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जिले में 8500 एकड़ गेहूं की फसल पीला रतुए की चपेट में
करनाल
Updated Sat, 01 Mar 2014 11:23 PM IST
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करनाल जिले में गेहूं की फसल के पीले रतुए की चपेट में आने से किसानों की नींद उड़ गई है। जिले में करीब 8500 एकड़ से अधिक खड़ी फसल में इस बीमारी ने पांव पसार लिए हैं।
इंद्री क्षेत्र के करीब 3400 एकड़ में पीला रतुए ने फसलों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसस वजह से कृषि अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में रिपोर्ट चंडीगढ़ कार्यालय भेजी गई है। वहीं, बीते तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण फसलों में स्प्रे करने में दिक्कत आ रही है।
गौरतलब है कि गेहूं की फसल पर जहां एक ओर मौसम की मार पड़ रही है। वहीं, अब पीले रतुए किसानों की मुश्किलें ओर बढ़ा दी हैं। लाख कोशिश के बावजूद इस पर लगाम नहीं लग पा रही है। बीमारी से डरे हुए किसान लगातार स्प्रे तथा दवाइयों का सहारा ले रहे हैं, जिसके कारण प्राइवेट पेस्टिसाइड दुकान संचालक जमकर चांदी कुट रहे हैं, लेकिन फिलहाल राहत मिलने के आसार कम हैं।
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ये गांव चपेट में
कृषि विभाग की ओर से जिले के 8500 एकड़ में पीला रतुआ की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को चंड़ीगढ़ भेज दी है। इंद्री क्षेत्र में यह आंकड़ा सबसे अधिक है। गांव डबकौली कला, डबकौली खुर्द, बदरपुर, गढ़ीबीरबल, लबकरी, हंसुमाजरा, कलसौरा, ब्याना, खुखनी, चंद्राव, चांदसमंद सहित क्षेत्र के कई गांवों के करीब 3400 एकड़ फसल पीले रतुए की चपेट में है। किसान नरेंद्र सिंह, सेठपाल राणा, राजेश मंढाण, बलिंद्र शर्मा तथा कर्मसिंह ने बताया कि यह बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। दिन में ही काफी क्षेत्र में हवा के जरिये फैलती जा रही है। सरकार तथा कृषि विभाग बीमारी पर रोक लगाने में सख्त कदम नहीं उठा रहा है।
बारिश रुकने के बाद स्प्रे : कृषि अधिकारी
कृषि अधिकारी पवन शर्मा ने बताया कि करनाल में 8500 एकड़ गेहूं की फसल में पीला रतुआ की चपेट में है। इंद्री क्षेत्र की 3400 एकड़ फसल भी प्रभावित है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर चंडीगढ़ भेज दी गई है। पीला रतुआ रोकने के लिए स्प्रे करवाया जा रहा है, परंतु बारिश के कारण काम रुका हुआ है। हवा चलने के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है। बारिश रुकने के बाद स्प्रे का कार्य शुरू होगा। जिस भी किसान को इसके लक्षण दिखाई दें, वे तुरंत कृर्षि विभाग के कार्यालय पर सूचना दे सकता है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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इंद्री क्षेत्र के करीब 3400 एकड़ में पीला रतुए ने फसलों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसस वजह से कृषि अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में रिपोर्ट चंडीगढ़ कार्यालय भेजी गई है। वहीं, बीते तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण फसलों में स्प्रे करने में दिक्कत आ रही है।
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गौरतलब है कि गेहूं की फसल पर जहां एक ओर मौसम की मार पड़ रही है। वहीं, अब पीले रतुए किसानों की मुश्किलें ओर बढ़ा दी हैं। लाख कोशिश के बावजूद इस पर लगाम नहीं लग पा रही है। बीमारी से डरे हुए किसान लगातार स्प्रे तथा दवाइयों का सहारा ले रहे हैं, जिसके कारण प्राइवेट पेस्टिसाइड दुकान संचालक जमकर चांदी कुट रहे हैं, लेकिन फिलहाल राहत मिलने के आसार कम हैं।
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ये गांव चपेट में
कृषि विभाग की ओर से जिले के 8500 एकड़ में पीला रतुआ की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को चंड़ीगढ़ भेज दी है। इंद्री क्षेत्र में यह आंकड़ा सबसे अधिक है। गांव डबकौली कला, डबकौली खुर्द, बदरपुर, गढ़ीबीरबल, लबकरी, हंसुमाजरा, कलसौरा, ब्याना, खुखनी, चंद्राव, चांदसमंद सहित क्षेत्र के कई गांवों के करीब 3400 एकड़ फसल पीले रतुए की चपेट में है। किसान नरेंद्र सिंह, सेठपाल राणा, राजेश मंढाण, बलिंद्र शर्मा तथा कर्मसिंह ने बताया कि यह बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। दिन में ही काफी क्षेत्र में हवा के जरिये फैलती जा रही है। सरकार तथा कृषि विभाग बीमारी पर रोक लगाने में सख्त कदम नहीं उठा रहा है।
बारिश रुकने के बाद स्प्रे : कृषि अधिकारी
कृषि अधिकारी पवन शर्मा ने बताया कि करनाल में 8500 एकड़ गेहूं की फसल में पीला रतुआ की चपेट में है। इंद्री क्षेत्र की 3400 एकड़ फसल भी प्रभावित है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर चंडीगढ़ भेज दी गई है। पीला रतुआ रोकने के लिए स्प्रे करवाया जा रहा है, परंतु बारिश के कारण काम रुका हुआ है। हवा चलने के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है। बारिश रुकने के बाद स्प्रे का कार्य शुरू होगा। जिस भी किसान को इसके लक्षण दिखाई दें, वे तुरंत कृर्षि विभाग के कार्यालय पर सूचना दे सकता है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।