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Karnal News: आयुष्मान में इलाज के लिए मरीजों का बढ़ेगा इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Jun 2025 03:02 AM IST
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Patients will have to wait longer for treatment under Ayushman
बढ़ी परेशानी : प्राइवेट में तीन तरह के ऑपरेशन बंद होने के बाद नागरिक अस्पताल पर बढ़ेगा बोझ, मरीज की जेब होगी ढीली
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- 20 निजी अस्पतालों में हाेते थे रोजाना 30 ऑपरेशन
- 08 ऑपरेशन नागरिक अस्पताल में सप्ताह में हो पाते थे
संवाद न्यूज एजेंसी



करनाल। आयुष्मान भारत चिरायु योजना के तहत निजी अस्पतालों में ऑपरेशन बंद होने का सीधा असर अब सरकारी अस्पतालों पर पड़ेगा। नागरिक अस्पताल में पित्त की थैली और मोतिया बिंद जैसी जरूरी सर्जरी के लिए वेटिंग बढ़कर सात सप्ताह तक पहुंच जाएगी। पहले जहां औसतन दो सप्ताह में ऑपरेशन हो जाता था, अब उन्हें डेढ़ महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है। जिन लोगों ने निजी अस्पताल में पहले से ऑपरेशन की तारीख ली है उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
जिले में 20 निजी अस्पताल हैं, जिनमें हर अस्पताल में रोजाना एक सर्जरी होती थी। यानी औसतन 30 के करीब ऑपरेशन प्रतिदिन थे। अब जब आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का निजी अस्पतालों में इलाज बंद हुआ है, तो यह पूरा बोझ नागरिक अस्पतालों पर आ जाएगा। जिन मरीजों ने निजी अस्पतालों में पहले से ऑपरेशन की तारीख ले रखी थी अब वे भी सिविल अस्पताल का ही रुख करेंगे। इस कारण नागरिक अस्पतालों में दोगुना बोझ पड़ेगा और गंभीर मरीजों को भी इंतजार करना पड़ेगा।
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इसके अलावा निजी अस्पतालों में एक साधारण सर्जरी जैसे पित्त की थैली या मोतिया बिंद का ऑपरेशन कराने पर मरीज को 30 या 40 हजार रुपये या उससे ज्यादा खर्च करना पड़ता है। आयुष्मान योजना में यह इलाज निशुल्क होता था, लेकिन अब जब निजी अस्पताल इससे बाहर हो गए हैं, तो मरीजों के पास सरकारी अस्पताल ही एकमात्र विकल्प बचा है। वहीं, जिन लोगों को इमरजेंसी है और नागरिक अस्पताल में जल्दी नंबर नहीं मिलेगा तो मजबूरन निजी अस्पताल में हजारों रुपये खर्च कर ऑपरेशन कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
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सर्जन की कमी और सीमित ऑपरेशन

नागरिक अस्पताल में अभी सिर्फ एक-एक सर्जन पित्त की थैली और आंखों के ऑपरेशन कर रहे हैं। अस्पताल में सप्ताह में सिर्फ दो दिन सर्जरी होती है और एक दिन में केवल चार मरीजों की सर्जरी हो पाती है। यही वजह है कि वेटिंग तेजी से बढ़ने की संभावना है।




निजी अस्पताल में ऑपरेशन बंद होने से नागरिक अस्पताल पर दबाव पड़ेगा। जहां सप्ताह में आठ ऑपरेशन होते थे अब हो सकता है 20 ऑपरेशन वेटिंग में आ जाएं। मरीजों की संख्या तो बढ़ेगी ही। अगर लोड बढ़ता है तो सर्जन की नियुक्ति करना जरूरी होगा। हम इस स्थिति को गंभीरता से ले रहे हैं और अतिरिक्त सर्जन उपलब्ध कराने पर विचार कर रहे हैं। क्योंकि सर्जन एक-एक होने से उनके ऊपर अधिक दबाव पड़ सकता है।

- डॉ. दीपक गोयल, जनसंपर्क अधिकारी, नागरिक अस्पताल
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