बाढ़ के बाद तबाही के निशान: सड़कें टूटीं, फसलें तबाह, बिजली-पानी की भी समस्या, ग्रामीण तटबंधों पर दे रहे पहरा
यमुना, टांगरी और मारकंडा नदी का जलस्तर कम हुआ है, लेकिन फिर भी ग्रामीण रात को भी तटबंधों पर पहरा दे रहे हैं। यमुनानगर में यमुना में भू-कटाव, अंबाला में बारिश के बाद टांगरी नदी की जद में बैठे लोगों ने फिर से सामान समेटना शुरू किया है।
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विस्तार
बाढ़ के कारण कई सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। अभी भी कई जगह यातयात बहाल नहीं हो पाया है। कैथल का छह दिन बाद भी पंजाब के साथ संपर्क बहाल नहीं हो पाया है। इसके अलावा अंबाला क्षेत्र में बिजली-पानी की समस्या बनी हुई है, जिसके चलते स्थानीय लोग विरोध दर्ज करवा रहे हैं। बात फसलों की करें तो बाढ़ के कारण प्रदेश में अब तक लाखों एकड़ फसल प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में तो अब भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
सोनीपत : यमुना का जलस्तर अब हुआ कम गांव जाजल टोंकी में कम नहीं हुई मुसीबत
सोपीपत में यमुना का जलस्तर घटने से आसपास के लोगों को काफी राहत मिली है। सोनीपत क्षेत्र में यमुना के अंदर अब महज 60 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। जलस्तर कम होने के बाद बर्बाद हुई फसल के निशान दिखने लगे हैं। हजारों एकड़ फसल यमुना के पानी से बर्बाद हो गई है। अब जल्द ही जिला राजस्व विभाग की तरफ से भूमि का सर्वे कर पता लगाया जाएगा कि कितना नुकसान हुआ है। हालांकि यमुना के गांव जाजल टोंकी के ग्रामीणों की मुसीबत अभी भी कम नहीं हुई है। बेशक पानी कम हो गया है, लेकिन गांव का मुख्य मार्ग यमुना के पानी के बहाव के चलते पास में स्थित तालाब में बह गया है, जिससे मार्ग पर करीब 35 फीट का गड्ढा हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों को गांव में जाने के लिए घूम कर नेशनल हाईवे-334 बी की तरफ से जाना पड़ रहा है।
अंबाला : बिजली-पानी का संकट बरकरार, गुस्साए लोगों ने अंबाला-जगाधरी हाईवे पर लगाया जाम
अंबाला में मारकंडा और टांगरी का जलस्तर कम हो गया है, लेकिन जिले में जलभराव से प्रभावित लोगों की मुश्किलें अभी नहीं थमीं हैं। जलभराव से निजात के बाद भी क्षेत्र में बिजली-पानी की समस्या से गुस्साए लोगों ने रविवार को अंबाला-जगाधरी हाईवे पर सवा तीन घंटे तक जाम लगाया। दूसरी ओर जिले में रविवार सुबह से शाम तक 16 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई। इसके चलते टांगरी नदी की जद में बैठे लोगों ने फिर से सामान समेटना शुरू कर दिया है।
करनाल : यमुना से खतरा टला तो ली राहत की सांस तटबंध की मजबूती के लिए रातभर जुटे रहे ग्रामीण
घरौंडा क्षेत्र में यमुना नदी से हो रहे भू-कटाव के बाद बीते रोज एहतियातन दो गांव खाली कराए गए थे, लेकिन रविवार को स्थिति सामान्य हो गई। यमुना वापस अपनी दिशा में लौट गई। इसके बाद ग्रामीण भी गांव को लौट आए। दूसरी ओर घरौंडा में गांव लालूपुरा के तटबंध को मजबूती देने के लिए रात भर ग्रामीण जुटे रहे। वहीं रविवार को दिनभर बादलों की आंख मिचौली से यमुना से लगे क्षेत्रों के ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ी रहीं।
कुरुक्षेत्र : बारिश-बादलों ने बढ़ाई प्रभावितों की चिंता, सारसा में डेरे पर गिरी बिजली
जिले में अभी शहर की आधा दर्जन कॉलोनियों और 100 से ज्यादा गांवों में जलभराव से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं एकबार फिर मौसम के बदले मिजाज ने बाढ़ प्रभावितों की चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले शनिवार की शाम झमाझम बारिश हुई। इस दौरान गांव सारसा में एक डेरे पर आसमानी बिजली गिरी, जिससे लाखों का नुकसान हुआ। दूसरी ओर बाढ़ से मुख्य राजमार्गों से लेकर संपर्क सड़कें तक खस्ताहाल हो गईं हैं।
पानीपत : बारिश के कारण तामशाबाद तटबंध नहीं हो पाया दुरुस्त, बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
यमुना के तटबंध दुरुस्त करने में शनिवार शाम को हुई बारिश के चलते परेशानी बढ़ गई। रविवार दोपहर बाद मिट्टी लाने का काम शुरू किया गया। प्रशासन ने तामशाबाद तटबंध पर मिट्टी भरने का काम शुरू कर दिया है। वही समालखा खंड के डिकाडला गांव में करीब सौ एकड़ फसल में पानी भरा हुआ है। किसानों ने मुख्यमंत्री से जलभराव से निजात दिलाने की मांग की है। रविवार को आसमान में सुबह से बादल छाए रहे।
कैथल : छह दिन बाद भी कैथल का पंजाब से संपर्क बहाल नहीं, लोग परेशान
चीका से गुजर रही घग्गर नदी में जलस्तर तो घटा पर अभी खतरा टला नहीं है। अभी घग्गर में 24 फीट तक पानी बह रहा है, जो कि एक दिन पहले 26 फुट पर था। वहीं छह दिन बाद भी जिले से पंजाब का संपर्क पूरी तरह से कटा हुआ है। फिलहाल बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित समाना की तरफ सटे गांव भाटिया सहित स्यूंमाजरा, लालपुरा व हेमूमाजरा आदि हैं।
यमुनानगर : यमुना में भू-कटाव से टापू कमालपुर के ग्रामीण कर रहे पलायन, 400 श्रमिक जुटे
जिले के टापू कमालपुर की तरफ यमुना नदी में हो रहे कटाव के बाद 70 परिवार गांव से पलायन कर गए हैं। दूसरी ओर सिंचाई विभाग ने भूमि कटाव को रोकने के लिए 400 श्रमिकों को लगाया है जो बचाव में जुटे हैं। इस संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन पहले इंतजाम कर लेता तो ग्रामीणों को गांव नहीं छोड़ना पड़ता।
अंबाला : रद्द ट्रेनों का संचालन शुरू, 20 की गति रखने के निर्देश
दिल्ली में पुराने यमुना पुल पर जलस्तर बढ़ने के कारण रद्द की गई ट्रेनों को रेलवे ने रविवार से बहाल कर दिया। दिल्ली क्षेत्र में ट्रेनों की गति 20 किमी. प्रतिघंटा रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से निकलने वाली आठ ट्रेनें शामिल हैं। रद्द ट्रेनों के बहाल होने से यात्रियों को काफी राहत मिली है।
अंबाला मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक नवीन कुमार ने बताया कि ट्रेनों के संबंध में जानकारी यात्रियों के मोबाइल पर संदेश के माध्यम से भेजी जा रही है, ताकि वो बिना किसी परेशानी के अपना सफर कर सकें। उन्होेंने बताया कि सोमवार को ट्रेन नंबर 14522 व 21 अंबाला-दिल्ली-अंबाला, 14508 व 07 फाजिल्का-दिल्ली-फाजिल्का, 14332 कालका-दिल्ली का संचालन किया जाएगा। वहीं ट्रेन नंबर 14646 व 45 शालीमार एक्सप्रेस अंबाला-पानीपत-दिल्ली के रास्ते चलेगी। ट्रेन नंबर 15708 अमृतसर-कटिहार एक्सप्रेस अपने निर्धारित रास्ते पर चलेगी। संवाद
सोनीपत : बारिश से 6 ट्रेनें रद्द, डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रभावित
सोनीपत। दिल्ली और अंबाला मंडल में रविवार को भी रेलवे यातायात प्रभावित रहा। रेलवे ने रविवार को 6 एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन रद्द रखा। अंबाला-दिल्ली रूट पर चलने वाली सवारी गाड़ियों सहित डेढ़ दर्जन से ज्यादा एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहा। यह ट्रेनें 38 मिनट से लेकर 8:37 घंटे की देरी से चलाई गईं। वहीं सिंघु बॉर्डर से दिल्ली में भारी वाहनों के प्रवेश पर अब भी रोक है। इसके चलते रविवार को चौथे दिन भी दिल्ली रूट पर परिवहन सेवाएं बाधित रहीं। सोनीपत डिपो से दिल्ली रूट पर कोई बस नहीं चली। हालांकि सोनीपत बस अड्डा से दिल्ली में करनाल बाईपास तक वाया नरेला बसों को भेजा जा रहा है।
कैथल: डायरिया के 56 मरीज मिले, डेंगू का भी खतरा
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलभराव कम होने के बाद पिछले दो दिन में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 1798 लोगों की जांच की है। इसके तहत अब तक डायरिया के 56 केस मिल चुके हैं, जबकि 177 लोग बुखार से ग्रस्त हैं। बुखार से ग्रस्त लोगों के रक्त जांच कर डेंगू के सैंपल लिए गए हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी कम होते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। इसके तहत विभाग की तरफ 63 टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। 63 टीमों से पांच मोबाइल टीमें भी कार्यरत हैं, जो प्रभावित लोगों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं।
गौरतलब है कि 30 से अधिक गांवों में अभी जलभराव है। इस कारण यहां पर बीमारियों का खतरा बना हुआ है। इन गांवों में अब स्वास्थ्य विभाग टीम स्क्रीनिंग कर रही है। वहीं, बीमारियां रोकने के लिए आरओ प्लांट के फिल्टर भी बदलवाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें सभी क्षेत्रों में जरूरी दवाइयां और ओआरएस के पैकेट वितरित कर रही हैं।
रैपिड फीवर मास सर्वे द्वारा लोगों को मलेरिया, डेंगू, जापानी बुखार, चिकनगुनिया आदि रोगों के रोकथाम एवं बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। घरों के विजिट के दौरान कूलर, टंकी, पानी की होदी व छतों पर पड़े खाली टायरों की जांच की जा रही है।
सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने बताया कि दो दिन में 63 टीमों ने 1798 लोगों की जांच की है। इसमें 177 लोग बुखार से ग्रस्त मिले हैं, जबकि डायरिया के 56 केस मिले। चावला ने कहा कि बीमारियां रोकने के लिए ग्रामीण को जागरूक रहना होगा। बीमारियों को देखते हुए चीका में कई क्षेत्रों में पानी का आरओ भी बदलवा दिया गया है।
बीमारियों से बचने के लिए यह करें
साफ पानी पीएं या फिर उबालकर पानी का सेवन करें।
शरीर को पूरी तरह से ढककर रखें। पूरे कपड़े पहनें।
घर के आसपास पानी को एक जगह जमा न रहने दें
यदि किसी बर्तन में पानी एकत्रित हो तो उसे साफ कर दें।
रोडवेज विभाग ने पटियाला व संगरूर की बस सेवा की है बंद
बाढ़ से ग्रस्त क्षेत्रों में अभी भी रास्ते अवरूद्ध हैं। रोडवेज विभाग की तरफ से पांच दिन बाद भी पटियाला व संगरूर की बस सेवा शुरू नहीं की जा सकी है।