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नौकरी में पता चली शिक्षा की अहमियत, रिटायरमेंट के बाद हुए ‘ग्रेजुएट’

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Apr 2022 02:30 AM IST
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गगन तलवार
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करनाल। वक्त और हालात के आड़े आने से भले ही पहले उच्च शिक्षा ग्रहण न कर पाए, लेकिन नौकरी मिलने के बाद कई लोगों को शिक्षा की अहमियत पता चलती है। इग्नू के दीक्षांत समारोह में ऐसी ही कई शख्सियतें मिली, जिन्होंने नौकरी के दौरान उच्च शिक्षा ग्रहण की है। दो शिक्षार्थी ऐसे भी मिले जो सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद ग्रेजुएट हुए हैं।
बिजली बोर्ड के ड्राइवर के पद से रिटायर्ड हुए 78 वर्षीय आरके चौहान और जेल हवलदार के पद से रिटायर्ड कैथल के करतार सिंह को बीए की उपाधि मिली है। इस उम्र में आकर भी दोनों ने पढ़ाई खत्म नहीं की है, बल्कि अब एमए हिंदी में दाखिला ले लिया है। दोनों का पीएचडी करने का सपना है। इसके अलावा इग्नू से पुलिस, रोडवेज और शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी उच्च शिक्षा ले रहे हैं। पानीपत की एक महिला अपने बेटे को विदेश भेजने के बाद पढ़ाई करके अस्पताल में डायटिशियन बनी हैं। ऐसी ही कुछ लोगों की कहानी पढ़ें अमर उजाला की स्पेशल रिपोर्ट में-
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1. अखबार में फोटो छपी देख पैदा हुई पढ़ने की ललक
सेक्टर-13 अर्बन एस्टेट निवासी 78 वर्षीय आरके चौहान 2009 में बिजली बोर्ड से चालक के पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने बताया कि 2016 में 80 साल के जागीर सिंह द्वारा स्नातक की पढ़ाई पूरी करने पर अखबार में फोटो छपा था। उनसे प्रभावित होकर उन्होंने पढ़ाई करने की ठानी और अगले वर्ष इग्नू में दाखिला ले लिया। जिस महकमे से वे चालक के पद से रिटायर्ड हैं, उसी में बेटा विक्रम चौहान जेई के पद पर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए पढ़ाई जरूरी है।
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2. पोती की पढ़ते थे किताबें, प्रोफेसर बेटे ने दिलाया दाखिला
कैथल की राधा स्वामी कॉलोनी निवासी 64 वर्षीय करतार सिंह 31 साल की सेवाओं के बाद 2016 में जेल हवलदार के पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी से बीए की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ कॉलेज में कार्यरत प्राध्यापक बेटे राजपाल ने पढ़ने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि पोती उनके पास बैठकर जब पढ़ती थी, तो वे भी किताबें पढ़ने में रुचि लेते थे। पुलिस विभाग से वे रिटायर्ड हैं, अब चंडीगढ़ पुलिस में ही उनका छोटा बेटा सतपाल कार्यरत है। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद खाली समय भी पढ़ाई में कट गया और ग्रेजुएट होने का सपना भी पूरा हुआ।
यात्रियों की बात समझने के लिए कंडक्टर ने ली चौथी डिग्री
कैथल के उजाना निवासी राजेश कुमार गौरसी ने चौथी डिग्री प्राप्त की। वह दस साल से रोडवेज में कंडक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने एमए इतिहास, एमए समाजशास्त्र, पीजीडीआरडी और डीईसीई में डिप्लोमा किया। प्रदेश का इतिहास और यात्रियों की बात समझ सकें, इसलिए आगे पढ़ाई की।
इतिहास जानने के लिए पुलिस कर्मी ने की पढ़ाई
कैथल के सीवन निवासी सत्यदेव आर्य ने एमए इतिहास की डिग्री प्राप्त की। वे पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि कई जगह ड्यूटी लग जाती है, लेकिन जगह का इतिहास नहीं पता होता, इसलिए इतिहास जानने के लिए एमए की पढ़ाई की।
शिक्षक बनने का सपना पूरा करेंगे विभाग के क्लर्क
कैथल के सीवन निवासी भारत भूषण शिक्षा विभाग में क्लर्क हैं। उनका सपना शिक्षक बनने का है। इसलिए ड्यूटी के साथ-साथ उन्होंने एमकॉम, एमए हिंदी, बीएड और डीईसीई में डिप्लोमा किया है। विभाग में नौकरी के बाद उन्हें शिक्षक की एहमियत समझ में आई।

बेटे को विदेश भेजकर मां बनी डायटीशियन
पानीपत की रेणू गुप्ता एक निजी अस्पताल में डायटीशियन हैं। उनका बेटा कनाडा में एमबीए कर रहा है। डायटीशियन बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने एमएसई डीएफएसएम न्यूट्रिशियन में पढ़ाई की। दूसरा बेटा और बेटी 12वीं में पढ़ रहे हैं।
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