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लाठीचार्ज की न्यायिक जांच को सरकार तैयार, धरना खत्म
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लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों का प्रशासन के साथ टकराव खत्म हो गया है। किसानों की प्रशासन के साथ दो मांगों पर सहमति बन गई है। जिसके बाद पांचवें दिन किसानों ने लघु सचिवालय से धरना खत्म करने का एलान कर दिया है।
किसानों की मानी गई मांगों के तहत सरकार द्वारा लाठीचार्ज प्रकरण की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज के द्वारा करवाई जाएगी, जो एक माह में पूरी होगी। जांच के दौरान करनाल के तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे। वहीं, दूसरी मांग में मृतक किसान सुशील काजल के परिवार के दो सदस्यों को स्वीकृत पद पर डीसी रेट के तहत नौकरी दी जाएगी।
दोनों पक्षों में समझौते की घोषणा प्रशासन की ओर से हरियाणा कृषि विभाग के एसीएस देवेंद्र सिंह, उपायुक्त निशांत कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया और किसान संगठनों की ओर से भाकियू हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य नेताओं की उपस्थिति में संयुक्त रूप से मीडिया से रूबरू होते हुए की गई।
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एसीएस ने कहा कि किसान नेताओं के साथ प्रशासन पिछले चार दिनों से लगातार एक सौहार्दपूर्ण माहौल में वार्ता करता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों में सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि किसान संगठनों की मांग थी कि बसताड़ा टोल पर 28 अगस्त को लाठीचार्ज मामले की जांच करवाई जाए और मृतक किसान सुशील काजल को उचित मुआवजा दिया जाए। इन मांगों पर प्रशासन व किसान नेताओं के बीच शुक्रवार देर शाम तक चार दौर की बातचीत हुई, जिसमें प्रशासन व किसानों के बीच सहमति बन गई थी, लेकिन अंतिम फैसला शनिवार सुबह फिर से अफसरों और किसानाें के बीच होने वाली बैठक में किया जाना था।
वहीं किसान नेताओं की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा और गंभीर रूप से घायल हुए किसानों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा भी मिलेगा। लेकिन अधिकारिक रूप से इन दोनों मांगों के मानने की पुष्टि प्रशासन की ओर से नहीं की गई है। उधर, दोपहर तक लघु सचिवालय के समक्ष हजारों की संख्या में किसान धरना स्थल पर जुटे हुए थे। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसानों के बीच दोनों पक्षों में समझौता होने की जानकारी दी। जिसके बाद धरने पर बैठे किसानों ने लंगर छका और फिर लघु सचिवालय से वापस कूच करना शुरू कर दिया। यह किसान अब अपनी पूर्व मांागें के समर्थन में चल रहे विभिन्न धरना स्थलों पर जाकर पहले की तरह धरने देंगे।
यह था मामला-
28 अगस्त को किसानों ने करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता वाली भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक का विरोध करने का एलान किया था। इसके लिए किसान एकजुट भी हो गए थे। लेकिन शहर को पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह सील कर दिया था। इसलिए किसानों का जमावड़ा नेशनल हाईवे-44 स्थित बसताड़ा टोल पर लग गया। वहीं पुलिस और किसानों के बीच टकराव हुआ और पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। उधर, तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा का लाठीचार्ज करने का आदेश देते हुए का वीडियो वायरल हो गया। जिससे किसान नाराज हो गए। इसी के विरोध में 7 सितंबर को करनाल में किसान महापंचायत हुई, जिसके बाद उसी दिन शाम को हजारों किसानों ने लघु सचिवालय पर डेरा जमा दिया।
किसान हमारे भाई, सम्मानजनक तरीके से हुआ समझौता
किसान हमारे भाई हैं और यह समझौता बड़े सम्मानजनक तरीके से हुआ है। पूरी वार्ता के बाद ही निर्णय पर पहुंचे हैं, लाठीचार्ज मामले की जांच एक माह में पूरी करवाई जाएगी और इस दौरान तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे। इसके साथ-साथ मृतक किसान के परिवार के दो सदस्यों को डीसी रेट के स्वीकृत पद पर एक सप्ताह में नौकरी दी जाएगी।
-देवेन्द्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि विभाग
भाजपा-जजपा नेताओं का विरोध जारी रहेगा, पहले की तरह धरने चलेंगे
बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज मामले को लेकर करनाल में किसानों का मोर्चा लगा था। सरकार और प्रशासन से मांगों पर सहमति बन गई है, इसलिए यहां धरना समाप्त कर दिया है। लेकिन प्रदेश भर में कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। इसके तहत जहां जहां पहले धरने चल रहे थे, वो भी चलेंगे और भाजपा-जजपा नेताओं का विरोध भी पहले की तरह ही करेंगे।
- गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू हरियाणा।
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किसानों की मानी गई मांगों के तहत सरकार द्वारा लाठीचार्ज प्रकरण की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज के द्वारा करवाई जाएगी, जो एक माह में पूरी होगी। जांच के दौरान करनाल के तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे। वहीं, दूसरी मांग में मृतक किसान सुशील काजल के परिवार के दो सदस्यों को स्वीकृत पद पर डीसी रेट के तहत नौकरी दी जाएगी।
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दोनों पक्षों में समझौते की घोषणा प्रशासन की ओर से हरियाणा कृषि विभाग के एसीएस देवेंद्र सिंह, उपायुक्त निशांत कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया और किसान संगठनों की ओर से भाकियू हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य नेताओं की उपस्थिति में संयुक्त रूप से मीडिया से रूबरू होते हुए की गई।
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एसीएस ने कहा कि किसान नेताओं के साथ प्रशासन पिछले चार दिनों से लगातार एक सौहार्दपूर्ण माहौल में वार्ता करता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों में सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि किसान संगठनों की मांग थी कि बसताड़ा टोल पर 28 अगस्त को लाठीचार्ज मामले की जांच करवाई जाए और मृतक किसान सुशील काजल को उचित मुआवजा दिया जाए। इन मांगों पर प्रशासन व किसान नेताओं के बीच शुक्रवार देर शाम तक चार दौर की बातचीत हुई, जिसमें प्रशासन व किसानों के बीच सहमति बन गई थी, लेकिन अंतिम फैसला शनिवार सुबह फिर से अफसरों और किसानाें के बीच होने वाली बैठक में किया जाना था।
वहीं किसान नेताओं की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा और गंभीर रूप से घायल हुए किसानों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा भी मिलेगा। लेकिन अधिकारिक रूप से इन दोनों मांगों के मानने की पुष्टि प्रशासन की ओर से नहीं की गई है। उधर, दोपहर तक लघु सचिवालय के समक्ष हजारों की संख्या में किसान धरना स्थल पर जुटे हुए थे। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसानों के बीच दोनों पक्षों में समझौता होने की जानकारी दी। जिसके बाद धरने पर बैठे किसानों ने लंगर छका और फिर लघु सचिवालय से वापस कूच करना शुरू कर दिया। यह किसान अब अपनी पूर्व मांागें के समर्थन में चल रहे विभिन्न धरना स्थलों पर जाकर पहले की तरह धरने देंगे।
यह था मामला-
28 अगस्त को किसानों ने करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता वाली भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक का विरोध करने का एलान किया था। इसके लिए किसान एकजुट भी हो गए थे। लेकिन शहर को पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह सील कर दिया था। इसलिए किसानों का जमावड़ा नेशनल हाईवे-44 स्थित बसताड़ा टोल पर लग गया। वहीं पुलिस और किसानों के बीच टकराव हुआ और पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। उधर, तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा का लाठीचार्ज करने का आदेश देते हुए का वीडियो वायरल हो गया। जिससे किसान नाराज हो गए। इसी के विरोध में 7 सितंबर को करनाल में किसान महापंचायत हुई, जिसके बाद उसी दिन शाम को हजारों किसानों ने लघु सचिवालय पर डेरा जमा दिया।
किसान हमारे भाई, सम्मानजनक तरीके से हुआ समझौता
किसान हमारे भाई हैं और यह समझौता बड़े सम्मानजनक तरीके से हुआ है। पूरी वार्ता के बाद ही निर्णय पर पहुंचे हैं, लाठीचार्ज मामले की जांच एक माह में पूरी करवाई जाएगी और इस दौरान तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे। इसके साथ-साथ मृतक किसान के परिवार के दो सदस्यों को डीसी रेट के स्वीकृत पद पर एक सप्ताह में नौकरी दी जाएगी।
-देवेन्द्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि विभाग
भाजपा-जजपा नेताओं का विरोध जारी रहेगा, पहले की तरह धरने चलेंगे
बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज मामले को लेकर करनाल में किसानों का मोर्चा लगा था। सरकार और प्रशासन से मांगों पर सहमति बन गई है, इसलिए यहां धरना समाप्त कर दिया है। लेकिन प्रदेश भर में कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। इसके तहत जहां जहां पहले धरने चल रहे थे, वो भी चलेंगे और भाजपा-जजपा नेताओं का विरोध भी पहले की तरह ही करेंगे।
- गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू हरियाणा।