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Karnal News: चावल निर्यातकों ने सीएम से मांगा सहयोग, वाणिज्यमंत्री से आज मुलाकात संभव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Oct 2023 02:20 AM IST
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Rice exporters seek cooperation from CM, possible meeting with Commerce Minister today
- चार दिनों से हरियाणा-पंजाब सहित बासमती उत्पादक राज्यों में निर्यातक नहीं खरीद रहे बारीक धान
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हरियाणा व पंजाब सहित देश के बासमती उत्पादक राज्यों में बासमती व उस श्रेणी की अन्य किस्मों के धान की खरीद चौथे दिन बुधवार को भी बंद रही। अखिल भारतीय चावल निर्यातक एसोसिएशन की बैठकों का दौर दिल्ली में दिनभर चलता रहा है। एसोसिएशन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को सहयोग के लिए पत्र लिखा तो केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से फिर मुलाकात का समय मांगा है। उम्मीद है कि वाणिज्यमंत्री से वीरवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बातचीत हो सकती है। एसोसिएशन के कई मंडियों के साथ आने का भी दावा किया है।
निर्यातकों की ओर से बासमती व 1509, 1121, 1718 व पूसा-1 आदि बारीक चावल वाली बासमती की अन्य किस्मों के धान की खरीद 15 अक्तूबर से नहीं की जा रही है, क्योंकि 14 अक्तूबर को केंद्र सरकार ने 1200 डालर प्रति टन की निर्यात सीमा को बरकरार रखने का पत्र जारी किया था। फिलहाल स्थानीय चावल कारोबारी, राइस मिलर्स ने बारीक धान की खरीद जोरशोर से शुरू कर दी, क्योंकि निर्यातकों द्वारा खरीद बंद किए जाने के बाद इन किस्मों के धान के भाव गिर गए हैं। 1509 किस्म का धान 3400 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर 2700 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल बिकने लगा है। इस स्थानीय खरीदारी से निर्यातकों की हड़ताल को झटका लग रहा है। एसोसिएशन ने अब इस खरीद को बंद कराने के लिए लामबंदी शुरू कर दी है। अखिल भारतीय चावल निर्यातक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं हरियाणा राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के राज्याध्यक्ष सुशील जैन ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखा है, जिसमें मांग की गई है कि वह निर्यातकों की समस्या को केंद्र सरकार के सामने रखें और निर्यात सीमा को 850 डालर कराने में सहयोग करें। साथ ही वाणिज्य मंत्री से मिलने का समय मांगा गया है। वाणिज्य मंत्री के आज व्यस्त होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी, संभव है कि वीरवार को मुलाकात हो जाए।
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उन्होंने बताया कि जो छोटे व्यापारी, मिलर बारीक धान खरीद रहे हैं, इन्हें रोकने के लिए कई मंडियों जिसमें समालखा, पानीपत, मतलौडा, सफीदो, पीलोखेड़ा, जुलाना, रोहतक, नारनौल, गुन्नौर, घरौंडा आदि मंडियों के प्रधानों ने उनका साथ देने का वादा किया है, यहां अब बारीक धान नहीं खरीदा जाएगा, कई अन्य मंडियां भी शीघ्र ही एसोसिएशन के साथ आ जाएंगी। उन्होंने उम्मीद जाहिर की समस्या का हल दो तीन दिन में निकल आएगा।
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