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बिजली न पानी, स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज बेहाल
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छह घंटे बिजली गुल रहने और जनरेटर खराब होने के कारण सामान्य अस्पताल में शुक्रवार को स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं। मरीज और तीमारदार गर्मी में बेहाल रहे। नवजात बच्चे गर्मी में बेचैन रहे। अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सेवाएं भी ठप रहीं। प्रयोगशाला में टेस्ट भी नहीं हो पाए। गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं हो सके। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथ-पांव फूले रहे। जनरेटर ओवरलोड होने के कारण कामयाब नहीं हो सका। अस्पताल की बिल्डिंग के गलियारों में दिन में भी अंधेरा छाया रहा। बिना लाइट सही ढंग से ओपीडी भी नहीं हुई। गर्मी में मरीजों का मर्ज बढ़ने से वे कराहते रहे। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी का समय है। इस बीच कई बार बिजली पल भर के लिए छोड़ी गई लेकिन उससे कोई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा नहीं चल सकी। आपातकालीन सेवाओं के लिए ट्रामा सेंटर में भी बिजली नहीं होने के कारण प्रयोगशाला और एक्सरे का काम प्रभावित रहा। केवल कुछ महत्वपूर्ण टेस्ट की रिपोर्ट ही मरीजों को दी जा सकी।
राजकीय सामान्य अस्पताल 200 बैड का है। चिल्ड्रन वार्ड, ईएनटी, नर्सरी वार्ड, आर्थो, सर्जरी, लेबर रूम, मेडिकल वार्ड (महिला-पुरूष) यह सभी वार्ड भरे रहते हैं। तकनीकी कारणों से बिजली नहीं आने के कारण जब अस्पताल का जनरेटर भी जवाब दे गया तो पंखे और वातानुकूलित यंत्र सहित तमाम बिजली उपकरण जवाब दे गए। मरीजों ने कई घंटे इंतजार किया लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई।
एक भी अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ
सामान्य अस्पताल में प्रतिदिन 1500 से 2000 तक ओपीडी होती है। सौ से 150 तक एक्सरे किए जाते हैं। शुक्रवार को करीब 30 एक्सरे हो सके। अल्ट्रासाउंड केंद्र में रोजाना सामान्य तौर पर 15 अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। इसके अलावा दस गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। नई मशीनें लगाई गई हैं। बिना बिजली के मशीनें नहीं चल सकीं। इस कारण एक भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया।
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ट्रामा की आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित
इमरजेंसी के लिए स्थापित ट्रामा सेंटर में बिन बिजली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। ट्रामा सेंटर की एक्सरे लैब बंद रही। प्रयोगशाला में बैकअप से जो टेस्ट हो सकते थे वह पूरे किए गए लेकिन बिन बिजली सभी टेस्ट रिपोर्ट नहीं बन सकी। कर्मचारियों ने मशक्कत करके इमरजेंसी या भर्ती मरीजों की रिपोर्ट दी हैं। दोपहर को बिजली आई। दोपहर छुट्टी के बाद भी प्रयोगशाला कर्मचारी काम पूरा करने के लिए डेढ़ घंटा देरी तक जुटे रहे ताकि मरीजों को राहत दी जा सके। मरीजों ने टेस्ट रिपोर्ट के लिए पूरा दिन इंतजार किया। ट्रामा सेंटर की प्रयोगशाला में रोजाना 600 से 800 तक मरीज आते हैं। प्रत्येक मरीज के पांच से छह टेस्ट होते हैं। रोजाना 3800 से 4200 तक टेस्ट होते हैं। बहुत से टेस्ट लंबित रह गए हैं। ट्रामा सेंटर की प्रयोगशाला में जनरेटर की सुविधा नहीं है। इस वजह से भी स्थिति गंभीर बन गई।
अस्पताल में तीन दिन से नहीं पानी
सामान्य अस्पताल को पानी सप्लाई करने वाली पाइप लाइन दो दिन पहले अस्पताल चौक के समीप फट गई थी। इस कारण तीन दिन से अस्पताल में पानी की समस्या बनी हुई है। तीमारदारों ने बताया कि शौचालयों की हालत बदतर हो गई है। टोंटियों में पानी नहीं आ रहा। पीने का पानी बाहर से ला रहे हैं। बिजली-पानी बिना हाल बेहाल हो गया।
क्या बोले मरीज और तीमारदार
खेड़ा कालोनी निवासी पूजा, बड़ौता निवासी राजबाला, मूर्ति व संतोष, मोदीपुर निवासी नीलम, कुटेल निवासी संतोष, रंदौली निवासी अनिल कुमार ने कहा कि बिजली नहीं होने के कारण नवजात बच्चे परेशान हो गए। हाथ वाले पंखे मंगवाने पड़े। मच्छर काट रहे हैं। गर्मी में मरीजों व तीमारदारों का बुरा हाल हो गया। समय पर टेस्ट रिपोर्ट तक नहीं मिली। तीन दिन से टूंटियों में पानी नहीं आ रहा। बाथरूम में पानी नहीं होने से अव्यवस्था का आलम है। पीने का पानी बाहर से ला रहे हैं।
