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Karnal News: खानपान में बदलाव से समय पूर्व और कम वजन के शिशु ले रहे जन्म

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Aug 2023 02:41 AM IST
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Premature and low birth weight babies are being born due to dietary changes
- अधिकतर बच्चों की आंखों की लेंस में धुंधलेपन की समस्या
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- पांच साल में दो हजार नवजातों की जांच में 47 बच्चों के लेंस में मिली समस्या
अनुज शर्मा
करनाल। महिलाओं की जीवनशैली में बदलाव और खानपान यानी फास्ट फूड का अधिक सेवन करने के कारण समय से पहले और दो किलोग्राम से कम वजन वाले शिशु पैदा हो रहे हैं। ऐसे में हर माह 80 से 90 नवजात सिविल अस्पताल के विशेष नवजात शिशु चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में दाखिल करने पड़ रहे हैं। वहीं, इन शिशुओं की आंखों के लेंस में धुंधलापन भी आ रहा है। जिसे चिकित्सीय भाषा में ''रेटिनोपैथी ऑफ प्री-मेच्योरिटी'' (आरओपी) कहते हैं।
सिविल अस्पताल में स्थापित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) के माध्यम से नेत्र रोग विशेषज्ञ आरओपी की जांच कर रहे हैं। वहीं, जांच में आरओपी की बीमारी से ग्रस्त पाए जाने वाले नवजातों की आंखों की रोशनी लेजर तकनीक व इंजेक्शन से बचाई जा रही है। पिछले पांच सालों में नेत्र रोग विशेषज्ञों ने एसएनसीयू में दाखिल दो हजार नवजातों की आरओपी की जांच की गई है। जिनमें से 47 नवजातों की आंखों में यह समस्या मिली है। जिनकी डीईआईसी के माध्यम से निशुल्क ऑपरेशन करवाकर रोशनी बचाई गई है। संवाद
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क्या है आरओपी
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मित्तल ने बताया कि आरओपी समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में एक अंधेपन की बीमारी है। इसमें आंख की रेटीना का पर्दा खिंच जाता है। इससे रेटीना पर दृश्य बनना बंद हो जाता है। यह बीमारी अधिकतर छह से आठ माह में पैदा होने वाले शिशुओं में होती है। इसमें असामान्य रक्त वाहिकाएं बढ़ने लगती हैं और रेटीना भर जाता है, जो आंखों में पीछे की ओर होता है। ये असामान्य रक्त वाहिकाओं को नाजुक कर देता है और रिसाव शुरू हो जाता है।
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आरओपी के कारण
समय से पूर्व जन्म, जन्म के समय शिशु के वजन में कमी होना, लंबे समय तक ऑक्सीजन की जरूरत, संक्रमण व रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन)

सिविल अस्पताल में प्रतिमाह हाे रहे 250 से अधिक प्रसव
प्रसूति विभाग की इंचार्ज डॉ. दीपा ने बताया कि प्रसूति कक्ष में प्रतिमाह 250 से अधिक प्रसव होते हैं। इनमें से कम से कम 80 से अधिक नवजातों को जन्म के बाद एसएनसीयू में दाखिल कराना पड़ता है। अगर गर्भावस्था में गर्भवती अपना खानपान बेहतर रखे तो समय से पूर्व होने वाले प्रसव से बचा जा सकता है। साथ ही बेहतर खानपान बच्चों के वजन में बढ़ोतरी भी करता है।


जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र के माध्यम से मिल रहा इलाज

जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र की प्रबंधक अर्चना ने बताया कि आमतौर पर समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में आरओपी के कारण अंधापन आ जाता है। इसके अलावा अन्य नवजात में विभिन्न कारणों से अंधेपन की शिकायत आ जाती है। यदि इस बीमारी की रोकथाम के लिए बचपन में प्रयास नहीं किए जाते हैं तो धीरे-धीरे शिशुओं की आंखों की रोशनी चली जाती है। ऐसे में जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र के माध्यम से नवजात बच्चों की आरओपी स्क्रीनिंग करवाई जाती है और समस्या मिलने पर बीमारी से छुटकारा दिलाया जाता है।
पिछले पांच वर्षों में स्क्रीनिंग व आरओपी का ब्योरा
वर्ष जांच आरओपी
2018-19 168 03
2019-20 278 05

2020-21 235 12

2021-22 242 08
2022-23 807 09
2023-24 272 10

कुल 2002 47

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तीन माह में हुए प्रसव और एसएनसीयू में दाखिल बच्चे
माह प्रसव एसएनसीयू में दाखिल
जून 244 84
जुलाई 314 98
अगस्त 185 57
कुल 743 239
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