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प्रदूषण कम होते ही जेनरेटर से हटा प्रतिबंध, उद्यमियों को राहत
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ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) पर उपसमिति की 12वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अब जेनसेट पर लगाई गई रोक को हटा लिया गया है। जिससे करनाल, पानीपत आदि एनसीआर क्षेत्र के उद्यमियों को बड़ी राहत मिली है। वहीं सितंबर माह तक केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति द्वारा पीएनजी आदि जैविक ईंधन पर आने का आदेश उद्यमियों की चिंता का कारण बना है, क्योंकि जिले में अभी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) या कंप्रेश नेचुरल गैस (सीएनजी) नहीं पहुंच पाई है।
केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति ने एनसीआर क्षेत्र में आने वाले उद्यमों को बायोमास ईंधन यानी पीएनजी और सीएनजी पर आने के लिए 30 सितंबर 2022 तक का समय दिया है। जेनरेटर संचालन पर रोक लगाई गई थी उसे हटा लिया है। करनाल औद्योगिक क्षेत्र की करीब 500 इंडस्ट्री मिलाकर जिले भर में करीब तीन हजार से अधिक उद्यम हैं। एक हजार से अधिक तो राइस मिल ही हैं।
45 उद्यम किए पीएनजी
इंद्रप्रस्थ गैस (पीएनजी) के क्षेत्रीय अधिकारी अंकुश जैन ने बताया कि करनाल के इंडस्ट्रियल एरिया में पीएनजी पहुंच गई है, करीब 30 उद्यमों को पीएनजी पर कर दिया गया है। अल्लीपुर खालसा में काम चल रहा है, मुगलमाजरा में भी आठ इंडस्ट्री हैं, यहां भी पीएनजी पहुंचाई जाएगी। जिले में करीब 45 यूनिट को पीएनजी पर कर दिया गया है। अभी राइस मिलर्स पीएनजी की ओर नहीं बढ़ रहे हैं।
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उप समिति ने जेनसेट से प्रतिबंध हटा लिया है। करनाल को एनसीआर क्षेत्र से बाहर करने का प्रयास भी लगातार चल रहा है, इसके लिए मुख्यमंत्री भी केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं, क्योंकि दिल्ली से करनाल करीब 120 किमी दूर है, यह बहुत ज्यादा दूरी है, यहां कोई अधिक प्रदूषण वाला उद्योग भी नहीं है। फाइल पीएमओ में विचाराधीन है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार शीघ्र करनाल को एनसीआर से बाहर करने का आदेश जारी कर सकती है।
अमित गुप्ता, उपाध्यक्ष हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स
पीएनजी काफी महंगी हो गई है। पहले 40 से 42 रुपये प्रति किलो थी, अब 60 से 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कोयला व फर्नेस ऑयल इससे सस्ता पड़ता है। इस आदेश से बाजार में अनियमितता बढे़गी, क्योंकि जो उद्योग एनसीआर से बाहर के हैं उनके उत्पाद सस्ते और एनसीआर क्षेत्र के उद्यमों के महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा असर उद्यमों पर पडे़गा। जहां पर पीएनजी नहीं है तो उन्हें मशीनें ही बदलनी होंगी, जो काफी महंगा पड़ेगा।
मनोज अरोड़ा, प्रधान-हरियाणा स्टेट इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन।
कई देशों में धान के छिलके (भूसी) पर राइस मिलों को चलाने संबंधी बात कही गई है। भूसी जैविक ईंधन है, इसके प्रमाण भी लगाए गए हैं। इसकी फाइल दिल्ली में विचाराधीन है। उम्मीद है शीघ्र धान के छिलके को जैविक ईंधन की मान्यता मिल जाएगी। इसके बाद राइस मिलर्स की समस्या का समाधान हो जाएगा। इसकी मजबूत पैरवी भी की जा रही है।
विजय सेतिया पूर्व प्रधान आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन।