सब स्टेशन से ही शुक्रवार को बिजली कट लगा। जनरेटर में भी अचानक ही दिक्कत आई और पूरा लोड नहीं ले सका। तुरंत मेकैनिक को बुलाकर जनरेटर को दुरुस्त करने के लिए कहा है। जनरेटर 250 केवीए का है। रिपेयर के आदेश दिए हैं। भविष्य में ऐसी व्यवस्था करेंगे कि कोई दिक्कत नहीं आएगी। एसी और अन्य उपकरणों को बंद करके जरूरी उपकरणों को चलाया जाएगा। इससे जनरेटर का लोड बंट जाएगा। अस्पताल के बाहर पेयजल पाइपलाइन फटी हुई है। अस्पताल का अपना ट्यूबवेल भी है। दो दिन पहले पानी की दिक्कत सामने आई थी तो उसे दुरुस्त कर दिया था। विभाग के पास प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन हैं। -डॉ. सजीव ग्रोवर, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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राजकीय सामान्य अस्पताल 200 बैड का है। चिल्ड्रन वार्ड, ईएनटी, नर्सरी वार्ड, आर्थो, सर्जरी, लेबर रूम, मेडिकल वार्ड (महिला-पुरूष) यह सभी वार्ड भरे रहते हैं। तकनीकी कारणों से बिजली नहीं आने के कारण जब अस्पताल का जनरेटर भी जवाब दे गया तो पंखे और वातानुकूलित यंत्र सहित तमाम बिजली उपकरण जवाब दे गए। मरीजों ने कई घंटे इंतजार किया लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई।
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एक भी अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ
सामान्य अस्पताल में प्रतिदिन 1500 से 2000 तक ओपीडी होती है। सौ से 150 तक एक्सरे किए जाते हैं। शुक्रवार को करीब 30 एक्सरे हो सके। अल्ट्रासाउंड केंद्र में रोजाना सामान्य तौर पर 15 अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। इसके अलावा दस गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। नई मशीनें लगाई गई हैं। बिना बिजली के मशीनें नहीं चल सकीं। इस कारण एक भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया।
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ट्रामा की आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित
इमरजेंसी के लिए स्थापित ट्रामा सेंटर में बिन बिजली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। ट्रामा सेंटर की एक्सरे लैब बंद रही। प्रयोगशाला में बैकअप से जो टेस्ट हो सकते थे वह पूरे किए गए लेकिन बिन बिजली सभी टेस्ट रिपोर्ट नहीं बन सकी। कर्मचारियों ने मशक्कत करके इमरजेंसी या भर्ती मरीजों की रिपोर्ट दी हैं। दोपहर को बिजली आई। दोपहर छुट्टी के बाद भी प्रयोगशाला कर्मचारी काम पूरा करने के लिए डेढ़ घंटा देरी तक जुटे रहे ताकि मरीजों को राहत दी जा सके। मरीजों ने टेस्ट रिपोर्ट के लिए पूरा दिन इंतजार किया। ट्रामा सेंटर की प्रयोगशाला में रोजाना 600 से 800 तक मरीज आते हैं। प्रत्येक मरीज के पांच से छह टेस्ट होते हैं। रोजाना 3800 से 4200 तक टेस्ट होते हैं। बहुत से टेस्ट लंबित रह गए हैं। ट्रामा सेंटर की प्रयोगशाला में जनरेटर की सुविधा नहीं है। इस वजह से भी स्थिति गंभीर बन गई।
अस्पताल में तीन दिन से नहीं पानी
सामान्य अस्पताल को पानी सप्लाई करने वाली पाइप लाइन दो दिन पहले अस्पताल चौक के समीप फट गई थी। इस कारण तीन दिन से अस्पताल में पानी की समस्या बनी हुई है। तीमारदारों ने बताया कि शौचालयों की हालत बदतर हो गई है। टोंटियों में पानी नहीं आ रहा। पीने का पानी बाहर से ला रहे हैं। बिजली-पानी बिना हाल बेहाल हो गया।
क्या बोले मरीज और तीमारदार
खेड़ा कालोनी निवासी पूजा, बड़ौता निवासी राजबाला, मूर्ति व संतोष, मोदीपुर निवासी नीलम, कुटेल निवासी संतोष, रंदौली निवासी अनिल कुमार ने कहा कि बिजली नहीं होने के कारण नवजात बच्चे परेशान हो गए। हाथ वाले पंखे मंगवाने पड़े। मच्छर काट रहे हैं। गर्मी में मरीजों व तीमारदारों का बुरा हाल हो गया। समय पर टेस्ट रिपोर्ट तक नहीं मिली। तीन दिन से टूंटियों में पानी नहीं आ रहा। बाथरूम में पानी नहीं होने से अव्यवस्था का आलम है। पीने का पानी बाहर से ला रहे हैं।
सब स्टेशन से ही शुक्रवार को बिजली कट लगा। जनरेटर में भी अचानक ही दिक्कत आई और पूरा लोड नहीं ले सका। तुरंत मेकैनिक को बुलाकर जनरेटर को दुरुस्त करने के लिए कहा है। जनरेटर 250 केवीए का है। रिपेयर के आदेश दिए हैं। भविष्य में ऐसी व्यवस्था करेंगे कि कोई दिक्कत नहीं आएगी। एसी और अन्य उपकरणों को बंद करके जरूरी उपकरणों को चलाया जाएगा। इससे जनरेटर का लोड बंट जाएगा। अस्पताल के बाहर पेयजल पाइपलाइन फटी हुई है। अस्पताल का अपना ट्यूबवेल भी है। दो दिन पहले पानी की दिक्कत सामने आई थी तो उसे दुरुस्त कर दिया था। विभाग के पास प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन हैं। -डॉ. सजीव ग्रोवर, प्रधान चिकित्सा अधिकारी