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पार्षद प्रतिनिधि से मांगे थे 25 हजार, ऊपर तक बात पहुंचाई तो सीएम औचक निरीक्षण करने पहुंच

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 02:36 AM IST
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rajitrar office karnal
पिछले कार्यकाल में प्रदेश सरकार जहां तहसीलों से भ्रष्टाचार समाप्त करने के दावे करती रही, वहीं नये कार्यकाल में कार्रवाई की शुरुआत ही तहसील में फैले भ्रष्टाचार से हुई। बेशक सरकार ने रजिस्ट्री करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया हुआ हो, पर भ्रष्टाचार निरंतर चला हुआ है। तहसील में रजिस्ट्री के लिए टोकन लेने से लेकर रजिस्ट्री होने तक हर कदम पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। सभी की फीस तय है, पैसे आए तो फाइल आगे, नहीं तो दब गई। फाइल को आगे बढ़ाने के लिए कदम-कदम पर रिश्वत देनी पड़ती है। जो ऐसा नहीं करता, उसको चक्कर पे चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बाद भी आसानी से काम पूरा नहीं हो पाता। सीएम और मंत्री के शहर में आने पर तहसील की शिकायतें खूब आती हैं, लेकिन पहले कार्रवाई नहीं होती थी। अबकी बार खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया और तहसील का निरीक्षण किया।
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ऐसा ही शहर के एक पार्षद प्रतिनिधि के साथ हुआ। पार्षद प्रतिनिधि ने भाजपा नेताओं के माध्यम से बात सीएम तक पहुंचाई। इसी शिकायत पर सीएम मनोहर लाल तहसील कार्यालय का दौरा करने के लिए पहुंचे और मौके पर लापरवाही मिलने पर चार अधिकारियों को सस्पेंड किया। हुआ यूं कि करनाल के वार्ड 11 के पार्षद पति गुरविंद्र गिन्नी को भी रजिस्ट्री करवानी थी। वसिका नवीस ने नायब तहसीलदार के नाम पर 25 हजार रुपये की डिमांड की। उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर से अंदर जाकर काम करवाने का प्रयास किया। लेकिन कहीं कोई भी पैसे लिए बिना काम को राजी नहीं हुआ। ऐसे में पार्षद ने मामले को ऊपर तक पहुंचाया। ऐसा रोजाना किसी न किसी के साथ होता रहता है।
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ये रजिस्ट्री करवाने की प्रक्रिया
रजिस्ट्री करवाने के लिए सबसे पहले तहसीलदार और नायब तहसीलदार से मार्क करवाना होता है। आरोप है कि ऐसा आमजन नहीं करवा सकते। इसके बाद फाइल तैयार करवाते हुए टोकन लेना होता है। टोकन के बाद ऑनलाइन रजिस्ट्री होती है। हेड क्लर्क रिकार्ड दर्ज करवाता है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार पास करता है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए भूमि की कीमत के हिसाब से रेट तय होता है। भले ही प्रक्रिया ऑनलाइन हो, पर आज भी इसको करवाने की अहम भूमिका बिचौलिये ही निभा रहे हैं।
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15-15 दिन करते हैं रजिस्ट्री
सब रजिस्टार - तहसील में तहसीलदार को सब रजिस्टार की जिम्मेदारी दी जाती है। हर महीने में 1 से 7 और 16 से 23 तक रजिस्ट्री करता है।
ज्वाइंट सब रजिस्टार : तहसील में नायब तहसीलदार को ज्वाइंट सब रजिस्टार की जिम्मेदारी होती है। हर महीने में 8 से 15 और 24 से 31 तक रजिस्ट्री करता है।
चार दिसंबर को नहीं 27 नवंबर की मिली रजिस्ट्री
सीएम के सामने शिकायत में चार दिसंबर की 9064 नंबर रजिस्ट्री बताई गई। सीएम के सामने ऑपरेटर रिकार्ड नहीं निकाल सका। सीएम के जाने के बाद जब 9064 नंबर रजिस्ट्री चार दिसंबर की बजाए 27 नवंबर का दर्ज हुई दिखाई गई। साथ ही रजिस्ट्री की डिलीवरी भी की हुई है।
13 सालों से नहीं मिला रास्ता
गांव से आए हुए लोगों ने सीएम से गुहार लगाई कि 13 सालों से तहसील में आकर रास्ते की गुहार लगा रहे हैं। अभी तक तस्दीक नहीं हो पाई। इसी कारण उन्हें रास्ता नहीं मिल रहा है। सीएम ने लोगाें को कहा कि वे डीसी से जाकर मिलें। इस बारे में डीसी को बोलेंगे।
किस काम के लिए कौन से कागजात चाहिए, कहीं नहीं लिखा
जब सीएम तहसील का निरीक्षण कर रहे थे तो वहां तहसील में अपना काम कराने आए लोगों ने कहा कि पांच साल पहले आदेश हुए थे कि तहसील और ई-दिशा केंद्र में किस कार्य के लिए क्या दस्तावेज चाहिए, ये लगाने थे, लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत है और दलाल इसका लाभ उठाते हैं। लोगों ने बताया कि तहसील में हर समय दलाल खड़े रहते हैं और वे टोकन दिलाने और फाइल तैयार कराने के नाम पर हर व्यक्ति से 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक की रिश्वत लेते हैं।
डीसी, एसडीएम और सीटीएम क्या कर रहे थे
सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब तहसील में सरेआम में भ्रष्टाचार चल रहा था, तो शिकायतें डीसी, एसडीएम और सीटीएम के पास भी पहुंची होंगी, लेकिन उनकी तरफ से तहसील पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में जिले के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर समय रहते डीसी या अन्य अधिकारी कार्रवाई करते तो सीएम को चेकिंग करने के लिए नहीं आना पड़ता।
जलपान का सालाना खर्च दो लाख देती है सरकार
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश की बागडोर संभालते ही तहसीलदारों की बेगार पर रोक लगा दी गई थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी तहसीलदार को वीआईपी के आगमन के समय अपनी जेब से जलपान पर खर्च करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए प्रत्येक जिला उपायुक्त के कार्यालय के लिए दो लाख रुपये की राशि स्वीकृत करवाई गई थी, और ये आदेश अब भी जारी हैं। इस मौके पर उपायुक्त विनय प्रताप सिंह, पुलिस अधीक्षक एसएस भौरिया, नगर निगम आयुक्त निशांत यादव, जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद, मेयर रेणूबाला गुप्ता, स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र, पार्षद मुकेश अरोड़ा, भाजपा नेता अशोक सुखीजा, सतीश राणा, कविंद्र राणा उपस्थित रहे।

भ्रष्टाचार खत्म करने पर देना होगा जोर
पूर्व मुख्यमंत्री तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीएम मनोहर लाल के तहसीलदार कार्यालय पर निरीक्षण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब तक कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री अपनी तरफ से प्रतिबद्धता नहीं दर्शाते। भ्रष्ट अफसर उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। इससे पहले गृहमंत्री अनिल विज ने करनाल में नगर निगम में छापे मारे थे, लेकिन उसकाकोई असर नहीं हुआ। हुड्डा सोमवार को पूर्व केंद्रीय ग्रह राज्यमंत्री आईडी स्वामी के निवास पर शोक जताने के बाद बोल रहे थे।
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