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आज से सावन, गूंजेंगे हर-हर महादेव के जयकारे
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करनाल। भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना सावन (श्रावण) रविवार से शुरू हो रहा है। अब पूरे माह मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजेंगे। यूं तो पूर्णिमा शनिवार को ही सुबह 8:08 बजे से ही सावन की प्रतिपदा शुरू हो गई लेकिन उदया तिथि न होने के कारण इसकी शुरुआत रविवार से ही मानी जाएगी। सावन की प्रतिपदा का आगाज भी बादलों की आंखमिचौनी के बाद बारिश से हुआ। दोपहर में एकाएक आई बारिश ने मौसम ठंडा कर दिया।
आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की समाप्ति के बाद श्रावण मास की शुरुआत होती है। इस महीने चार सोमवार पड़ रहे हैं। इन्हें विशेष फलदायी बताया जा रहा है। पिछले साल की तरह अबकी भी भोले के भक्त हरिद्वार से कांवड़ नहीं ला सकेंगे। प्राचीन पीपलवाला मंडिर जुंडला गेट के पुजारी पंडित विनय गौतम ने बताया कि मंदिरों की सफाई व साजसज्जा की जा चुकी है। बताया कि सावन के महीने में भक्त कोरोना गाइडलाइन का पालन कर दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। बताया कि शास्त्रों के अनुसार, सावन के दिनों में जलाभिषेक अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा फलदायी माना जाता है। कांवड़ लाने पर पाबंदी के बावजूद जलाभिषेक कर भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न कर पुण्य के भागी बन सकते हैं।
इन तिथियों में हैं श्रावण के सोमवार
पहला श्रावण सोमवार 26 जुलाई
दूसरा श्रावण सोमवार 02 अगस्त
तीसरा श्रावण सोमवार 09 अगस्त
चौथा श्रावण सोमवार 16 अगस्त
श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान पंचमुखी शिवलिंग
करनाल। दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित संगमरमर से बना श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। इसका निर्माण वर्ष 1984 में करवाया गया। यह आसपास का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पंचमुखी शिवलिंग विराजमान है। मंदिर करीब तीन एकड़ में फैला हुआ है। मंदिर प्रांगण में पानी में एक पत्थर तैरता रहता है जो रामसेतु का पत्थर बताया जाता है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं।
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मंदिर भव्य भवन भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। पुजारी षष्ठी वल्लभ पांडेय ने बताया कि दानवीर राजा कर्ण के नाम से इसका नामकरण हुआ। उन्होंने बताया कि लोगों की मंदिर में गहरी आस्था है। सुबह-शाम पुजा-अर्चना के लिए श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है। सावन में कोरोना गाइडलाइन का पालन कर भक्त जलाभिषेक करेंगे। पुजारी ने बताया कि सावन के चलते शिव पुराण कथा का शुभारंभ कर दिया गया है। यह पूरे सावन माह चलेगी।
मंदिर में देवी के तीनों रूप हैं विराजमान
इस मंदिर में शिव दरबार तो है ही वहीं मां लक्ष्मी, सरस्वती और मां काली के स्वरूप भी स्थापित हैं। मंदिर के मुख्य द्वार के अंदर एक पेड़ है जिस पर मन्नत मांगने के लिए धागा बांधा जाता है। मंदिर में यज्ञशाला के साथ-साथ लोगों के उपचार के लिए डिस्पेंसरी भी चलाई जा रही है।
मंदिरों में भगवान के दर्शन के लिए कोविड की गाइडलाइन के अनुसार भक्तों को सामाजिक दूरी का पालन करना होगा। -डीसी, निशांत कुमार यादव
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आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की समाप्ति के बाद श्रावण मास की शुरुआत होती है। इस महीने चार सोमवार पड़ रहे हैं। इन्हें विशेष फलदायी बताया जा रहा है। पिछले साल की तरह अबकी भी भोले के भक्त हरिद्वार से कांवड़ नहीं ला सकेंगे। प्राचीन पीपलवाला मंडिर जुंडला गेट के पुजारी पंडित विनय गौतम ने बताया कि मंदिरों की सफाई व साजसज्जा की जा चुकी है। बताया कि सावन के महीने में भक्त कोरोना गाइडलाइन का पालन कर दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। बताया कि शास्त्रों के अनुसार, सावन के दिनों में जलाभिषेक अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा फलदायी माना जाता है। कांवड़ लाने पर पाबंदी के बावजूद जलाभिषेक कर भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न कर पुण्य के भागी बन सकते हैं।
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इन तिथियों में हैं श्रावण के सोमवार
पहला श्रावण सोमवार 26 जुलाई
दूसरा श्रावण सोमवार 02 अगस्त
तीसरा श्रावण सोमवार 09 अगस्त
चौथा श्रावण सोमवार 16 अगस्त
श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान पंचमुखी शिवलिंग
करनाल। दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित संगमरमर से बना श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। इसका निर्माण वर्ष 1984 में करवाया गया। यह आसपास का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पंचमुखी शिवलिंग विराजमान है। मंदिर करीब तीन एकड़ में फैला हुआ है। मंदिर प्रांगण में पानी में एक पत्थर तैरता रहता है जो रामसेतु का पत्थर बताया जाता है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं।
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मंदिर भव्य भवन भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। पुजारी षष्ठी वल्लभ पांडेय ने बताया कि दानवीर राजा कर्ण के नाम से इसका नामकरण हुआ। उन्होंने बताया कि लोगों की मंदिर में गहरी आस्था है। सुबह-शाम पुजा-अर्चना के लिए श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है। सावन में कोरोना गाइडलाइन का पालन कर भक्त जलाभिषेक करेंगे। पुजारी ने बताया कि सावन के चलते शिव पुराण कथा का शुभारंभ कर दिया गया है। यह पूरे सावन माह चलेगी।
मंदिर में देवी के तीनों रूप हैं विराजमान
इस मंदिर में शिव दरबार तो है ही वहीं मां लक्ष्मी, सरस्वती और मां काली के स्वरूप भी स्थापित हैं। मंदिर के मुख्य द्वार के अंदर एक पेड़ है जिस पर मन्नत मांगने के लिए धागा बांधा जाता है। मंदिर में यज्ञशाला के साथ-साथ लोगों के उपचार के लिए डिस्पेंसरी भी चलाई जा रही है।
मंदिरों में भगवान के दर्शन के लिए कोविड की गाइडलाइन के अनुसार भक्तों को सामाजिक दूरी का पालन करना होगा। -डीसी, निशांत कुमार यादव