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Karnal News: मृतक को अवैध यात्री साबित करने में रेलवे नाकाम, परिवार को 4 लाख मुआवजे का आदेश
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अंबाला से बिहार के मुकामा के बीच सफर के दौरान ट्रेन से गिरने की वजह से मारे गए कृष्णा राम को वैध यात्री मानते
हुए उसके परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा जारी करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह निर्णय रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ के आदेश को खारिज करते हुए दिया है। मृतक के परिजनों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल करते हुए बताया था कि 13 नवंबर
2012 को कृष्णा राम अपने परिवार के साथ बिहार के मुकामा तक यात्रा करने के लिए अंबाला रेलवे स्टेशन पहुंचा था। इस दौरान उसने अपनी पत्नी व बच्चों के
लिए स्लीपर का टिकट खरीदा था जबकि अपने लिए सामान्य श्रेणी का टिकट लिया था। अंबाला से ट्रेन के चलने के बाद अचानक लगे झटके के कारण कृष्णा राम नीचे गिर गया और ट्रेन से कुचलने के कारण उसकी मौत हो गई। अगले दिन जब उनका परिवार मुकामा स्टेशन पर पहुंचा तो उन्होंने इस बारे में रेलवे को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम करवाया। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने मृतक के परिवार का मुआवजे
का दावा खारिज कर दिया था जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे ने मृतक के परिवार का दावा खारिज करते हुए गलती की है। रेलवे यह साबित करने में पूरी तरह से नाकाम रहा कि कृष्णा राम अवैध यात्री था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि मृतक के पास कोई टिकट मौजूद नहीं था, जिसके
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चलते वह वैध यात्री नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक के पास से टिकट न मिलना, उसे अवैध यात्री साबित नहीं करता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने रेलवे को
आदेश दिया कि वह मृतक के परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा जारी करे। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि रेलवे इस राशि पर सात प्रतिशत ब्याज परिवार द्वारा रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल करने की तारीख से देगा।
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हुए उसके परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा जारी करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह निर्णय रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ के आदेश को खारिज करते हुए दिया है। मृतक के परिजनों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल करते हुए बताया था कि 13 नवंबर
2012 को कृष्णा राम अपने परिवार के साथ बिहार के मुकामा तक यात्रा करने के लिए अंबाला रेलवे स्टेशन पहुंचा था। इस दौरान उसने अपनी पत्नी व बच्चों के
लिए स्लीपर का टिकट खरीदा था जबकि अपने लिए सामान्य श्रेणी का टिकट लिया था। अंबाला से ट्रेन के चलने के बाद अचानक लगे झटके के कारण कृष्णा राम नीचे गिर गया और ट्रेन से कुचलने के कारण उसकी मौत हो गई। अगले दिन जब उनका परिवार मुकामा स्टेशन पर पहुंचा तो उन्होंने इस बारे में रेलवे को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम करवाया। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने मृतक के परिवार का मुआवजे
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का दावा खारिज कर दिया था जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे ने मृतक के परिवार का दावा खारिज करते हुए गलती की है। रेलवे यह साबित करने में पूरी तरह से नाकाम रहा कि कृष्णा राम अवैध यात्री था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि मृतक के पास कोई टिकट मौजूद नहीं था, जिसके
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चलते वह वैध यात्री नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक के पास से टिकट न मिलना, उसे अवैध यात्री साबित नहीं करता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने रेलवे को
आदेश दिया कि वह मृतक के परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा जारी करे। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि रेलवे इस राशि पर सात प्रतिशत ब्याज परिवार द्वारा रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल करने की तारीख से देगा।