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Karnal News: बिना मानकों के चल रहीं स्कूली बसें, 36 मिलीं अनफिट
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- असंध, निसिंग और करनाल में टीम ने 211 प्राइवेट बसें जांचीं
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्राइवेट स्कूलों की बसें मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। आरटीए की टीम ने रविवार को भी तीन अलग-अलग जगहों पर प्राइवेट स्कूल की बसें बुलाकर उनकी चेकिंग की गई। इस दौरान करीब 211 बसें तीनों जगहों पर पहुंचीं। इनमें से 36 बसें अनफिट पाई गईं। किसी बस में फर्स्ट एड किट नहीं थी तो किसी में एक्सपायरी डेट की दवा पाई गई। किसी में फायर सिलिंडर तक नहीं थे। किसी में एक्सपायरी डेट के सिलिंडर पाए गए। कुछ बसों में सीसीटीवी नहीं थे तो किसी में कैमरे नहीं चल रहे थे।
अधिकारियों ने इन सभी 36 प्राइवेट बसों का चालान किया है। जिनमें करनाल में 86 बसों में से चार अनफिट पाई गईं। निसिंग में 86 बसों में से 15 व असंध में 39 बसों में से 17 बसें अनफिट पाई गईं। इससे साफ है कि आरटीए की टीम बसों की पासिंग के दौरान खानापूर्ति करती हैं।
स्कूलों में जाकर करें औचक निरीक्षण
वकील हरीश अरोड़ा ने बताया कि जब कहीं पर बड़ा हादसा होता है तभी विभाग की ओर से ऐसे चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं। यदि विभाग की टीमें प्राइवेट स्कूलों में जाकर औचक निरीक्षण करे तभी स्कूली बसों का पता चलेगा कि कितनी बसें फिट हैं और कितनी अनफिट। क्योंकि अब अधिकारी जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार करने के लिए स्कूल संचालकों को कहकर एक जगह बसों को लेकर आने के लिए कहते हैं और फिर उन बसों की चेकिंग करते हैं। ऐसे में स्कूल संचालक खराब बसों को चेकिंग के लिए क्यों भेजेगा।
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स्कूलों में खड़ी अनफिट बसें, अधिकारी बाहर कर रहे चेकिंग
अभिभावक सुनील, राहुल, रमेश आदि का कहना है कि विभाग की टीमें एक जगह पर बसों को बुलाकर चेकिंग कर रही है। ऐसे में जिले में कई ऐसे प्राइवेट स्कूल हैं। जिनकी बसें पुरानी व अनफिट हैं, वह स्कूल में ही खड़ी हैं। उन्हें चेकिंग के लिए स्कूल संचालकों ने भेजा ही नहीं है। स्कूलों में दाखिला होने के बाद ही वह स्कूल संचालक इन बसों को बच्चों को लाने ले जाने के लिए सड़कों पर चलाते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्राइवेट स्कूलों की बसें मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। आरटीए की टीम ने रविवार को भी तीन अलग-अलग जगहों पर प्राइवेट स्कूल की बसें बुलाकर उनकी चेकिंग की गई। इस दौरान करीब 211 बसें तीनों जगहों पर पहुंचीं। इनमें से 36 बसें अनफिट पाई गईं। किसी बस में फर्स्ट एड किट नहीं थी तो किसी में एक्सपायरी डेट की दवा पाई गई। किसी में फायर सिलिंडर तक नहीं थे। किसी में एक्सपायरी डेट के सिलिंडर पाए गए। कुछ बसों में सीसीटीवी नहीं थे तो किसी में कैमरे नहीं चल रहे थे।
अधिकारियों ने इन सभी 36 प्राइवेट बसों का चालान किया है। जिनमें करनाल में 86 बसों में से चार अनफिट पाई गईं। निसिंग में 86 बसों में से 15 व असंध में 39 बसों में से 17 बसें अनफिट पाई गईं। इससे साफ है कि आरटीए की टीम बसों की पासिंग के दौरान खानापूर्ति करती हैं।
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स्कूलों में जाकर करें औचक निरीक्षण
वकील हरीश अरोड़ा ने बताया कि जब कहीं पर बड़ा हादसा होता है तभी विभाग की ओर से ऐसे चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं। यदि विभाग की टीमें प्राइवेट स्कूलों में जाकर औचक निरीक्षण करे तभी स्कूली बसों का पता चलेगा कि कितनी बसें फिट हैं और कितनी अनफिट। क्योंकि अब अधिकारी जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार करने के लिए स्कूल संचालकों को कहकर एक जगह बसों को लेकर आने के लिए कहते हैं और फिर उन बसों की चेकिंग करते हैं। ऐसे में स्कूल संचालक खराब बसों को चेकिंग के लिए क्यों भेजेगा।
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स्कूलों में खड़ी अनफिट बसें, अधिकारी बाहर कर रहे चेकिंग
अभिभावक सुनील, राहुल, रमेश आदि का कहना है कि विभाग की टीमें एक जगह पर बसों को बुलाकर चेकिंग कर रही है। ऐसे में जिले में कई ऐसे प्राइवेट स्कूल हैं। जिनकी बसें पुरानी व अनफिट हैं, वह स्कूल में ही खड़ी हैं। उन्हें चेकिंग के लिए स्कूल संचालकों ने भेजा ही नहीं है। स्कूलों में दाखिला होने के बाद ही वह स्कूल संचालक इन बसों को बच्चों को लाने ले जाने के लिए सड़कों पर चलाते हैं।