ने वैज्ञानिकों को प्राकृतिक संरक्षण पर शोध की दिशा बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा भारत की कृषि ने बहुत बदलाव देखे हैं, बीसवी सदी में बंगाल की भुखमरी भी देखी, साठ के दशक मका वह दौर भी देखा, जब अन्न को आयात करना पड़ा। अब हम देश में 140 करोड़ से ज्यादा जनसंख्या होने के बावजूद अन्न का निर्यात करते हैं। समय की मांग यह है कि कृषि शोध में ऐसी तकनीक विकसित करें जिसमें कम से कम प्राकृतिक संसाधन का प्रयोग हो।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग की संयुक्त कार्य संस्कृति की अवधारणा पर आयोजित प्रकृति महोत्सव के पांचवें दिन ’वृक्ष खेती से आत्मनिर्भर भारत’ ‘प्रकृति और किसान’, ‘प्रकृति और साहित्य’ विषय मंथन किया गया। मुख्य अतिथि डा. अजीत सिंह यादव ने नई शिक्षा नीति में प्रकृति संरक्षण के विषय को शामिल करने के सरकार के निर्णय की सराहनीय की। उन्होंने कहा कि यूजीसी द्वारा अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट को लागू किया गया है जिसमें छात्रों को बहुविषयक शिक्षा अपनाने और शिक्षा को बीच में छूट जाने पर भी डिग्री की प्रक्रिया को लचीला बनाया गया है।
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अध्यक्षता करते हुए एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डा. धीर सिंह, ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि कृषि अनुसंधान विश्वविद्यालयों की दीवारों से निकलकर आम किसान की खेत की मेड़ तक पहुंचे। अनुसंधान में भारत के किसान की पीड़ा भी रेखांकित हो लेकिन इसके साथ प्रकृति के साथ ज्यादती न हो, इसके लिए किसानों को जागरूक करना भी हम वैज्ञानिक समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।
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महिला बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी सीमा प्रसाद ने कहा कि रासायनिक खाद एवं दवाओं की अपेक्षा प्राकृतिक खेती को महत्व देना होगा, तभी हम धरती की सेहत को ठीक कर सकेंगे। संचालन करते हुए पुलिस पीआरओ आउटरीच राजीव रंजन ने कहा कि, किसानों के लिए धरती उनका आंगन, आकाश घर और सूर्य की रोशनी उसके घर को प्रकाशवान करने वाला दीपक है। किसानों को भी धरती की सेहत को ध्यान में रखकर ही खेती करनी चाहिए। इसमें डा. जय कौशिक, डा. सुनील कुमार, डा. पीएन राजू, डा. ऋचा ने विचार रखे। सभी अतिथियों को पुस्तक मेले का भ्रमण कराया गया, सभी को पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सिंदूर का पौधा भी लगाया।

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नराकास ने कराई गायन प्रतियोगिता
- प्रकृति महोत्सव के मंच पर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) के हिंदी अधिकारी धीरज शर्मा के संयोजन में गायन एवं कविता पाठ आयोजित किया। जिसमें डा. निशांत परवीन, मंजीत व लखविंदर सिंह ने गीत सुनाए। बच्चों ने कविता पाठ किया। महिला बाल विकास विभाग की तरफ से सीमा प्रसाद के संयोजन में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम पर नाटक का मंचन किया। राजकीय कालेज ऑफ वुमेन ने कविता पाठ तथा जैन गर्ल्स स्कूलकी छात्राओं ने नृत्य की प्रस्तुति दी।
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