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Karnal News: परीक्षा सिर पर... कमरे के लिए भटक रहे भावी डॉक्टर
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राम सारस्वत
करनाल। मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्रों को पुरुष छात्रावास में कमरा आवंटित होने के बाद भी बार-बार कमरा बदलने के लिए कहे जाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 2023 बैच के करीब 15-20 छात्र इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं। खास बात यह है कि 24 अगस्त से इन छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं शुरू होनी हैं, ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले कमरा बदलने के दबाव ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
छात्रों का कहना है कि छात्रावास में कमरा आधिकारिक रूप से आवंटित किया जा चुका है लेकिन अब वार्डन की ओर से उन्हें दोबारा कमरे बदलने के लिए कहा जा रहा है। इससे छात्रों को अपना सामान बार-बार व्यवस्थित करने के साथ पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने की चिंता है। प्रैक्टिकल परीक्षा नजदीक होने के कारण छात्र खुलकर सामने आने से भी बच रहे हैं।
छात्रों के अनुसार छात्रावास के कमरों की क्षमता दो छात्रों की है लेकिन 2022 बैच के कई छात्रों को फिलहाल सिंगल ऑक्यूपेंसी में कमरे दिए गए हैं। वहीं 2023 बैच के छात्रों के लिए कमरों की व्यवस्था को लेकर परेशानी सामने आ रही है।
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छात्रों का कहना है कि यदि 2022 बैच के जिन छात्रों को सिंगल ऑक्यूपेंसी में कमरे दिए गए हैं, उन्हें डबल ऑक्यूपेंसी के हिसाब से समायोजित किया जाए तो उपलब्ध कमरों का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है और 2023 बैच के छात्रों को बार-बार कमरा बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सात मंजिल का छात्रावास, लिफ्ट भी नहीं चल रही
पुरुष छात्रावास की इमारत सात मंजिल की है लेकिन छात्रों की परेशानी सिर्फ कमरे के आवंटन तक सीमित नहीं है। छात्रों के मुताबिक लिफ्ट के काम नहीं करने के कारण ऊपरी मंजिलों तक आने-जाने में भी दिक्कत होती है।
यदि छात्रों को सातवीं मंजिल पर कमरा बदलकर दिया जाता है तो उन्हें रोजाना सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ता है। परीक्षा के दिनों में किताबें, सामान और अन्य जरूरी चीजें लेकर बार-बार ऊपर-नीचे जाना छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
पीडब्ल्यूडी का कमरा भी हो रहा इस्तेमाल
छात्रों का कहना है कि छात्रावास में पीडब्ल्यूडी से संबंधित एक कर्मचारी का कमरा भी इस्तेमाल में है, जबकि एमबीबीएस छात्रों को कमरों की जरूरत है। छात्रों का सवाल है कि जब छात्रावास के कमरों की क्षमता पहले से ही सीमित है तो उपलब्ध कमरों का आवंटन इस तरह क्यों नहीं किया जा रहा कि छात्रों को बार-बार स्थानांतरित न होना पड़े।
प्रैक्टिकल से तीन दिन पहले बढ़ी चिंता
2023 बैच के छात्रों की 24 अगस्त से प्रैक्टिकल परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। छात्रों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि परीक्षा के ठीक पहले वे हॉस्टल संबंधी शिकायत को खुलकर उठाने से डर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि नाम सामने आने पर परीक्षा के दौरान किसी तरह की परेशानी खड़ी हो सकती है।
छात्रों का कहना है कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि एक बार आवंटित कमरे में परीक्षा तक स्थिर रहने देने की है, ताकि वे बिना अतिरिक्त तनाव के अपनी परीक्षा की तैयारी कर सकें।
छात्र बोले- 2022 बैच की व्यवस्था में नहीं किया जा रहा बदलाव
छात्रों का कहना है कि 2022 बैच के छात्रों की व्यवस्था में ज्यादा बदलाव नहीं किया जा रहा, जबकि 2023 बैच के छात्रों से बार-बार कमरे बदलने को कहा जा रहा है। यदि उपलब्ध कमरों में डबल ऑक्यूपेंसी की व्यवस्था लागू की जाए तो समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। अब छात्रों की नजर कॉलेज प्रबंधन के निर्णय पर है कि परीक्षा से ठीक पहले उन्हें कमरे बदलने के दबाव से राहत मिलती है या नहीं।
2026 बैच के बच्चों के आने के कारण कमरे के बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। छात्रों से रोजाना बातचीत होती है। यदि समस्या है तो इसे दिखवाया जाएगा। लिफ्ट तकनीकी समस्या के चलते खराब है। - डॉ. कुनाल खन्ना, चीफ वार्डन, पुरुष छात्रावास, केसीजीएमसी।
