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नौ माह पहले संसद भवन की तरह गोल स्कूल के भवन को देखने करनाल आए थे पूर्व राष्ट्रपति
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन से करनाल भी आहत है, कर्ण नगरी के साथ भी उनकी यादें जुड़ी हैं। करीब नौ माह पहले संसद भवन की तरह गोल व त्रि-मंजिला स्कूल बाबा रामदास विद्यापीठ के भवन को देखने के लिए वह करनाल आए। इस दौरान उन्होंने स्कूल कैंपस में हुए कार्यक्रम में बच्चों से सवाल जवाब करते हुए अपने जीवन के अनुभव भी सांझा किए। गांव कलवेहड़ी में बने स्कूल में उन्होंने स्कूल के चेयरमैन देवेन्द्र बतरा के साथ स्कूल के भवन का अवलोकन किया था। साथ ही इसके निर्माण व हिंदू धर्म के चार वेदों के नाम पर बने चार द्वारों के बारे में जाना। चेयरमैन देवेन्द्र बतरा ने बताया कि 8 नवंबर 2019 को प्रणब मुखर्जी स्कूल आए थे। 30 जनवरी 2016 को बेटे मानव बतरा की शादी पर उन्होंने उन्हें आमंत्रित किया था लेकिन किसी कारण वे आ नहीं पाए थे। तो बाद में उन्होंने वर-वधू को राष्ट्रपति भवन बुलाया। इस दौरान घर या स्कूल आने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस दौरान बातचीत में उन्हें वेबसाइट पर स्कूल दिखाया तो उन्होंने स्कूल का एरियल व्यू देखकर कहा कि संसद भवन की तरह गोल बने इस स्कूल को देखने मैं एक दिन जरूर आऊंगा।
यंग आईज को देखता हूं तो जोश भरता है
चेयरमैन देवेंद्र बतरा ने बताया कि जब पूर्व राष्ट्रपति स्कूल आए थे तो उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत बच्चों के साथ बातचीत से की थी। मंच से प्रणब मुखर्जी बोले थे कि यंग आईज को जब मैं देखता हूं तो जोश भर जाता है। मैं 84 वर्ष का हूं, लेकिन युवाओं की आंखों की चमक मुझे यंग होने का एहसास कराती है।
मंच से खुद बोले थे- पूछो सवाल
अपने 24 मिनट के भाषण के दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विद्यार्थियों से खुद सवाल जवाब के लिए आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि यदि विद्यार्थी में सवाल करने की लालसा न रहे। तो उसकी सीखने की आदत भी खत्म हो जाती है। इस दौरान काफी विद्यार्थियों ने हाथ खड़े किये तो दो विद्यार्थियों को सवाल करने का मौका मिला।
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जो मेरे बॉस थे, उन्हें प्रधानमंत्री बनाया
सातवीं कक्षा की छात्रा साहिबा ने भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनका अनुभव पूछा तो वे बोले कि जो मैरे बॉस थे, उन्हें मैंने शपथ दिलाकर प्रधानमंत्री बनाया...। राष्ट्रपति बनने से पहले मैंने मंत्री के रूप में वित्त और विदेश जैसे कई मंत्रालयों में काम किया। 2012 से 2017 तक के मेरे कार्यकाल में देश को दो प्रधानमंत्री मिले। पहले मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। जब मैं मंत्री रहा तो वो मेरे बॉस थे। बाद में 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा। इसके अलावा 11वीं की छात्रा दिव्या चौपड़ा ने उनसे विद्यार्थी जीवन और पसंदीदा विषय के बारे में पूछा था, तो इसका उत्तर उन्होंने इतिहास विषय बताया, जो उन्हें गर्व की अनुभूति कराता है..।
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यंग आईज को देखता हूं तो जोश भरता है
चेयरमैन देवेंद्र बतरा ने बताया कि जब पूर्व राष्ट्रपति स्कूल आए थे तो उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत बच्चों के साथ बातचीत से की थी। मंच से प्रणब मुखर्जी बोले थे कि यंग आईज को जब मैं देखता हूं तो जोश भर जाता है। मैं 84 वर्ष का हूं, लेकिन युवाओं की आंखों की चमक मुझे यंग होने का एहसास कराती है।
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मंच से खुद बोले थे- पूछो सवाल
अपने 24 मिनट के भाषण के दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विद्यार्थियों से खुद सवाल जवाब के लिए आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि यदि विद्यार्थी में सवाल करने की लालसा न रहे। तो उसकी सीखने की आदत भी खत्म हो जाती है। इस दौरान काफी विद्यार्थियों ने हाथ खड़े किये तो दो विद्यार्थियों को सवाल करने का मौका मिला।
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जो मेरे बॉस थे, उन्हें प्रधानमंत्री बनाया
सातवीं कक्षा की छात्रा साहिबा ने भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनका अनुभव पूछा तो वे बोले कि जो मैरे बॉस थे, उन्हें मैंने शपथ दिलाकर प्रधानमंत्री बनाया...। राष्ट्रपति बनने से पहले मैंने मंत्री के रूप में वित्त और विदेश जैसे कई मंत्रालयों में काम किया। 2012 से 2017 तक के मेरे कार्यकाल में देश को दो प्रधानमंत्री मिले। पहले मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। जब मैं मंत्री रहा तो वो मेरे बॉस थे। बाद में 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा। इसके अलावा 11वीं की छात्रा दिव्या चौपड़ा ने उनसे विद्यार्थी जीवन और पसंदीदा विषय के बारे में पूछा था, तो इसका उत्तर उन्होंने इतिहास विषय बताया, जो उन्हें गर्व की अनुभूति कराता है..।