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Karnal News: दाववा खारिज करना पड़ा महंगा, बीमा की रकम के साथ देना होगा हर्जाना
Mon, 26 Jan 2026 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:55 AM IST
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करनाल।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गाय की मौत पर बीमा दावा रोकने के मामले में द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। अदालत ने कंपनी को पीड़ित किसान को बीमा राशि, ब्याज और मुआवजे समेत कुल भुगतान करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है।
जिले के बड़ा गांव निवासी वीरेंद्र कुमार ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से अपनी गाय का बीमा कराया था। इसमें बीमा राशि 50 हजार थी। बीमा अवधि यानि 22 अप्रैल 2019 से 21 अप्रैल 2020 के दौरान ही 3 अप्रैल 2020 को गाय की मृत्यु हो गई। किसान का आरोप था कि उन्होंने घटना के दिन ही व्हाट्सएप और लिखित पत्र के माध्यम से कंपनी को सूचित किया, लेकिन कंपनी ने क्लेम का भुगतान नहीं किया। बल्कि उनका क्लेम खारिज कर दिया।
आयोग के समक्ष बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता ने यह शिकायत समय से पहले की है क्योंकि उन्हें गाय की मौत की कोई सूचना या क्लेम फॉर्म प्राप्त ही नहीं हुआ था। कंपनी ने कहा कि सूचना न मिलने के कारण वे मामले की जांच नहीं कर सके।
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45 दिन में देनी होगी बीमा की रकम, हर्जाना
आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी पशु पालक वीरेंद्र कुमार को बीमा राशि यानि 50 हजार रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ और 20 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के तौर पर देगी। पांच हजार 500 रुपये की राशि मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में देने होंगे। आयोग ने कंपनी को इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए हैं।
कंपनी का व्यवहार मनमाना और अनुचित
मामले में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने दस्तावेज की जांच के बाद पाया कि किसान ने क्लेम फॉर्म और सूचना पत्र पेश किए। इससे साबित हुआ कि कंपनी को उसी दिन सूचना दे दी गई थी। इसके अलावा डॉक्टर की ओर से किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी जमा करवाई गई थी। इस पर आयोग ने कहा कि आजकल बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में तो बहुत रुचि दिखाती है लेकिन क्लेम देने के समय बहानेबाजी करती हैं। कंपनी का क्लेम रोकना पूरी तरह से ‘मनमाना और अनुचित’ है।
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गाय की मौत पर बीमा दावा रोकने के मामले में द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। अदालत ने कंपनी को पीड़ित किसान को बीमा राशि, ब्याज और मुआवजे समेत कुल भुगतान करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है।
जिले के बड़ा गांव निवासी वीरेंद्र कुमार ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से अपनी गाय का बीमा कराया था। इसमें बीमा राशि 50 हजार थी। बीमा अवधि यानि 22 अप्रैल 2019 से 21 अप्रैल 2020 के दौरान ही 3 अप्रैल 2020 को गाय की मृत्यु हो गई। किसान का आरोप था कि उन्होंने घटना के दिन ही व्हाट्सएप और लिखित पत्र के माध्यम से कंपनी को सूचित किया, लेकिन कंपनी ने क्लेम का भुगतान नहीं किया। बल्कि उनका क्लेम खारिज कर दिया।
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आयोग के समक्ष बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता ने यह शिकायत समय से पहले की है क्योंकि उन्हें गाय की मौत की कोई सूचना या क्लेम फॉर्म प्राप्त ही नहीं हुआ था। कंपनी ने कहा कि सूचना न मिलने के कारण वे मामले की जांच नहीं कर सके।
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45 दिन में देनी होगी बीमा की रकम, हर्जाना
आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी पशु पालक वीरेंद्र कुमार को बीमा राशि यानि 50 हजार रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ और 20 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के तौर पर देगी। पांच हजार 500 रुपये की राशि मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में देने होंगे। आयोग ने कंपनी को इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए हैं।
कंपनी का व्यवहार मनमाना और अनुचित
मामले में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने दस्तावेज की जांच के बाद पाया कि किसान ने क्लेम फॉर्म और सूचना पत्र पेश किए। इससे साबित हुआ कि कंपनी को उसी दिन सूचना दे दी गई थी। इसके अलावा डॉक्टर की ओर से किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी जमा करवाई गई थी। इस पर आयोग ने कहा कि आजकल बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में तो बहुत रुचि दिखाती है लेकिन क्लेम देने के समय बहानेबाजी करती हैं। कंपनी का क्लेम रोकना पूरी तरह से ‘मनमाना और अनुचित’ है।