फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Research on medicinal-aromatic plants will be done in MHU

Karnal News: एमएचयू में होगा औषधीय-सगंधीय पौधों पर अनुसंधान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jul 2025 02:53 AM IST
विज्ञापन
Research on medicinal-aromatic plants will be done in MHU
- करनाल में विकसित तकनीक और किस्मों को देशभर में अलग-अलग जलवायु में किया जा सकेगा टेस्ट
विज्ञापन

माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय में औषधीय और सगंधीय (सुगंध वाले) पौधों पर अनुसंधान होगा, नई किस्मों के साथ नई तकनीक विकसित की जाएंगी, जिनका फायदा उत्तर भारत के किसानों को होगा। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है, साथ ही उद्यान महाविद्यालय को औषधीय एवं सगंधीय विभाग को टेस्टिंग सेंटर घोषित कर दिया है। जिससे अब ये हरियाणा का पहला और देश का 24वां मल्टीलोकेशन टेस्टिंग सेंटर हो गया हैं। प्रोजेक्टर के माध्यम से सितंबर या अक्तूबर से अनुसंधान कार्य शुरू हो जाएगा।
महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू) के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि अब एमएचयू हरियाणा की जलवायु के हिसाब से औषधीय व संगधीय पौधों पर अनुसंधान करके नई तकनीक विकसित करेंगा, जिसे किसानों को उपलब्ध कराएगा, जिससे किसानों को पारंपरिक खेती से हटाकर बड़े मुनाफे वाली औषधीय और सुगंधित खेती की ओर मोड़ा जा सके। जिससे उनकी आमदनी में कई गुना इजाफा हो सकेगा।
विज्ञापन

कुलपति ने बताया कि ऑल इंडिया को-ऑर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार से एमएचयू करनाल को आईसीएआर से औषधीय व संगधीय पौधों पर अनुसंधान (रिसर्च) करने के लिए केंद्र (वालेंटियर सेंटर) बना दिया है। ऐसा निदेशक एवं समन्यक डॉ. मनीष दासकी की ओर से भेजी गई सूचना के आधार पर घोषित किया है। ये केंद्र उत्तर भारत के मैदानी इलाके का इकलौता है। यहां औषधीय व संगधीय पौधों पर शोध किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि सदियों से बहुत से रोगों का इलाज आयुर्वेदिक औषधि से किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक औषधि बनाने के लिए रॉ मटीरियल की आवश्यकता होती है, जिसमें गिलोए, वकोपा, अश्वगंधा, तुलसी, कालमेद्य, सर्पगंधा, ब्रहमी जैसे कई औषधीय पौधे शामिल हैं, की उपलब्धता कम हो गई है। जिससे आयुर्वेदिक दवा कंपनियों को कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। अब जब किसान इनकी खेती करेंगे तो किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे और आयुर्वेदिक दवाओं का चलन और तेजी से बढ़ेगा।

क्या है मल्टीलोकेशन टेस्टिंग
कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि सब्जियों और मसालों के साथ-साथ औषधीय व संगधीय पौधों पर देशभर मेंं अलग-अलग संस्थानों की ओर से विभिन्न प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। मल्टीलोकेशन टेस्टिंग का मतलब है कि यदि हमने कोई नई किस्म या तकनीक विकसित की तो उसे देश के विभिन्न केंद्रों पर वहां की जलवायु में टेस्ट किया जा सकेगा और अन्य केंद्रों की तकनीक या किस्मों को हम करनाल में हरियाणा की जलवायु में टेस्ट करेंगे, ताकि नई किस्मों और तकनीकों का कम समय में पूरे देश में आदान-प्रदान हो जाएगा। जिससे किसान उच्च मूल्यवान फसलों को खेती में समावेश कर सकेंगे। धान व गेहूं की खेती करते करते भूमि की उर्वरा शक्ति एवं प्राकृतिक संसाधनों का बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन का असर भी खेती पर न पड़े, इसके लिए किसानों को फसल विविधिकरण की ओर अग्रसर होना ही पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed