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10 साल से लटके चार फुट ओवरब्रिज, एडीसी ने मांगा जवाब
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नेशनल हाईवे नंबर-44 के ढहते पुलों और उनकी मरम्मत कार्यों में लापरवाही पर एडीसी ने एनएचएआई के अधिकारियों से जवाब तलब किया। वहीं अधूरे फुट ओवरब्रिज पर भी नाराजगी जतायी, लेकिन रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में आए एनएच के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये। मौका था मंगलवार को विकास सदन में हुई रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक का, जिसकी अध्यक्षता एडीसी अनीश यादव कर रहे थे। इस दौरान एडीसी ने एनएचएआई के अलावा शहर की सड़कों और ट्रैफिक लाइटों की व्यवस्था पर भी अधिकारियों से जवाब मांगा। बैठक में 25 से ज्यादा मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान एनएच अधिकारियों को झाड़ियों की कटिंग और मार्किंग के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
नेशनल हाईवे-44 पर पानीपत से कुरुक्षेत्र सीमा तक लगने वाले चार फुट ओवरब्रिज 10 साल से सर्विस लेन पर ही रखे हुए हैं। इन्हें आज तक नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने लगवाना जरूरी नहीं समझा। मुद्दा उठा तो कोई न कोई तर्क देकर अधिकारी पीछा छुड़वा लेते। अमर उजाला भी लगातार नेशनल हाईवे की खामियों को उजागर कर रहा है। 16 नवंबर के अंक में भी अधूरे फुट ओवरब्रिज का मामला प्रमुखता से उठाया गया था। इस पर संज्ञान लेते हुए रोड सेफ्टी की बैठक में एनएच अधिकारियों से एडीसी अनीश यादव ने जवाब मांगा। गांव कंबोपुरा, कर्णेश्वर मंदिर, गांव दाहा और पक्का पुल के पास फुट ओवरब्रिज का काम अधूरा है। इसके लिए लोहे के ब्रिज और सीढ़ी भी सपोर्ट पर ही रखी हुई है।
आप सात लाइट जंक्शन नहीं संभाल पा रहे, दिल्ली जैसा शहर होता तो क्या करते?
बैठक में शहर की खराब ट्रैफिक लाइट व्यवस्था का मुद्दा भी उठा। पिछली बैठकों में भी एडीसी कई बार इन्हें दुरुस्त करने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी लाइटों की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई। खराब लाइटों पर जब एडीसी ने निगम के एमई मुनीश से पूछा तो उन्होंने कहा कि एजेंसी को बुलाया हुआ है जल्द ठीक हो जाएंगी। इस पर सदस्यों ने कहा कि पांच माह पहले भी बैठक में बनी कमेटी ने लाइटों को लेकर शहर का सर्वे किया था। उस दौरान कमियां बताई गई थी, लेकिन आज तक ठीक नहीं हुई। इस पर एडीसी ने करनाल में सात लाइट जंक्शन की स्थिति पूछते ही एमई को कहा कि अभी तो करनाल छोटा सा शहर है, अगर दिल्ली की तरह हर चौक पर लाइटें होती तो क्या करते? उन्होंने सख्त लहजे में निगम के अधिकारियों से कहा कि कभी तो ऐसा काम कर दो, ये सभी लोग कहें कि अब शहर की लाइटें ठीक हैं। हर बार बैठक में मुद्दा उठता है।
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एजेंसी पर पेनाल्टी कितनी लगी ये नहीं बता पाए अधिकारी
बैठक में जब लाइटों के बंद रहने पर इसका संचालन कर रही एजेंसी पर कार्रवाई की बात आई तो एमई मुनीष इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने यह जरूर बताया कि ट्रैफिक लाइटें बंद होने पर 100 रुपये प्रतिदिन और प्रति लाइट के हिसाब से एजेंसी पर फाइन लगाया जाता है। साल का साढ़े चार लाख रुपये का ठेका दिया हुआ है, लेकिन पेनाल्टी अब तक कितनी वसूली इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था।
