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कृषि विज्ञान केंद्र में लगेगी प्रोसेसिंग यूनिट
कैथल
Updated Sat, 28 Dec 2013 12:36 AM IST
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कैथल अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने शहर में प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए मंजूरी दे दी है। इसके तहत कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से छोटी-छोटी प्रोसेसिंग यूनिट लगाएं जाएंगे।
जिस क्षेत्र में जितनी भी फसल होगी, उससे होने वाले उत्पादन से इन यूनिटों के माध्यम से किसानों को जहां फसलों का उचित मूल्य मिलेगा, वहीं, युवा वर्ग को इससे रोजगार भी उपलब्ध होगा।
गेहूं एवं धान से संबंधित यूनिटें कैथल में
कैथल चूंकि हरियाणा में धान और गेहूं उत्पादन में सबसे अग्रणी जिला है। इसी कारण यहां पर धान एवं गेहूं पर आधारित प्रोडक्ट बनाने की यूनिटें लगाई जा सकती हैं।
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इस यूनिट में गेहूं से बिस्कुट, दलिया, ब्रेड, सेवइयां, मैदा और अन्य उत्पाद बनाएं जाएंगे। इसके अलावा चावल से बीयर, रेडिमेड फूड, मरमूंडे, खील, चावल के लड्डू सहित अनेकों प्रोडक्ट का उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा राजौंद में सब्जियों की पनीरी को लेकर विशेष यूनिट भी लगाई जा सकती है। जबकि सीवन क्षेत्र में सब्जियों के उत्पादन के चलते चिप्स जैसे यूनिट स्थापित हो सकते हैं।
शीघ्र ही होगा सर्वे
आईसीएआर के क्षेत्रिय निदेशक डा. एएम नरुला ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत किसानों की मार्केटिंग संबंधी दिक्कतें दूर करने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए मंजूरी दी गई है। कैथल में गेहूं एवं चावल से बनने वाले उत्पाद बन सकते हैं।
इसके लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएंगी। शीघ्र ही यूनिट लगाए जाने संबंधी सर्वे करके राशि का निर्धारण किया जाएगा। इससे जहां किसानों को फसलों की उचित कीमत मिल सकेगी, वहीं, काफी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा हरियाणा के जिस क्षेत्र में जो भी फसल होगी, उस कृषि विज्ञान केंद्र को उसी फसल पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की मंजूरी दी जाएगी।
किसानोें को होगा फायदा
प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि यहां के किसानों की बड़ी परेशानी है मार्केटिंग। यदि इस समस्या का समाधान हो जाता है तो कृषि से उपयोगी कोई व्यवसाय नहीं हो सकता है।
यदि प्रोसेसिंग यूनिट लगते हैं तो लोगों को अपने ही क्षेत्र में उत्पादित फसलों से बनने वाले प्रोडक्ट मिलेंगे। जो बाहर से आने वाले उत्पादों से सस्ते एवं उच्च गुणवत्ता वाले होंगे। गौरतलब है कि कैथल में लगभग एक लाख 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन होता है। जबकि एक लाख 50 हजार हेक्टेयर पर चावल का उत्पादन किया जाता है।
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जिस क्षेत्र में जितनी भी फसल होगी, उससे होने वाले उत्पादन से इन यूनिटों के माध्यम से किसानों को जहां फसलों का उचित मूल्य मिलेगा, वहीं, युवा वर्ग को इससे रोजगार भी उपलब्ध होगा।
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गेहूं एवं धान से संबंधित यूनिटें कैथल में
कैथल चूंकि हरियाणा में धान और गेहूं उत्पादन में सबसे अग्रणी जिला है। इसी कारण यहां पर धान एवं गेहूं पर आधारित प्रोडक्ट बनाने की यूनिटें लगाई जा सकती हैं।
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इस यूनिट में गेहूं से बिस्कुट, दलिया, ब्रेड, सेवइयां, मैदा और अन्य उत्पाद बनाएं जाएंगे। इसके अलावा चावल से बीयर, रेडिमेड फूड, मरमूंडे, खील, चावल के लड्डू सहित अनेकों प्रोडक्ट का उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा राजौंद में सब्जियों की पनीरी को लेकर विशेष यूनिट भी लगाई जा सकती है। जबकि सीवन क्षेत्र में सब्जियों के उत्पादन के चलते चिप्स जैसे यूनिट स्थापित हो सकते हैं।
शीघ्र ही होगा सर्वे
आईसीएआर के क्षेत्रिय निदेशक डा. एएम नरुला ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत किसानों की मार्केटिंग संबंधी दिक्कतें दूर करने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए मंजूरी दी गई है। कैथल में गेहूं एवं चावल से बनने वाले उत्पाद बन सकते हैं।
इसके लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएंगी। शीघ्र ही यूनिट लगाए जाने संबंधी सर्वे करके राशि का निर्धारण किया जाएगा। इससे जहां किसानों को फसलों की उचित कीमत मिल सकेगी, वहीं, काफी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा हरियाणा के जिस क्षेत्र में जो भी फसल होगी, उस कृषि विज्ञान केंद्र को उसी फसल पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की मंजूरी दी जाएगी।
किसानोें को होगा फायदा
प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि यहां के किसानों की बड़ी परेशानी है मार्केटिंग। यदि इस समस्या का समाधान हो जाता है तो कृषि से उपयोगी कोई व्यवसाय नहीं हो सकता है।
यदि प्रोसेसिंग यूनिट लगते हैं तो लोगों को अपने ही क्षेत्र में उत्पादित फसलों से बनने वाले प्रोडक्ट मिलेंगे। जो बाहर से आने वाले उत्पादों से सस्ते एवं उच्च गुणवत्ता वाले होंगे। गौरतलब है कि कैथल में लगभग एक लाख 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन होता है। जबकि एक लाख 50 हजार हेक्टेयर पर चावल का उत्पादन किया जाता है।