{"_id":"6163566e8ebc3e0c3f5dee85","slug":"preparation-for-inclusion-of-honey-mushroom-in-mid-day-meal-karnal-news-knl86105178","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिड-डे-मील में शहद-मशरूम को शामिल करने की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिड-डे-मील में शहद-मशरूम को शामिल करने की तैयारी
विज्ञापन
कर्मबीर लाठर
करनाल। सरकारी विद्यालयों में मिड-डे-मील के तहत बच्चों को शहद व मशरूम दिया जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग नई दिल्ली ने राज्य सरकारों से इन दोनों उत्पादों को मिड-डे-मील में शामिल करने की सिफारिश की है। विभाग के संयुक्त सचिव आरसी मिश्रा ने इस बाबत सभी राज्य सरकारों को पत्र भेजा है। साथ ही इस पर विचार करने को कहा है। इसके तहत हरियाणा में अनुसंधान वैज्ञानिक प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को शहद व मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देने पर विचार कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में मशरूम को सुपर फूड की संज्ञा दी गई है। वहीं शहद को पूर्ण आहार बताया गया है, जो भोजन को पचाने में भी मदद करता है। इन उत्पादों की पोषक गुणवत्ता देखते हुए अनुरोध किया गया है कि उचित कदम उठाए जाएं ताकि इन्हें मिड-डे-मील में शामिल किया जा सके। इसके तहत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मधुमक्खी पालन को विकसित करने व किसानों में जागरूकता लाने के प्रयास शुरू भी किए हैं, ताकि देश में शहद का उत्पादन अधिक हो सके। वहीं कृषि मंत्रालय व राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने इनकी पोषक वैल्यू को देखते हुए इनके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उत्पादन के लिए प्रशिक्षण पर दिया जाएगा जोर
हरियाणा सरकार का प्रयास है कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय से मिलकर किसानों को उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाए। इन दोनों के उत्पादन में ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती। अभी शिक्षा मंत्रालय ने प्रदेश सरकारों को मिड-डे-मील में शहद व मशरूम शामिल करने के लिए इस पर ध्यान देने के लिए कहा है। दोनों उत्पादों से किसानों को अतिरिक्त आमदनी होती है।
विज्ञापन
- डा. पीके मेहता, सलाहकार, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय
फिलहाल विद्यालयों में बंद है रसोई
जिले में 70 हजार से अधिक बच्चों को मिड-डे-मील दिया जाता है। फिलहाल विद्यालयों में भोजन पकाकर नहीं दिया जा रहा है। नवंबर तक बच्चों को सूखा राशन आटा व चावल ही वितरण किया जाना है। भोजन पकाने की लागत उनके खाते में डाली जा रही है। जब स्कूलों में भोजन पकने लगेगा, तब शहद-मशरूम को शामिल करने पर सोचा जा सकता है। फिलहाल इस बाबत कोई निर्देश भी नहीं हैं।
-रोहतास वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
करनाल। सरकारी विद्यालयों में मिड-डे-मील के तहत बच्चों को शहद व मशरूम दिया जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग नई दिल्ली ने राज्य सरकारों से इन दोनों उत्पादों को मिड-डे-मील में शामिल करने की सिफारिश की है। विभाग के संयुक्त सचिव आरसी मिश्रा ने इस बाबत सभी राज्य सरकारों को पत्र भेजा है। साथ ही इस पर विचार करने को कहा है। इसके तहत हरियाणा में अनुसंधान वैज्ञानिक प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को शहद व मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देने पर विचार कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में मशरूम को सुपर फूड की संज्ञा दी गई है। वहीं शहद को पूर्ण आहार बताया गया है, जो भोजन को पचाने में भी मदद करता है। इन उत्पादों की पोषक गुणवत्ता देखते हुए अनुरोध किया गया है कि उचित कदम उठाए जाएं ताकि इन्हें मिड-डे-मील में शामिल किया जा सके। इसके तहत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मधुमक्खी पालन को विकसित करने व किसानों में जागरूकता लाने के प्रयास शुरू भी किए हैं, ताकि देश में शहद का उत्पादन अधिक हो सके। वहीं कृषि मंत्रालय व राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने इनकी पोषक वैल्यू को देखते हुए इनके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
विज्ञापन
उत्पादन के लिए प्रशिक्षण पर दिया जाएगा जोर
हरियाणा सरकार का प्रयास है कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय से मिलकर किसानों को उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाए। इन दोनों के उत्पादन में ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती। अभी शिक्षा मंत्रालय ने प्रदेश सरकारों को मिड-डे-मील में शहद व मशरूम शामिल करने के लिए इस पर ध्यान देने के लिए कहा है। दोनों उत्पादों से किसानों को अतिरिक्त आमदनी होती है।
विज्ञापन
- डा. पीके मेहता, सलाहकार, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय
फिलहाल विद्यालयों में बंद है रसोई
जिले में 70 हजार से अधिक बच्चों को मिड-डे-मील दिया जाता है। फिलहाल विद्यालयों में भोजन पकाकर नहीं दिया जा रहा है। नवंबर तक बच्चों को सूखा राशन आटा व चावल ही वितरण किया जाना है। भोजन पकाने की लागत उनके खाते में डाली जा रही है। जब स्कूलों में भोजन पकने लगेगा, तब शहद-मशरूम को शामिल करने पर सोचा जा सकता है। फिलहाल इस बाबत कोई निर्देश भी नहीं हैं।
-रोहतास वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी