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दिनभर रहा चक्का जाम, शाम में पकड़ी रफ्तार
karnal
Updated Fri, 14 Apr 2017 12:18 AM IST
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man in problem
- फोटो : bureau
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नई परिवहन पॉलिसी के तहत जारी किए गए प्राइवेट बसों के परमिट के विरोध में रोडवेज के कर्मचारियों का चक्काजाम वीरवार को शाम 5.30 पर समाप्त हो गया। चंडीगढ़ में कर्मचारी नेताओं और सरकार के बीच बातचीत के बाद सरकार की ओर से नई परिवहन नीति रद्द करने के बाद हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की गई, साथ ही कर्मचारियों को निलंबन भी वापस ले लिया गया है। हड़ताल खत्म होने से यात्रियों ने राहत की सांस ली।
हालांकि, पिछले तीन दिनों से जारी हड़ताल वीरवार की सुबह भी जारी रही। यात्री दिनभर बसों के लिए इधर से उधर भटकते रहे। बस न मिलने के कारण कई यात्री जहां वापस घर लौट गए तो कई प्राइवेट बसों व निजी वाहनों के माध्यम से सफर पूरा किया। वहीं रोडवेज कर्मचारी बस डिपो के अंदर बैठक कर अपनी रणनीति पर मंत्रणा करते रहे। ज्यादातर कर्मचारी फोन के माध्यम से चंडीगढ़ में हो रही बैठक में होने वाली बातचीत की जानकारी ले दूसरे कर्मचारियों को अवगत कराते रहे। रोडवेज कर्मचारियों ने कहा कि हरियाणा रोडवेज की सर्विस देश में सबसे अच्छी है, लेकिन इसके बाद भी सरकार रोडवेज कर्मचारियों को सुविधाएं देने में गुरेज कर रही है। सुविधाओं के अभाव में भी रोडवेज कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन सबसे गलत तो सरकार द्वारा रोडवेज का निजीकरण किया जा रहा है। इसके चलते हजारों रोडवेज कर्मचारियों पर खतरा मंडरा रहा है। रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि एक तो सरकार नए कर्मचारी भर्ती कर रिक्त पदों को भर नहीं रही। इसके चलते कार्यरत कर्मचारियों को अधिक ओवरटाइम कर काम चलाना पड़ रहा है। साथ ही 273 नए परमिट जारी कर रोडवेज को धीरे-घीरे खत्म करने की साजिश भी रच रही है। रोडवेज कर्मचारियों ने सरकार व रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों की मीटिंग में आम सहमति से करीब साढ़े पांच बजे हड़ताल खोल दी गई। सरकार ने हाल ही में जारी किए जाने वाले परमिट रद्द कर दी गई साथ ही सभी रोडवेज कर्मचारियों के सस्पेंशन आर्डर भी रद्द कर दिए गए हैं।
ग्रामीण रूटों पर बढ़ेगी प्राइवेट बसों की संख्या
सरकार नई परिवहन नीति रद्द कर दोबारा से परिवहन नीति तैयार करेगी। इसमें सबसे ज्यादा फोकस ग्रामीण रूटों पर प्राइवेट बसों को चलाने पर होगा। रोडवेज में निजीकरण के विरोध में रोडवेज कर्मचारी कई बार हड़ताल कर चुके हैं। सरकार जब भी प्राइवेट बसों को नई परमिट देती है, कर्मचारी हड़ताल शुरू कर देते हैं। इसलिए सरकार अब नई परिवहन नीति से एक तीर से दो शिकार करने का मन बनाया है। सरकार नई परिवहन नीति के अनुसार ज्यादातर प्राइवेट बसों को उन ग्रामीण रूट की परमिट देगी, जहां पर सरकारी बसें या तो नहीं चलती या फिर कम चलती हैं। इससे एक फायदा यह होगा कि बसों की पहुंच ग्रामीण क्षेत्र तक हो जाएगी, दूसरा ग्रामीण क्षेत्र में बस चलने से इसका विरोध रोडवेज कर्मचारी भी नहीं करेंगे। सरकार की इस योजना पर करनाल बस एसोसिएशन कल्याण संघ के जिला प्रधान यशपाल पोसवाल ने भी मुहर लगाया। पोसवाल ने कहा कि, बैठक में हमें कहा गया है कि ज्यादातर प्राइवेट बसों को ग्रामीण रूट पर उतारा जाए। करनाल में करीब 50 ऐसे ग्रामीण रूट हैं जहां रोडवेज की बसें न के बराबर है।