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करनाल। मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्रों को पुरुष छात्रावास में कमरा आवंटित होने के बाद भी बार-बार कमरा बदलने के लिए कहे जाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 2023 बैच के करीब 15-20 छात्र इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं। खास बात यह है कि 24 अगस्त से इन छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं शुरू होनी हैं, ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले कमरा बदलने के दबाव ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
छात्रों का कहना है कि छात्रावास में कमरा आधिकारिक रूप से आवंटित किया जा चुका है लेकिन अब वार्डन की ओर से उन्हें दोबारा कमरे बदलने के लिए कहा जा रहा है। इससे छात्रों को अपना सामान बार-बार व्यवस्थित करने के साथ पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने की चिंता है। प्रैक्टिकल परीक्षा नजदीक होने के कारण छात्र खुलकर सामने आने से भी बच रहे हैं।
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छात्रों के अनुसार छात्रावास के कमरों की क्षमता दो छात्रों की है लेकिन 2022 बैच के कई छात्रों को फिलहाल सिंगल ऑक्यूपेंसी में कमरे दिए गए हैं। वहीं 2023 बैच के छात्रों के लिए कमरों की व्यवस्था को लेकर परेशानी सामने आ रही है।
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छात्रों का कहना है कि यदि 2022 बैच के जिन छात्रों को सिंगल ऑक्यूपेंसी में कमरे दिए गए हैं, उन्हें डबल ऑक्यूपेंसी के हिसाब से समायोजित किया जाए तो उपलब्ध कमरों का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है और 2023 बैच के छात्रों को बार-बार कमरा बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सात मंजिल का छात्रावास, लिफ्ट भी नहीं चल रही
पुरुष छात्रावास की इमारत सात मंजिल की है लेकिन छात्रों की परेशानी सिर्फ कमरे के आवंटन तक सीमित नहीं है। छात्रों के मुताबिक लिफ्ट के काम नहीं करने के कारण ऊपरी मंजिलों तक आने-जाने में भी दिक्कत होती है।
यदि छात्रों को सातवीं मंजिल पर कमरा बदलकर दिया जाता है तो उन्हें रोजाना सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ता है। परीक्षा के दिनों में किताबें, सामान और अन्य जरूरी चीजें लेकर बार-बार ऊपर-नीचे जाना छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
पीडब्ल्यूडी का कमरा भी हो रहा इस्तेमाल
छात्रों का कहना है कि छात्रावास में पीडब्ल्यूडी से संबंधित एक कर्मचारी का कमरा भी इस्तेमाल में है, जबकि एमबीबीएस छात्रों को कमरों की जरूरत है। छात्रों का सवाल है कि जब छात्रावास के कमरों की क्षमता पहले से ही सीमित है तो उपलब्ध कमरों का आवंटन इस तरह क्यों नहीं किया जा रहा कि छात्रों को बार-बार स्थानांतरित न होना पड़े।
प्रैक्टिकल से तीन दिन पहले बढ़ी चिंता
2023 बैच के छात्रों की 24 अगस्त से प्रैक्टिकल परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। छात्रों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि परीक्षा के ठीक पहले वे हॉस्टल संबंधी शिकायत को खुलकर उठाने से डर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि नाम सामने आने पर परीक्षा के दौरान किसी तरह की परेशानी खड़ी हो सकती है।
छात्रों का कहना है कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि एक बार आवंटित कमरे में परीक्षा तक स्थिर रहने देने की है, ताकि वे बिना अतिरिक्त तनाव के अपनी परीक्षा की तैयारी कर सकें।
छात्र बोले- 2022 बैच की व्यवस्था में नहीं किया जा रहा बदलाव
छात्रों का कहना है कि 2022 बैच के छात्रों की व्यवस्था में ज्यादा बदलाव नहीं किया जा रहा, जबकि 2023 बैच के छात्रों से बार-बार कमरे बदलने को कहा जा रहा है। यदि उपलब्ध कमरों में डबल ऑक्यूपेंसी की व्यवस्था लागू की जाए तो समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। अब छात्रों की नजर कॉलेज प्रबंधन के निर्णय पर है कि परीक्षा से ठीक पहले उन्हें कमरे बदलने के दबाव से राहत मिलती है या नहीं।
2026 बैच के बच्चों के आने के कारण कमरे के बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। छात्रों से रोजाना बातचीत होती है। यदि समस्या है तो इसे दिखवाया जाएगा। लिफ्ट तकनीकी समस्या के चलते खराब है। - डॉ. कुनाल खन्ना, चीफ वार्डन, पुरुष छात्रावास, केसीजीएमसी।