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Karnal News: होनहारों ने गाड़े सफलता के झंडे, खिले चेहरे
Thu, 06 Jun 2024 06:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 06 Jun 2024 06:00 AM IST
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करनाल। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने स्नातक मेडिकल दाखिला परीक्षा नीट यूजी 2024 का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार भी कर्ण नगरी के होनहारों ने शानदार प्रदर्शन किया है। किसी ने नोट्स बनाकर पढ़ाई करते हुए सफलता पाई है तो कोई विद्यार्थी इस परीक्षा के लिए विषयवार समय देकर पढ़ता रहा।
अपनी मेहनत के बल पर अब ये विद्यार्थी अच्छे मेडिकल संस्थानों में दाखिला पा सकेंगे। सफल होने वाले बच्चों का कहना है कि उन्होंने मानवता की सेवा करने की ठानी है तो किसी ने अपने माता-पिता के डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
पांच मई को हुई परीक्षा में सैकड़ों विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। शानदार परीक्षा परिणाम आने पर दिनभर शहर के कोचिंग सेंटरों और परिवार में खुशी का माहौल रहा। अब नीट स्कोरकार्ड की मदद से विद्यार्थी एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे।
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अभिभावकों ने किया पढ़ाई में सहयोग
टि्वंकल ने 710 अंक प्राप्त कर सफलता पाई है। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य एम्स दिल्ली में प्रवेश लेना है। अभी उन्होंने तय नहीं किया कि कौन सा स्ट्रीम लेंगे। माता-पिता ने पढ़ाई में सहयोग किया है। सफलता का राज नियमित पढ़ाई है। उनकी बहन ने भी उन्हें घर पर पढ़ाया। पिता वरिंदर कुमार ने कहा कि बेटे ने योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई की। बड़ी बहन की सफलता के आधार पर ही उन्होंने मेहनत की।
पिता नहीं बन सके तो मैं बनूंगी डॉक्टर
दिव्यांशी ने 720 में से 705 अंक प्राप्त किए हैं। दिव्यांशी ने बताया कि उन्होंने रोजाना 17 घंटे निरंतर पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिता की इच्छा पूरी की है। उसके पिता भी डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन वे बन नहीं पाए। पिता सुनील कुमार ने बताया कि परिवार में खुशी का माहौल है। बेटी ने मेहनत के बल पर मुकाम पाया है।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
मयंक गुप्ता ने 720 में से 705 अंक प्राप्त करके सफलता पाई है। उन्होंने बताया कि उसे पिछले प्रयास में असफलता मिली थी, अब सफलता मिली है। दिल्ली के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेना उनकी प्राथमिकता है। वे मेडिकल प्रोफेशन को सेवा के काम में आगे बढ़ाना चाहते हैं। पिता दीपक कुमार ने बताया कि उनके बेटे ने योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई की।
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अपनी मेहनत के बल पर अब ये विद्यार्थी अच्छे मेडिकल संस्थानों में दाखिला पा सकेंगे। सफल होने वाले बच्चों का कहना है कि उन्होंने मानवता की सेवा करने की ठानी है तो किसी ने अपने माता-पिता के डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
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पांच मई को हुई परीक्षा में सैकड़ों विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। शानदार परीक्षा परिणाम आने पर दिनभर शहर के कोचिंग सेंटरों और परिवार में खुशी का माहौल रहा। अब नीट स्कोरकार्ड की मदद से विद्यार्थी एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे।
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अभिभावकों ने किया पढ़ाई में सहयोग
टि्वंकल ने 710 अंक प्राप्त कर सफलता पाई है। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य एम्स दिल्ली में प्रवेश लेना है। अभी उन्होंने तय नहीं किया कि कौन सा स्ट्रीम लेंगे। माता-पिता ने पढ़ाई में सहयोग किया है। सफलता का राज नियमित पढ़ाई है। उनकी बहन ने भी उन्हें घर पर पढ़ाया। पिता वरिंदर कुमार ने कहा कि बेटे ने योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई की। बड़ी बहन की सफलता के आधार पर ही उन्होंने मेहनत की।
पिता नहीं बन सके तो मैं बनूंगी डॉक्टर
दिव्यांशी ने 720 में से 705 अंक प्राप्त किए हैं। दिव्यांशी ने बताया कि उन्होंने रोजाना 17 घंटे निरंतर पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिता की इच्छा पूरी की है। उसके पिता भी डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन वे बन नहीं पाए। पिता सुनील कुमार ने बताया कि परिवार में खुशी का माहौल है। बेटी ने मेहनत के बल पर मुकाम पाया है।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
मयंक गुप्ता ने 720 में से 705 अंक प्राप्त करके सफलता पाई है। उन्होंने बताया कि उसे पिछले प्रयास में असफलता मिली थी, अब सफलता मिली है। दिल्ली के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेना उनकी प्राथमिकता है। वे मेडिकल प्रोफेशन को सेवा के काम में आगे बढ़ाना चाहते हैं। पिता दीपक कुमार ने बताया कि उनके बेटे ने योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई की।