हालांकि, पिछले तीन दिनों से जारी हड़ताल वीरवार की सुबह भी जारी रही। यात्री दिनभर बसों के लिए इधर से उधर भटकते रहे। बस न मिलने के कारण कई यात्री जहां वापस घर लौट गए तो कई प्राइवेट बसों व निजी वाहनों के माध्यम से सफर पूरा किया। वहीं रोडवेज कर्मचारी बस डिपो के अंदर बैठक कर अपनी रणनीति पर मंत्रणा करते रहे। ज्यादातर कर्मचारी फोन के माध्यम से चंडीगढ़ में हो रही बैठक में होने वाली बातचीत की जानकारी ले दूसरे कर्मचारियों को अवगत कराते रहे। रोडवेज कर्मचारियों ने कहा कि हरियाणा रोडवेज की सर्विस देश में सबसे अच्छी है, लेकिन इसके बाद भी सरकार रोडवेज कर्मचारियों को सुविधाएं देने में गुरेज कर रही है। सुविधाओं के अभाव में भी रोडवेज कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन सबसे गलत तो सरकार द्वारा रोडवेज का निजीकरण किया जा रहा है। इसके चलते हजारों रोडवेज कर्मचारियों पर खतरा मंडरा रहा है। रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि एक तो सरकार नए कर्मचारी भर्ती कर रिक्त पदों को भर नहीं रही। इसके चलते कार्यरत कर्मचारियों को अधिक ओवरटाइम कर काम चलाना पड़ रहा है। साथ ही 273 नए परमिट जारी कर रोडवेज को धीरे-घीरे खत्म करने की साजिश भी रच रही है। रोडवेज कर्मचारियों ने सरकार व रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों की मीटिंग में आम सहमति से करीब साढ़े पांच बजे हड़ताल खोल दी गई। सरकार ने हाल ही में जारी किए जाने वाले परमिट रद्द कर दी गई साथ ही सभी रोडवेज कर्मचारियों के सस्पेंशन आर्डर भी रद्द कर दिए गए हैं।
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ग्रामीण रूटों पर बढ़ेगी प्राइवेट बसों की संख्या
सरकार नई परिवहन नीति रद्द कर दोबारा से परिवहन नीति तैयार करेगी। इसमें सबसे ज्यादा फोकस ग्रामीण रूटों पर प्राइवेट बसों को चलाने पर होगा। रोडवेज में निजीकरण के विरोध में रोडवेज कर्मचारी कई बार हड़ताल कर चुके हैं। सरकार जब भी प्राइवेट बसों को नई परमिट देती है, कर्मचारी हड़ताल शुरू कर देते हैं। इसलिए सरकार अब नई परिवहन नीति से एक तीर से दो शिकार करने का मन बनाया है। सरकार नई परिवहन नीति के अनुसार ज्यादातर प्राइवेट बसों को उन ग्रामीण रूट की परमिट देगी, जहां पर सरकारी बसें या तो नहीं चलती या फिर कम चलती हैं। इससे एक फायदा यह होगा कि बसों की पहुंच ग्रामीण क्षेत्र तक हो जाएगी, दूसरा ग्रामीण क्षेत्र में बस चलने से इसका विरोध रोडवेज कर्मचारी भी नहीं करेंगे। सरकार की इस योजना पर करनाल बस एसोसिएशन कल्याण संघ के जिला प्रधान यशपाल पोसवाल ने भी मुहर लगाया। पोसवाल ने कहा कि, बैठक में हमें कहा गया है कि ज्यादातर प्राइवेट बसों को ग्रामीण रूट पर उतारा जाए। करनाल में करीब 50 ऐसे ग्रामीण रूट हैं जहां रोडवेज की बसें न के बराबर है।
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