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हिंदी भाषा में भी मिलेंगी पॉलिटेक्निक की पुस्तकें
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201: हिन्दी जागृति पखवाड़ा के तहत गन्ना पृजनन संस्थान में आयोजित की गई निबंध प्रतियोगिता। अमर उजाल?
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करनाल। हरियाणा में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के माध्यम से पॉलिटेक्निक के पाठ्यक्रम पर आधारित पुस्तकें हिंदी में तैयार करने का कार्यक्रम शुरू किया गया है। उम्मीद है कि ये पुस्तकें बहुत जल्द हरियाणा के विद्यार्थियों को उपलब्ध हो सकेंगी। यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने एक दिवसीय ऑनलाइन संगोष्ठी में कही। बिहार के मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय और हरियाणा ग्रंथ अकादमी की ओर से हिंदी साहित्य विविध परिप्रेक्ष्य विषय पर इसका आयोजन किया गया था।
संगोष्ठी में उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यह घोषणा की है कि भारत की सभी क्षेत्रीय व स्थानीय भाषाओं में भी अब प्रौद्योगिकी की शिक्षा प्रदान की जाएगी। तकनीकी शिक्षा परिषद ने तकनीकी शिक्षा के लिए सभी भाषाओं के दरवाजे खोल दिए हैं। इनमें राजभाषा हिंदी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को देश में जो स्थान देने का वचन दिया था, वह आज भी अधूरा है। आम बोलचाल तो दूर, हमारे शिक्षण संस्थानों के हिंदी विभाग में भी आज सारा कामकाज हिंदी में नहीं होता। यह अवसर इस दृष्टि से हमारे लिए आत्मनिरीक्षण का है। संगोष्ठी में गोपाल रेड्डी, डॉ अंजनी कुमार श्रीवास्तव, राजेंद्र बडगूजर, राजीव कुमार आदि मौजूद रहे।
हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता में 17 कर्मचारियों ने की भागीदारी
करनाल। गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केंद्र करनाल में राजभाषा हिंदी पखवाड़े के तहत शनिवार को नगर स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अंतर्गत आने वाले सभी बैंकों, निगमों, संस्थानों व अन्य कार्यालयों के 17 कर्मचारियों ने प्रतियोगिता में भागीदारी की। प्रतियोगिता के परिणाम 29 सितंबर को घोषित होंगे और विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
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केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डा. एसके पांडे ने कहा कि राजभाषा के सम्मान एवं सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग में प्रगति के संकल्प को सुदृढ़ करने के लिए संस्थान में 14 से 29 सितंबर तक पखवाड़ा पर्व मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में 27 सितंबर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आने वाले करनाल स्थित सभी संस्थानों के तकनीकी अधिकारियों के लिए हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता होगी। संवाद
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संगोष्ठी में उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यह घोषणा की है कि भारत की सभी क्षेत्रीय व स्थानीय भाषाओं में भी अब प्रौद्योगिकी की शिक्षा प्रदान की जाएगी। तकनीकी शिक्षा परिषद ने तकनीकी शिक्षा के लिए सभी भाषाओं के दरवाजे खोल दिए हैं। इनमें राजभाषा हिंदी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को देश में जो स्थान देने का वचन दिया था, वह आज भी अधूरा है। आम बोलचाल तो दूर, हमारे शिक्षण संस्थानों के हिंदी विभाग में भी आज सारा कामकाज हिंदी में नहीं होता। यह अवसर इस दृष्टि से हमारे लिए आत्मनिरीक्षण का है। संगोष्ठी में गोपाल रेड्डी, डॉ अंजनी कुमार श्रीवास्तव, राजेंद्र बडगूजर, राजीव कुमार आदि मौजूद रहे।
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हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता में 17 कर्मचारियों ने की भागीदारी
करनाल। गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केंद्र करनाल में राजभाषा हिंदी पखवाड़े के तहत शनिवार को नगर स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अंतर्गत आने वाले सभी बैंकों, निगमों, संस्थानों व अन्य कार्यालयों के 17 कर्मचारियों ने प्रतियोगिता में भागीदारी की। प्रतियोगिता के परिणाम 29 सितंबर को घोषित होंगे और विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
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केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डा. एसके पांडे ने कहा कि राजभाषा के सम्मान एवं सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग में प्रगति के संकल्प को सुदृढ़ करने के लिए संस्थान में 14 से 29 सितंबर तक पखवाड़ा पर्व मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में 27 सितंबर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आने वाले करनाल स्थित सभी संस्थानों के तकनीकी अधिकारियों के लिए हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता होगी। संवाद