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पदोन्नति में आरक्षण और नौकरियों में प्रतिनिधित्व की उठी मांग
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करनाल। हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ के बैनर तले अध्यापकों व अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। पहले फव्वारा पार्क में एकत्रित हुए और यहां से जुलूस के रूप में जिला सचिवालय तक पहुंचे। डीसी कार्यालय के अधीक्षक मुकेश कुमार को मुख्यमंत्री के नाम मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण और बेरोजगार युवाओं को नौकरियों में संवैधानिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए। पंजाब ने 1974 से श्रेणी एक व श्रेणी दो के पदों पर अनुसूचित जाति कर्मचारियों को पदोन्नति में अनुपातिक प्रतिनिधित्व देना लागू किया। वहीं हरियाणा में इस प्रतिनिधित्व का लाभ अनुसूचित जाति के लोगों को 1966 से ही देना बंद कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में स्पष्ट कहा गया है कि रिजर्वेशन रोस्टर अनुसार एससी एसटी व ओबीसी के वर्गों को सभी पदों पर जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिधित्व दिया जाना है। पदोन्नति की सूचियों में अनुसूचित जाति के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, उप जिला शिक्षा अधिकारी, डाइट प्रिंसिपल, प्रधानाचार्य, हैडमास्टर व समकक्ष हजारों क्लास वन व क्लास टू पदों पर पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। यह सरासर जातिगत भेदभाव केवल हरियाणा में ही है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में फाउंडेशन स्तर का आधारभूत ढांचा दुरुस्त किया जाए, टीचर ट्रांसफर ड्राइव नियमित रूप से समय पर की जाए, अनुसूचित जाति के उत्पीड़न पर त्वरित कार्रवाई की जाए और पुरानी पेंशन स्कीम बहाली उनकी मुख्य मांग है। इस अवसर पर प्रधान सुशील कुमार भोला, हुकम चंद, सचिव सुभाष, बलवंत सिंह, बलवान सिंह, करनैल सिंह, प्रेमपाल चंदेल, हंसराज, राजेश कुमार, ईश्वर, अजय मास्टर, मेहर सिंह, रोडवेज यूनियन से राज्य महासचिव संदीप बौद्ध, नरेंद्र देव, संतलाल, बलराज, मनोज कुमार, नरेश सैनी, नरेश, मुकेश, चंद्रमोहन और दलबीर राठी मौजूद रहे। ब्यूरो
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संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण और बेरोजगार युवाओं को नौकरियों में संवैधानिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए। पंजाब ने 1974 से श्रेणी एक व श्रेणी दो के पदों पर अनुसूचित जाति कर्मचारियों को पदोन्नति में अनुपातिक प्रतिनिधित्व देना लागू किया। वहीं हरियाणा में इस प्रतिनिधित्व का लाभ अनुसूचित जाति के लोगों को 1966 से ही देना बंद कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में स्पष्ट कहा गया है कि रिजर्वेशन रोस्टर अनुसार एससी एसटी व ओबीसी के वर्गों को सभी पदों पर जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिधित्व दिया जाना है। पदोन्नति की सूचियों में अनुसूचित जाति के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, उप जिला शिक्षा अधिकारी, डाइट प्रिंसिपल, प्रधानाचार्य, हैडमास्टर व समकक्ष हजारों क्लास वन व क्लास टू पदों पर पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। यह सरासर जातिगत भेदभाव केवल हरियाणा में ही है।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में फाउंडेशन स्तर का आधारभूत ढांचा दुरुस्त किया जाए, टीचर ट्रांसफर ड्राइव नियमित रूप से समय पर की जाए, अनुसूचित जाति के उत्पीड़न पर त्वरित कार्रवाई की जाए और पुरानी पेंशन स्कीम बहाली उनकी मुख्य मांग है। इस अवसर पर प्रधान सुशील कुमार भोला, हुकम चंद, सचिव सुभाष, बलवंत सिंह, बलवान सिंह, करनैल सिंह, प्रेमपाल चंदेल, हंसराज, राजेश कुमार, ईश्वर, अजय मास्टर, मेहर सिंह, रोडवेज यूनियन से राज्य महासचिव संदीप बौद्ध, नरेंद्र देव, संतलाल, बलराज, मनोज कुमार, नरेश सैनी, नरेश, मुकेश, चंद्रमोहन और दलबीर राठी मौजूद रहे। ब्यूरो
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