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Karnal News: संकट के दौर से गुजर रहा प्लाईवुड उद्योग
Sun, 31 Aug 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:58 AM IST
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प्लाईवुड फैक्टरी में काम करते श्रमिक। आर्काइव
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। करीब 1400 करोड़ रुपये की टर्नओवर वाले प्लाईवुड उद्योग को मंदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। कारोबार को चलाने के लिए उद्यमियों को संजीवनी की जरूरत है। ऊपर से बारिश के कारण दूसरे राज्यों में आई बाढ़ के कारण प्लाईवुड उद्योग काफी प्रभावित हो रहा है।
बारिश के कारण रास्ते बांद होने से माल ट्रांसपोर्ट में रुकने से आगे नहीं जा पा रहा है। इससे उद्यमियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उधर, पॉपुलर के बढ़े हुए दामों ने भी प्लाईवुड उद्योग की कमर को तोड़ कर रख दिया है। अब पॉपुलर की लकड़ी वैरायटी के हिसाब से लगभग न्यूनतम 1250 रुपये व अधिकतम 1700 रुपये क्विंटल तक बिक रही है। 2005-06 में इसका रेट 500 रुपये और 2003 के दौरान 160 से 180 रुपये क्विंटल था। इसी तरह सफेदा भी अब लगभग 1100 से 1250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जगाधरी के मानकपुर और यमुनानगर के मंडौली में लकड़ी मंडियां हैं। इन्हीं मंडियों से लकड़ी को प्लाईवुड फैक्टरियों में भेजा जाता है। प्लाईवुड उद्यमी अंकुर जैन ने बताया कि लकड़ी की जो ट्रॉली पहले 80 से 90 हजार रुपये की मिलती थी, अब वह करीब ढाई से पौने तीन लाख रुपये की पड़ती है। प्रदेश की 70 फीसदी प्लाईवुड फैक्टरियां यमुनानगर में हैं। हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष जेके बिहानी का कहना है उद्योग को काफी नुकसान हो रहा है।
काफी उद्योग बंद हो चुके या फिर यहां से पलायन कर चुके हैं। एक साल से नेपाल से प्लाईवुड आयात हो रहा है। इससे कारोबार को काफी नुकसान पहुंचा है। प्लाईवुड मांग घटने से उत्पादन 40 फीसदी रह गया है। बारिश के कारण भी कारोबार काफी प्रभावित हो रहा है।
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जिले से 100 उद्याेग कर चुके पलायन
वैसे तो यमुनानगर को प्लाईवुड हब कहा जाता है, लेकिन संकट के दौर से गुजरने पर करीब 100 उद्योग यहां से पलायन कर चुके हैं। जो बचे उद्योग चल रहे उनकी हालत भी ठीक नहीं है। हालांकि गुणवत्ता में यमुनानगर की प्लाईवुड ज्यादा बेहतर है, परंतु मंडियों में लकड़ी की आवक 60 प्रतिशत कम होने से उद्योग पर इसका असर पड़ रहा है।
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यमुनानगर। करीब 1400 करोड़ रुपये की टर्नओवर वाले प्लाईवुड उद्योग को मंदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। कारोबार को चलाने के लिए उद्यमियों को संजीवनी की जरूरत है। ऊपर से बारिश के कारण दूसरे राज्यों में आई बाढ़ के कारण प्लाईवुड उद्योग काफी प्रभावित हो रहा है।
बारिश के कारण रास्ते बांद होने से माल ट्रांसपोर्ट में रुकने से आगे नहीं जा पा रहा है। इससे उद्यमियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उधर, पॉपुलर के बढ़े हुए दामों ने भी प्लाईवुड उद्योग की कमर को तोड़ कर रख दिया है। अब पॉपुलर की लकड़ी वैरायटी के हिसाब से लगभग न्यूनतम 1250 रुपये व अधिकतम 1700 रुपये क्विंटल तक बिक रही है। 2005-06 में इसका रेट 500 रुपये और 2003 के दौरान 160 से 180 रुपये क्विंटल था। इसी तरह सफेदा भी अब लगभग 1100 से 1250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जगाधरी के मानकपुर और यमुनानगर के मंडौली में लकड़ी मंडियां हैं। इन्हीं मंडियों से लकड़ी को प्लाईवुड फैक्टरियों में भेजा जाता है। प्लाईवुड उद्यमी अंकुर जैन ने बताया कि लकड़ी की जो ट्रॉली पहले 80 से 90 हजार रुपये की मिलती थी, अब वह करीब ढाई से पौने तीन लाख रुपये की पड़ती है। प्रदेश की 70 फीसदी प्लाईवुड फैक्टरियां यमुनानगर में हैं। हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष जेके बिहानी का कहना है उद्योग को काफी नुकसान हो रहा है।
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काफी उद्योग बंद हो चुके या फिर यहां से पलायन कर चुके हैं। एक साल से नेपाल से प्लाईवुड आयात हो रहा है। इससे कारोबार को काफी नुकसान पहुंचा है। प्लाईवुड मांग घटने से उत्पादन 40 फीसदी रह गया है। बारिश के कारण भी कारोबार काफी प्रभावित हो रहा है।
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जिले से 100 उद्याेग कर चुके पलायन
वैसे तो यमुनानगर को प्लाईवुड हब कहा जाता है, लेकिन संकट के दौर से गुजरने पर करीब 100 उद्योग यहां से पलायन कर चुके हैं। जो बचे उद्योग चल रहे उनकी हालत भी ठीक नहीं है। हालांकि गुणवत्ता में यमुनानगर की प्लाईवुड ज्यादा बेहतर है, परंतु मंडियों में लकड़ी की आवक 60 प्रतिशत कम होने से उद्योग पर इसका असर पड़ रहा है।