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Karnal News: डेयरी सेक्टर का कारोबार 49 लाख करोड़ करने की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Mar 2024 03:51 AM IST
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Preparation to increase dairy sector turnover to Rs 49 lakh crore
- छात्रों को डेयरी व्यवसाय की समस्याओं को चिन्हित कर समाधान तकनीक तैयार करने का निर्देश
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। डेयरी सेक्टर का कारोबार 48 लाख करोड़ करने की तैयारी है। आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि डेयरी सेक्टर कारोबार की दृष्टि से विश्व में एक चौथाई यानी 24 प्रतिशत है। यह 13 प्रतिशत की गति से बढ़ रहा है। फिलहाल डेयरी सेक्टर का कारोबार 16 लाख करोड़ है, जो 2032 तक 48 से 49 लाख करोड़ होने की संभावना है। डॉ. धीर सिंह ने कहा कि संस्थान ने अपने छात्रों को सिर्फ डिग्री लेने नहीं बल्कि डेयरी व्यवसाय की मुख्य समस्याओं को चिन्हित करके खुद अपने आइडिया व चिन्हित समस्या के समाधान पर अनुसंधान कर समाधान तकनीक तैयार करने को कहा है।
निदेशक डॉ.धीर सिंह ने बताया कि संस्थान का दीक्षांत समारोह 15 मार्च को है, जिसमें 49 को बीटेक, 127 को मास्टर डिग्री, 102 को पीएचडी सहित 278 को डिग्री प्रदान की जाएगी। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक व डेयरी सचिव पद्मभूषण डॉ. आरएस परोदा होंगे। संस्थान ने अनुसंधान कार्यों में 20 प्रतिशत निवेश बढ़ाया है। तीन करोड़ रुपये से हॉस्टल, इतनी ही धनराशि ढांचागत कार्यों पर व्यय की जा रही है। उन्होंने कहा कि दूध का उत्पादन 220-230 मिलियन टन है जो 2047 तक 600 मिलियन टन और दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता एक लीटर प्रति व्यक्ति करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि उत्तम नस्ल के पशुओं जैसे क्लोन, ओवम पिकअप या सेक्स सीमन से पैदा होने वाले पशुओं का अलग-अलग ग्रुप बनाया जाएगा। डेयरी व्यवसायियों से सुझाव मांगे हैं कि उनकी क्या जरूरत है, क्या समस्याएं हैं, उन्हें शोध में शामिल कर समाधान निकाला जाएगा। इसके लिए पशु चिन्हित किए गए हैं। संस्थान के पास 12 क्लोन हैं, शीघ्र ही क्लोन पशुओं को जनसामान्य को विक्रय करने पर भी विचार किया जा रहा है। ये अधिक दूध देने वाले हैं। संस्थान डिंब संग्रहण, क्लोनिंग, सेक्स वीर्य प्रौद्योगिकी और कृत्रिम गर्भाधान द्वारा पशुओं को पैदा करने, दूध की गुणवत्ता में सुधार के लिए तकनीक विकसित करने, दूध का मूल्यवर्धन करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे चार सूत्रों पर फोकस करेगा। इस दौरान संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. आशीष कुमार सिंह, पशु शरीर क्रिया विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार डांग मौजूद रहे।
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गैर गोजातीय पशुओं पर शुरू हुआ शोध
निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि गैर गोजातीय पशुओं ऊंट, बकरी, गधी आदि के दूध पर शोध चल रहा है, जिसमें चिकित्सीय गुण पता लगाने के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू किए जाएंगे। जिससे ये पता लगेगा कि किसके दूध में रोगों से लड़ने की कितनी प्रतिरोधक क्षमता है, जिससे इनके दूध की मांग व कीमत बढ़ेगी और इन पशुओं के पालन के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा।
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