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Karnal News: कर्णनगरी के कारागार में तैयार चावल का स्वाद चख रहे 20 जेलों के कैदी
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करनाल। प्रदेश की 20 जेलों के कैदी और बंदी जिला कारागार करनाल में उत्पादित चावल का स्वाद चख रहे हैं। करनाल जिला कारागार परिसर में कैदियों और बंदियों की ओर से धान की खेती की जा रही है। यहां धान का भरपूर उत्पादन हो रहा है, इस कारण यहां से अन्य जेलाें में भी चावल की आपूर्ति की जा रही है। धान उत्पादन से लेकर उसमें से चावल निकालने तक की सभी प्रक्रिया करनाल जिला कारागार में ही अपनाई जा रही है।
यहां प्रतिवर्ष धान के सीजन में 400 क्विंटल से अधिक चावल का उत्पादन किया जा रहा है। इसके साथ ही जेल में गेहूं का उत्पादन भी किया जा रहा है। मौसमी सब्जियां उगाई जा रही हैं। जेल प्रशासन की ओर से कैदियों को खेती की तकनीक सिखाई जाती है और उन्हें अलग-अलग तरह की फसलें उगाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। कैदियों और बंदियों को खेतीबाड़ी से जोड़ने का मकसद खाद्यान्न उत्पादन और सजा पूरी होने के बाद उन्हें खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है। संवाद
प्रदेश की इन जेलों में भेजा जाता है चावल
केंद्रीय जेल अंबाला, केंद्रीय जेल-2 हिसार, जिला कारागार फरीदाबाद, जिला कारागार जींद, जिला कारागार करनाल, जिला कारागार नारनौल, जिला कारागार रोहतक, जिला कारागार सोनीपत, जिला कारागार पलवल, जिला कारागार झज्जर, सेंट्रल जेल-1 हिसार, जिला कारागार भिवानी, जिला गुरुग्राम, जिला कारागार कैथल, जिला कारागार कुरुक्षेत्र, जिला कारागार रेवाड़ी, जिला कारागार सिरसा, जिला कारागार यमुनानगर, जिला कारागार पानीपत, जिला कारागार नूंह
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जिला कारागार में हैं 2300 से अधिक कैदी-बंदी
जिला कारागार में इस वक्त 2300 से अधिक कैदी और बंदी हैं। इन बंदियों के लिए रोजाना खाना तैयार किया जाता है। परिसर में उगाई जाने वाली सब्जियां ही कैदियों और बंदियों को परोसी जाती है। खेतीबाड़ी के लिए सभी की जिम्मेदारी तय की गई है।
वर्जन
हमारी जेल परिसर में गेहूं, चावल और सब्जियाें का उत्पादन किया जाता है। यहां के बंदियों को बेहतर खानपान दिया जाता है। इसके अलावा यहीं से प्रदेश की सभी जेलों में भी चावल की आपूर्ति की जा रही है।
- अमित कुमार, जेल अधीक्षक, करनाल
यहां प्रतिवर्ष धान के सीजन में 400 क्विंटल से अधिक चावल का उत्पादन किया जा रहा है। इसके साथ ही जेल में गेहूं का उत्पादन भी किया जा रहा है। मौसमी सब्जियां उगाई जा रही हैं। जेल प्रशासन की ओर से कैदियों को खेती की तकनीक सिखाई जाती है और उन्हें अलग-अलग तरह की फसलें उगाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। कैदियों और बंदियों को खेतीबाड़ी से जोड़ने का मकसद खाद्यान्न उत्पादन और सजा पूरी होने के बाद उन्हें खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है। संवाद
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प्रदेश की इन जेलों में भेजा जाता है चावल
केंद्रीय जेल अंबाला, केंद्रीय जेल-2 हिसार, जिला कारागार फरीदाबाद, जिला कारागार जींद, जिला कारागार करनाल, जिला कारागार नारनौल, जिला कारागार रोहतक, जिला कारागार सोनीपत, जिला कारागार पलवल, जिला कारागार झज्जर, सेंट्रल जेल-1 हिसार, जिला कारागार भिवानी, जिला गुरुग्राम, जिला कारागार कैथल, जिला कारागार कुरुक्षेत्र, जिला कारागार रेवाड़ी, जिला कारागार सिरसा, जिला कारागार यमुनानगर, जिला कारागार पानीपत, जिला कारागार नूंह
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जिला कारागार में हैं 2300 से अधिक कैदी-बंदी
जिला कारागार में इस वक्त 2300 से अधिक कैदी और बंदी हैं। इन बंदियों के लिए रोजाना खाना तैयार किया जाता है। परिसर में उगाई जाने वाली सब्जियां ही कैदियों और बंदियों को परोसी जाती है। खेतीबाड़ी के लिए सभी की जिम्मेदारी तय की गई है।
वर्जन
हमारी जेल परिसर में गेहूं, चावल और सब्जियाें का उत्पादन किया जाता है। यहां के बंदियों को बेहतर खानपान दिया जाता है। इसके अलावा यहीं से प्रदेश की सभी जेलों में भी चावल की आपूर्ति की जा रही है।
- अमित कुमार, जेल अधीक्षक, करनाल