कैथल ओवरब्रिज पर कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश
करनाल-कैथल रोड पर स्थित ऊपरगामी पुल पर चल रही मरम्मत का मुद्दा भी बैठक में उठा। एनएच-709ए के कार्यकारी अभियंता ने बताया कि इसके लिए 25 दिन का समय निर्धारित किया गया था और काम तेजी से हो रहा है। एडीसी ने निर्देश दिए कि ओर ज्यादा लेबर व मशीनरी लगाकर इसे जल्द से जल्द पूरा करें, पब्लिक को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
सप्ताह में चार दिन चलेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान
बैठक में इस बार भी पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में रेहड़ियों की भरमार से वाहन पार्किंग सुविधा के प्रभावित होने, चौक-चौराहों पर रेड लाईट के सुचारू रूप से काम ना करने व ई-रिक्शा चालकों के ट्रैफिक नियमों का पालन ना करने व अनाधिकृत रूप से ई-रिक्शा चलाने का मुद्दा भी उठा। इन पर चर्चा के दौरान गैर-सरकारी सदस्यों ने कहा कि पुरानी सब्जी मंडी से नगर निगम द्वारा रेहड़ियां हटाए जाने का अभी तक कोई स्थायी हल नहीं निकला है, जबकि यह मुद्दा बार-बार उठाया जाता रहा है। एडीसी ने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई सप्ताह में कम से कम 4 बार करें और पुलिस की मदद लें, इसके बाद इसका हल निकल सकता है।
बिना दस्तावेजों के दौड़ रहे ई-रिक्शा के होंगे चालान
बिना डॉक्यूमेंट पूरे किए शहर में दौड़ती ई-रिक्शा के भी अब चालान होंगे। इसके लिए एडीसी ने पुलिस और आरटीए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा चालकों को दस्तावेज पूरे करने के लिए डेढ़ माह का समय दिया गया था। अब नियमों की पालना न करने वालों के चालान होंगे।
इंद्री रोड पर हादसा हुआ तो आप होंगे जिम्मेदार
करनाल-इंद्री रोड पर समोरा, जनेसरों और नौरता गांव के पास सड़क पर स्थित स्कूलों के आगे सुरक्षा की दृष्टि से स्पीड ब्रेकर बनवाने के लिए एडीसी ने लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन दलेल सिंह को निर्देश दिए, तो एक्सईएन बोले स्टेट हाईवे पर स्पीड ब्रेकर नहीं बना सकते। इस पर एडीसी ने कहा कि यदि यहां हादसा हुआ तो आप जिम्मेदार होंगे। बाद में एक्सईएन ने दो दिन में स्पीड ब्रेकर बनवा उस पर सफेद पेंट कराने की बात कही।
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नेशनल हाईवे-44 पर पानीपत से कुरुक्षेत्र सीमा तक लगने वाले चार फुट ओवरब्रिज 10 साल से सर्विस लेन पर ही रखे हुए हैं। इन्हें आज तक नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने लगवाना जरूरी नहीं समझा। मुद्दा उठा तो कोई न कोई तर्क देकर अधिकारी पीछा छुड़वा लेते। अमर उजाला भी लगातार नेशनल हाईवे की खामियों को उजागर कर रहा है। 16 नवंबर के अंक में भी अधूरे फुट ओवरब्रिज का मामला प्रमुखता से उठाया गया था। इस पर संज्ञान लेते हुए रोड सेफ्टी की बैठक में एनएच अधिकारियों से एडीसी अनीश यादव ने जवाब मांगा। गांव कंबोपुरा, कर्णेश्वर मंदिर, गांव दाहा और पक्का पुल के पास फुट ओवरब्रिज का काम अधूरा है। इसके लिए लोहे के ब्रिज और सीढ़ी भी सपोर्ट पर ही रखी हुई है।
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आप सात लाइट जंक्शन नहीं संभाल पा रहे, दिल्ली जैसा शहर होता तो क्या करते?
बैठक में शहर की खराब ट्रैफिक लाइट व्यवस्था का मुद्दा भी उठा। पिछली बैठकों में भी एडीसी कई बार इन्हें दुरुस्त करने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी लाइटों की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई। खराब लाइटों पर जब एडीसी ने निगम के एमई मुनीश से पूछा तो उन्होंने कहा कि एजेंसी को बुलाया हुआ है जल्द ठीक हो जाएंगी। इस पर सदस्यों ने कहा कि पांच माह पहले भी बैठक में बनी कमेटी ने लाइटों को लेकर शहर का सर्वे किया था। उस दौरान कमियां बताई गई थी, लेकिन आज तक ठीक नहीं हुई। इस पर एडीसी ने करनाल में सात लाइट जंक्शन की स्थिति पूछते ही एमई को कहा कि अभी तो करनाल छोटा सा शहर है, अगर दिल्ली की तरह हर चौक पर लाइटें होती तो क्या करते? उन्होंने सख्त लहजे में निगम के अधिकारियों से कहा कि कभी तो ऐसा काम कर दो, ये सभी लोग कहें कि अब शहर की लाइटें ठीक हैं। हर बार बैठक में मुद्दा उठता है।
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एजेंसी पर पेनाल्टी कितनी लगी ये नहीं बता पाए अधिकारी
बैठक में जब लाइटों के बंद रहने पर इसका संचालन कर रही एजेंसी पर कार्रवाई की बात आई तो एमई मुनीष इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने यह जरूर बताया कि ट्रैफिक लाइटें बंद होने पर 100 रुपये प्रतिदिन और प्रति लाइट के हिसाब से एजेंसी पर फाइन लगाया जाता है। साल का साढ़े चार लाख रुपये का ठेका दिया हुआ है, लेकिन पेनाल्टी अब तक कितनी वसूली इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था।
कैथल ओवरब्रिज पर कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश
करनाल-कैथल रोड पर स्थित ऊपरगामी पुल पर चल रही मरम्मत का मुद्दा भी बैठक में उठा। एनएच-709ए के कार्यकारी अभियंता ने बताया कि इसके लिए 25 दिन का समय निर्धारित किया गया था और काम तेजी से हो रहा है। एडीसी ने निर्देश दिए कि ओर ज्यादा लेबर व मशीनरी लगाकर इसे जल्द से जल्द पूरा करें, पब्लिक को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
सप्ताह में चार दिन चलेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान
बैठक में इस बार भी पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में रेहड़ियों की भरमार से वाहन पार्किंग सुविधा के प्रभावित होने, चौक-चौराहों पर रेड लाईट के सुचारू रूप से काम ना करने व ई-रिक्शा चालकों के ट्रैफिक नियमों का पालन ना करने व अनाधिकृत रूप से ई-रिक्शा चलाने का मुद्दा भी उठा। इन पर चर्चा के दौरान गैर-सरकारी सदस्यों ने कहा कि पुरानी सब्जी मंडी से नगर निगम द्वारा रेहड़ियां हटाए जाने का अभी तक कोई स्थायी हल नहीं निकला है, जबकि यह मुद्दा बार-बार उठाया जाता रहा है। एडीसी ने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई सप्ताह में कम से कम 4 बार करें और पुलिस की मदद लें, इसके बाद इसका हल निकल सकता है।
बिना दस्तावेजों के दौड़ रहे ई-रिक्शा के होंगे चालान
बिना डॉक्यूमेंट पूरे किए शहर में दौड़ती ई-रिक्शा के भी अब चालान होंगे। इसके लिए एडीसी ने पुलिस और आरटीए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा चालकों को दस्तावेज पूरे करने के लिए डेढ़ माह का समय दिया गया था। अब नियमों की पालना न करने वालों के चालान होंगे।
इंद्री रोड पर हादसा हुआ तो आप होंगे जिम्मेदार
करनाल-इंद्री रोड पर समोरा, जनेसरों और नौरता गांव के पास सड़क पर स्थित स्कूलों के आगे सुरक्षा की दृष्टि से स्पीड ब्रेकर बनवाने के लिए एडीसी ने लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन दलेल सिंह को निर्देश दिए, तो एक्सईएन बोले स्टेट हाईवे पर स्पीड ब्रेकर नहीं बना सकते। इस पर एडीसी ने कहा कि यदि यहां हादसा हुआ तो आप जिम्मेदार होंगे। बाद में एक्सईएन ने दो दिन में स्पीड ब्रेकर बनवा उस पर सफेद पेंट कराने की बात कही।