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Karnal News: अधिक ठंड और धूप की कमी से सीजनल डिप्रेशन का खतरा
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161.... डा. मनन।
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ठंड बढ़ने और धूप की कमी के कारण लोग सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) यानी सीजनल डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में करीब दो-तीन सप्ताह पहले रोजाना 40 से 45 के बीच ओपीडी थी, ठंड बढ़ने के बाद ओपीडी 100 से 110 के बीच पहुंच चुकी है। इनमें अधिकतर मरीज डिप्रेशन के शिकार हैं।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि ठंड बढ़ने और सूर्य की रोशनी कम मिलने से शरीर में मेलाटोनिन रसायन की मात्रा बढ़ने लगती है। जिससे शरीर में ऊर्जा के स्तर में बदलाव, दिनचर्या का नियमित अनुसरण न कर पाना, नींद में गड़बड़ी और थकान जैसे लक्षण सामने आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि कई लोगों को बदलते मौसम में मूड स्विंग और उदासी जैसी भावनाएं मन में आती हैं। अक्सर ऐसे लोग सर्दी के मौसम में काफी उदास या खामोश हो जाते हैं। इसका असर दिनचर्या और व्यवहार पर भी पड़ सकता है। वहीं कई लोग मानसिक रूप से परेशान होने लगते हैं।
लाइट थैरेपी सबसे ज्यादा कारगर
डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि सीजनल डिप्रेशन से बाहर लाने में लाइट थैरेपी सबसे ज्यादा कारगार साबित हो रही है। लाइट थैरेपी के लिए मरीजों के बेडरूम में लगे नौ वाट के एलईडी बल्ब के स्थान पर 200 वाट का बल्ब लगवाया जा रहा है। मरीज को सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले 200 वाट का बल्ब जलाकर उसमें करीब आधा घंटे तक बैठने को कहा गया है। वहीं मरीज को बेडशीट बदलने के लिए कहा गया है। जैसे सफेद रंग की बेडशीट पर सोना और पीली बेडशीट का मतलब नहीं सोना बताना है।
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ये हैं लक्षण
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संतोष ने बताया कि सीजनल डिप्रेशन में शरीर में ऊर्जा के स्तर में बदलाव, उदास और निराश महसूस करना, नींद में गड़बड़ी, थकान, मन खराब होना, काम पर फोकस न कर पाना, चीजें भूलना और भूख न लगना, चिड़चिड़ापन, ज्यादा गुस्सा आना, मरने या खुदकुशी का ख्याल आना। यह सब एक सप्ताह तक लगातार होने पर ही आप डिप्रेशन समझ सकते हैं चूंकि कई बार ज्यादा काम करने के कारण भी थकान व अन्य लक्षण सामने आ सकते हैं।
इन उपायों से समस्या को करें दूर
कम्युनिटी हेल्थ नर्सिंग ऑफिसर पूजा ने बताया कि रोजाना सुबह या शाम योग जरूर करें। हेल्दी डाइट लें, खाने में अधिक से अधिक हरी पत्तेदार सब्जियां और फलों को शामिल करें। जंक फूड और मसालेदार खाना खाने से बचें। ध्यान की मदद से दिमाग से नकारात्मक ख्यालों को दूर रखें। अपने परिवार, दोस्तों के साथ समय बिताएं और उनसे मन की बात जरूर शेयर करें। नशे से दूर रहें।
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करनाल। ठंड बढ़ने और धूप की कमी के कारण लोग सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) यानी सीजनल डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में करीब दो-तीन सप्ताह पहले रोजाना 40 से 45 के बीच ओपीडी थी, ठंड बढ़ने के बाद ओपीडी 100 से 110 के बीच पहुंच चुकी है। इनमें अधिकतर मरीज डिप्रेशन के शिकार हैं।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि ठंड बढ़ने और सूर्य की रोशनी कम मिलने से शरीर में मेलाटोनिन रसायन की मात्रा बढ़ने लगती है। जिससे शरीर में ऊर्जा के स्तर में बदलाव, दिनचर्या का नियमित अनुसरण न कर पाना, नींद में गड़बड़ी और थकान जैसे लक्षण सामने आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि कई लोगों को बदलते मौसम में मूड स्विंग और उदासी जैसी भावनाएं मन में आती हैं। अक्सर ऐसे लोग सर्दी के मौसम में काफी उदास या खामोश हो जाते हैं। इसका असर दिनचर्या और व्यवहार पर भी पड़ सकता है। वहीं कई लोग मानसिक रूप से परेशान होने लगते हैं।
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लाइट थैरेपी सबसे ज्यादा कारगर
डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि सीजनल डिप्रेशन से बाहर लाने में लाइट थैरेपी सबसे ज्यादा कारगार साबित हो रही है। लाइट थैरेपी के लिए मरीजों के बेडरूम में लगे नौ वाट के एलईडी बल्ब के स्थान पर 200 वाट का बल्ब लगवाया जा रहा है। मरीज को सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले 200 वाट का बल्ब जलाकर उसमें करीब आधा घंटे तक बैठने को कहा गया है। वहीं मरीज को बेडशीट बदलने के लिए कहा गया है। जैसे सफेद रंग की बेडशीट पर सोना और पीली बेडशीट का मतलब नहीं सोना बताना है।
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ये हैं लक्षण
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संतोष ने बताया कि सीजनल डिप्रेशन में शरीर में ऊर्जा के स्तर में बदलाव, उदास और निराश महसूस करना, नींद में गड़बड़ी, थकान, मन खराब होना, काम पर फोकस न कर पाना, चीजें भूलना और भूख न लगना, चिड़चिड़ापन, ज्यादा गुस्सा आना, मरने या खुदकुशी का ख्याल आना। यह सब एक सप्ताह तक लगातार होने पर ही आप डिप्रेशन समझ सकते हैं चूंकि कई बार ज्यादा काम करने के कारण भी थकान व अन्य लक्षण सामने आ सकते हैं।
इन उपायों से समस्या को करें दूर
कम्युनिटी हेल्थ नर्सिंग ऑफिसर पूजा ने बताया कि रोजाना सुबह या शाम योग जरूर करें। हेल्दी डाइट लें, खाने में अधिक से अधिक हरी पत्तेदार सब्जियां और फलों को शामिल करें। जंक फूड और मसालेदार खाना खाने से बचें। ध्यान की मदद से दिमाग से नकारात्मक ख्यालों को दूर रखें। अपने परिवार, दोस्तों के साथ समय बिताएं और उनसे मन की बात जरूर शेयर करें। नशे से दूर रहें।