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Karnal News: सकारात्मक सोच से मिलेगी वास्तविक खुशी
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काजल पांचाल
करनाल। प्रसन्नता जीवन का एक अहम हिस्सा है, ये एक भावनात्मक शारीरिक प्रक्रिया भी है, जो हर किसी से जीवनपर्यंत जुड़ी होती है। जो व्यक्ति के अंतर्मन के साथ साथ उसके चेहरे पर भी स्पष्ट रूप से नजर आती है। ये हर व्यक्ति की चाह भी है, लेकिन काफी हद तक परिस्थितियों पर निर्भर करती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुशी की तलाश हर किसी को है।
दुनिया में शेयरिंग एंड केयरिंग थीम पर 20 मार्च को विश्व प्रसन्नता दिवस मनाया जाएगा। मानसिक और शारीरिक खुशी को जीवन में लागू हर मुश्किल दिन को सरलता से जीवन जीने के लिए यह दिन मनाया जाता है। इसी बीच शहर के कई अनुभवी लोगों ने इस दिन के महत्व पर मानसिक खुशी और संतुलन को अपने जीवन में साकार करने की सलाह दी।
इस विशेष दिन के अवसर पर डीएवी महाविद्यालय से मनोविज्ञान विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ पूनम पांचाल, मनोचिकित्सक डॉ सौभाग्य कौशिक और योग गुरु दिनेश गुलाटी व नवीन संदुजा का कहना है कि विश्व प्रसन्नता दिवस पर लोगों को यह संदेश देता है कि खुशी केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह हमारे भीतर की मानसिक स्थिति और दृष्टिकोण पर आधारित होती है। संवाद
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गलतियां करें स्वीकार
डीएवी महाविद्यालय से मनोविशेषज्ञ डॉ पूनम पांचाल ने बताया कि खुशी और मानसिक शांति हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है जो, यह हमारी सोच, दृष्टिकोण और व्यवहार पर आधारित होती है। जब हम अपनी सोच को सकारात्मक बनाते हैं और अपने अंदर आत्म-संवेदनशीलता को जागृत करते हैं, तो हम खुशी की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
बुरे लम्हे भुलाकर बढ़ें आगे
जिला नागरिक अस्पताल से मनोचिकित्सक डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित हर व्यक्ति की अनूठी स्थिति होती है और खुशी पाने के लिए हमें अपनी मानसिक स्थिति को समझना जरूरी है। उनका कहना है कि पति-पत्नी हो, युवा हो या कर्मचारी सभी को एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल जरूरी है।
अंतर्मन को समझना जरूरी
योग गुरु दिनेश गुलाटी ने बताया कि तनाव और चिंता से बचने के लिए मानसिक विश्राम और आत्म-चिंतन महत्वपूर्ण है। मानसिक शांति के लिए, केवल बाहरी दुनिया से दूर भागने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपनी अंतर्मन को समझना जरूरी है। संतुलित आहार और पर्याप्त नींद भी मानसिक शांति को बढ़ावा देती है।
खु्शी से करें हर काम
योग गुरू नवीन संदुजा बताते हैं कि खुशी केवल बाहरी नहीं आंतरिक रूप से होनी जरूरी है, जो लोगों को अपने कार्यों संतुष्टि पाने के बाद मिलती है। किसी भी काम को केवल दूसरों को संतुष्ट करने के भाव से ना करें बल्कि खुद को और बेहतर बनाने के लिए करें ताकी खुद का मन उस कार्य से संतुष्ट हो।
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करनाल। प्रसन्नता जीवन का एक अहम हिस्सा है, ये एक भावनात्मक शारीरिक प्रक्रिया भी है, जो हर किसी से जीवनपर्यंत जुड़ी होती है। जो व्यक्ति के अंतर्मन के साथ साथ उसके चेहरे पर भी स्पष्ट रूप से नजर आती है। ये हर व्यक्ति की चाह भी है, लेकिन काफी हद तक परिस्थितियों पर निर्भर करती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुशी की तलाश हर किसी को है।
दुनिया में शेयरिंग एंड केयरिंग थीम पर 20 मार्च को विश्व प्रसन्नता दिवस मनाया जाएगा। मानसिक और शारीरिक खुशी को जीवन में लागू हर मुश्किल दिन को सरलता से जीवन जीने के लिए यह दिन मनाया जाता है। इसी बीच शहर के कई अनुभवी लोगों ने इस दिन के महत्व पर मानसिक खुशी और संतुलन को अपने जीवन में साकार करने की सलाह दी।
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इस विशेष दिन के अवसर पर डीएवी महाविद्यालय से मनोविज्ञान विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ पूनम पांचाल, मनोचिकित्सक डॉ सौभाग्य कौशिक और योग गुरु दिनेश गुलाटी व नवीन संदुजा का कहना है कि विश्व प्रसन्नता दिवस पर लोगों को यह संदेश देता है कि खुशी केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह हमारे भीतर की मानसिक स्थिति और दृष्टिकोण पर आधारित होती है। संवाद
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डीएवी महाविद्यालय से मनोविशेषज्ञ डॉ पूनम पांचाल ने बताया कि खुशी और मानसिक शांति हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है जो, यह हमारी सोच, दृष्टिकोण और व्यवहार पर आधारित होती है। जब हम अपनी सोच को सकारात्मक बनाते हैं और अपने अंदर आत्म-संवेदनशीलता को जागृत करते हैं, तो हम खुशी की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
बुरे लम्हे भुलाकर बढ़ें आगे
जिला नागरिक अस्पताल से मनोचिकित्सक डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित हर व्यक्ति की अनूठी स्थिति होती है और खुशी पाने के लिए हमें अपनी मानसिक स्थिति को समझना जरूरी है। उनका कहना है कि पति-पत्नी हो, युवा हो या कर्मचारी सभी को एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल जरूरी है।
अंतर्मन को समझना जरूरी
योग गुरु दिनेश गुलाटी ने बताया कि तनाव और चिंता से बचने के लिए मानसिक विश्राम और आत्म-चिंतन महत्वपूर्ण है। मानसिक शांति के लिए, केवल बाहरी दुनिया से दूर भागने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपनी अंतर्मन को समझना जरूरी है। संतुलित आहार और पर्याप्त नींद भी मानसिक शांति को बढ़ावा देती है।
खु्शी से करें हर काम
योग गुरू नवीन संदुजा बताते हैं कि खुशी केवल बाहरी नहीं आंतरिक रूप से होनी जरूरी है, जो लोगों को अपने कार्यों संतुष्टि पाने के बाद मिलती है। किसी भी काम को केवल दूसरों को संतुष्ट करने के भाव से ना करें बल्कि खुद को और बेहतर बनाने के लिए करें ताकी खुद का मन उस कार्य से संतुष्ट हो।