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Karnal News: पांच सौ वर्ग मीटर से अधिक के भूखंड पर निर्माण से पूर्व कराना होगा पंजीकरण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Aug 2023 02:04 AM IST
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Registration will have to be done before construction on a plot of more than five hundred square meters
- भवन निर्माण के दौरान होगी निगरानी, विभिन्न विभागों की रहेगी जिम्मेदारी
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- दिवाली, धान की पराली के सीजन में बढ़ने वाले प्रदूषण को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सतर्क
देव शर्मा
करनाल। एनसीआर क्षेत्र में अब 500 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर बनने वाले भवनों के निर्माण से पूर्व डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए निर्माण के दौरान केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग (सीएक्यूएम) के आदेशों के क्रम में निगरानी की जाएगी। साथ ही हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली और धान की पराली के मौसम में प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए कवायद तेज कर दी है, जिस कारण कई अन्य प्रतिबंधों का सामना भी लोगों को करना पड़ेगा। 14 सितंबर को इस पर चर्चा करने के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पानीपत में एनसीआर के जिलों के निर्माण से जुड़े सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने बताया कि आने वाला समय त्योहारों का हैं। खासकर दिवाली, जब पटाखे आदि चलाए जाते हैं। धान की फसल भी अगले माह आनी शुरू हो जाएगी। अक्सर हरियाणा के जिलों से पराली जलने के मामले प्रकाश में आते हैं, जिन्हें भी प्रदूषण की एक वजह माना जाता है। इन पर नियंत्रण रखने की कवायद बोर्ड की ओर से शुरू कर दी गई है।
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क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से हाल ही में 500 वर्ग से अधिक के भूखंडों पर भवन आदि किसी भी तरह के निर्माण से पूर्व डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे भूखंडों पर भवन, औद्योगिक या अन्य किसी भी तरह का निर्माण सरकारी हो या गैर सरकारी बिना पंजीकरण के नहीं किया जा सकेगा। डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण के बाद संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी जाएगी। ये निगरानी रहेगी कि डस्ट तो नहीं फैल रहा है, भवन निर्माण सामग्री को ढक कर रखा गया है या नहीं, निर्माण सामग्री को बिना ढके तो नहीं लाया जा रहा है। सेंसर कैमरे लगे हैं या नहीं। वायु गुणवत्ता नियंत्रण आयोग के नियमों का पालन करना होगा। यदि कोई बिना पंजीकरण निर्माण करता पाया गया तो उसके खिलाफ बोर्ड की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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सीएक्यूएम के नियमों के तहत आवासीय, औद्योगिक, व्यापारिक आदि किसी भी तरह के डीजल जेनरेटर पर कई नियम लागू किए गए हैं। उद्योगों में प्रयुक्त जेनरेटरों पर दोहरे ईंधन चलित किट( ड्यूल फ्यूल मोड किट) व रेट्रोफिटेड इमीशन कंट्रोल डिवाइस (आरईसी्डी) को अनिवार्य रूप से 30 सितंबर तक लगाने के आदेश दिए गए हैं। इधर, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री करनाल के अध्यक्ष सुशील जैन ने बताया कि जेनरेटर पर ये प्रतिबंध लागू तो कर दिए गए लेकिन ये किट व आरईसीडी उपलब्ध ही नहीं है, इनकी मरम्मत करने वाले मैकेनिक भी नहीं है। सबसे बड़ी बात ये जेनरेटर की कुल कीमत से भी महंगी है, जो एमएसएमई की औद्योगिक इकाइयों के लिए तो बहुत काफी साबित होंगी। इसलिए सरकार से इसके लिए अभी और समय देने की मांग की गई है लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।
कई जगह नहीं सीएनजी या पीएनजी गैस पाइप
सीएक्यूएम ने जिन किटों को जनरेटरों पर लगाने की बात कही है, जिससे ये जेनरेटर डीजल के साथ-साथ गैस से भी संचालित हो सकेंगे, लेकिन उद्यमियों का कहना है कि अब तक जिले में कई औद्योगिक स्थल ऐसे हैं, जहां सीएनजी या पीएनजी गैस की पाइप लाइनें ही नहीं पहुंची है। ऐसी अवस्था में यदि दोहरी ईंधन वाली किट को लगा भी लिया जाए तो उसका कोई लाभ नहीं होगा। वैसे भी उद्योगों में जेनरेटर सिर्फ बिजली की लाइन में फाल्ट या कटौती की स्थिति में ही चलाए जाते हैंं। नियमों को लागू करने से पहले सभी स्थानों पर गैस पाइप लाइनों को डाला चाहिए।

भवन निर्माण के साथ-साथ दिवाली और पराली का सीजन नजदीक है। ऐसे में प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए 14 सितंबर को पानीपत में हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन एनसीआर के सोनीपत, पानीपत व करनाल जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें नगर निगम, नगरपालिकाएं, पीडब्ल्यूडी, बी एंड आर, पुलिस आदि निर्माण व वाहनों से जुड़े सभी विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। पुराने वाहनों व अधिक धुआं देने वाला मामला पुलिस महकमे से जुड़ा है, इसलिए पुलिस विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। इसमें प्रदूषण रोकने के कार्यो की समीक्षा व अग्रिम रणनीति तैयार की जाएगी।
- शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, करनाल
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