जेनरेटर संचालन से प्रतिबंध हटा लिया है, एनसीआर के उद्यमों को 30 सितंबर 2022 तक बिना पीएनजी-सीएनजी के संचालन की अनुमति भी मिल गई है, लेकिन अभी एनसीआर क्षेत्र में राइस मिलों की नई यूनिट स्थापित करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए राइस मिलों पर एक रिपोर्ट भेजकर हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मार्गदर्शन मांगा गया है कि नई राइस मिल यूनिटों को बिना सीएनजी-पीएनजी के अनुमति दी जा सकती है या नहीं।
- शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करनाल
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केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति ने एनसीआर क्षेत्र में आने वाले उद्यमों को बायोमास ईंधन यानी पीएनजी और सीएनजी पर आने के लिए 30 सितंबर 2022 तक का समय दिया है। जेनरेटर संचालन पर रोक लगाई गई थी उसे हटा लिया है। करनाल औद्योगिक क्षेत्र की करीब 500 इंडस्ट्री मिलाकर जिले भर में करीब तीन हजार से अधिक उद्यम हैं। एक हजार से अधिक तो राइस मिल ही हैं।
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45 उद्यम किए पीएनजी
इंद्रप्रस्थ गैस (पीएनजी) के क्षेत्रीय अधिकारी अंकुश जैन ने बताया कि करनाल के इंडस्ट्रियल एरिया में पीएनजी पहुंच गई है, करीब 30 उद्यमों को पीएनजी पर कर दिया गया है। अल्लीपुर खालसा में काम चल रहा है, मुगलमाजरा में भी आठ इंडस्ट्री हैं, यहां भी पीएनजी पहुंचाई जाएगी। जिले में करीब 45 यूनिट को पीएनजी पर कर दिया गया है। अभी राइस मिलर्स पीएनजी की ओर नहीं बढ़ रहे हैं।
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उप समिति ने जेनसेट से प्रतिबंध हटा लिया है। करनाल को एनसीआर क्षेत्र से बाहर करने का प्रयास भी लगातार चल रहा है, इसके लिए मुख्यमंत्री भी केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं, क्योंकि दिल्ली से करनाल करीब 120 किमी दूर है, यह बहुत ज्यादा दूरी है, यहां कोई अधिक प्रदूषण वाला उद्योग भी नहीं है। फाइल पीएमओ में विचाराधीन है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार शीघ्र करनाल को एनसीआर से बाहर करने का आदेश जारी कर सकती है।
अमित गुप्ता, उपाध्यक्ष हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स
पीएनजी काफी महंगी हो गई है। पहले 40 से 42 रुपये प्रति किलो थी, अब 60 से 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कोयला व फर्नेस ऑयल इससे सस्ता पड़ता है। इस आदेश से बाजार में अनियमितता बढे़गी, क्योंकि जो उद्योग एनसीआर से बाहर के हैं उनके उत्पाद सस्ते और एनसीआर क्षेत्र के उद्यमों के महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा असर उद्यमों पर पडे़गा। जहां पर पीएनजी नहीं है तो उन्हें मशीनें ही बदलनी होंगी, जो काफी महंगा पड़ेगा।
मनोज अरोड़ा, प्रधान-हरियाणा स्टेट इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन।
कई देशों में धान के छिलके (भूसी) पर राइस मिलों को चलाने संबंधी बात कही गई है। भूसी जैविक ईंधन है, इसके प्रमाण भी लगाए गए हैं। इसकी फाइल दिल्ली में विचाराधीन है। उम्मीद है शीघ्र धान के छिलके को जैविक ईंधन की मान्यता मिल जाएगी। इसके बाद राइस मिलर्स की समस्या का समाधान हो जाएगा। इसकी मजबूत पैरवी भी की जा रही है।
विजय सेतिया पूर्व प्रधान आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन।
जेनरेटर संचालन से प्रतिबंध हटा लिया है, एनसीआर के उद्यमों को 30 सितंबर 2022 तक बिना पीएनजी-सीएनजी के संचालन की अनुमति भी मिल गई है, लेकिन अभी एनसीआर क्षेत्र में राइस मिलों की नई यूनिट स्थापित करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए राइस मिलों पर एक रिपोर्ट भेजकर हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मार्गदर्शन मांगा गया है कि नई राइस मिल यूनिटों को बिना सीएनजी-पीएनजी के अनुमति दी जा सकती है या नहीं।
- शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करनाल