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Haryana: अनाज मंडियों में पहुंचने लगा धान, हड़ताल के एलान से चिंतित किसान, 1509 के गिरे दाम
Mon, 12 Sep 2022 02:25 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, संवाद, करनाल/कैथल (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, संवाद, करनाल/कैथल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 12 Sep 2022 02:25 AM IST
सार
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग उठ रही है। फसल खरीद में देरी को किसानों के लिए अभिशाप बताया गया है। इससे किसानों को नुकसान होता है।
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कैथल की अनाज मंडी में पहुंचा धान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन की ओर से 19 सितंबर से प्रदेशभर की अनाज मंडियों में हड़ताल के एलान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि खेतों में धान की फसल तैयार हो चुकी है। नए सीजन का पीआर धान अनाज मंडियों में पहुंचने भी लगा है।
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धान का सरकारी भाव भले ही 2060 से 2040 रुपये हो, लेकिन अभी मंडियों में ये धान 1900 से 1950 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। आलम ये है कि किसान संगठनों के साथ भाजपा के पदाधिकारी भी सरकार को पत्र लिखकर धान की खरीद को 15 सितंबर से शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
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धान की 1509 जैसी कुछ प्रजातियां तो 60 दिन में ही पक जाती हैं। किसान भी पीआर 113, पीआर 126, पीआर 109, एचआरके 120 आदि जल्दी पकने वाली प्रजातियों को ही अधिक लगाते हैं। वहीं अन्य प्रजातियों का धान 90 दिन में पककर तैयार हो जाता है। किसान संगठनों का तर्क है कि सरकार स्वयं कहती है कि धान लगाने की तिथि 15 जून है।
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इस हिसाब से 90 दिन 15 सितंबर को पूरे हो जाते हैं, ऐसे में सरकार को धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से शुरू कर देना चाहिए। हालांकि पिछले वर्षों में देखा गया है कि सरकारी खरीद एक अक्तूबर को शुरू होती है यानी 15 दिन विलंब से।
विदित हो कि ज्यादातर आढ़ती राइस मिलर्स हैं। ऐसे में वे चाहते हैं कि धान की खरीद एक अक्तूबर या उसके बाद शुरू हो, ताकि वह किसानों की मजबूरी का फायदा उठा सकें। कारण कि किसानों के पास धान भंडारण के संसाधन नहीं है और फसल तैयार होने के बाद मंडी में लाना उनकी मजबूरी है। ऐसे में यदि सरकारी खरीद नहीं होती तो आढ़ती और राइस मिलर्स मनमाने रेट पर उसे खरीद लेते हैं और बड़ा मुनाफा कमाते हैं। आढ़तियों की ओर से 19 सितंबर से हड़ताल का एलान भी इसी प्लानिंग की हिस्सा माना जा सकता है। अक्तूबर के प्रथम सप्ताह से खरीद शुरू हो जाती है, लेकिन तब तक किसानों का 40 प्रतिशत से अधिक धान बिक चुका होता है।
आढ़तियों के हड़ताल के एलान से किसान चिंतित हैं, क्योंकि पीआर धान मंडियों में पहुंचने लगा है, एक सप्ताह बाद मंडियों में बहुतायत में फसल पहुंचने लगेगी, लेकिन इसी समय खरीद बंद होगी तो किसानों को औने पौने दामों पर धान बेचना पड़ेगा। सरकार को आढ़तियों की उचित मांगों को मानकर हड़ताल को खत्म कराना चाहिए, साथ ही 15 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करानी चाहिए। -जगदीप औलख, किसान नेता
मुख्यमंत्री को आज ही इसके लिए पत्र लिखा है कि किसान अब जल्द पकने वाली प्रजातियों को बोते हैं, तो सरकार को भी अपनी नीति में संशोधन करते हुए धान की सरकारी खरीद को 15 सितंबर से शुरू कराना चाहिए। धान मंडियों में आने और सरकारी धान की खरीद शुरू होने में जो 15 से 20 दिन का अंतर है, यही किसानों के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है। इसे खत्म किया जाना चाहिए। - ईलम सिंह, भाजपा नेता एवं पूर्व चेयरमैन अनाज मंडी कुंजपुरा
1509 किस्म की आवक शुरू होने के बाद ही गिरे दाम, 3400 रुपये बिका
कैथल। नई अनाज मंडी में तीन दिन पहले ही 1509 किस्म के धान की आवक शुरू हुई। इसके बाद अनाज मंडी में 1509 किस्म के धान की आवक लगातार बढ़ रही है। पहले दिन तो धान का दाम 3700 से 3800 रुपये था। इसके बाद यह 3500 रुपये तक प्रति क्विंटल तक बिका। अब रविवार को अचानक दाम में और गिरावट आई। इस दौरान 3400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। दाम कम होने से किसान हताश है।
अनाज मंडी में धान लेकर पहुंचे किसान लक्खा राम और राजकुमार ने बताया कि तीन दिन पहले ही मंडियों में धान की आवक शुरू हुई थी, दाम भी अच्छे मिले। किसानों ने कहा कि इस बार गेहूं के सीजन में पहले ही किसान काफी नुकसान उठा चुके हैं, इसकी भरपाई धान के सीजन में होने की उम्मीद है।
यदि अब भी दाम कम मिलते रहे तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, नई अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल गर्ग, धर्मपाल कठवाड़ ने बताया कि मंडी में 1509 धान की आवक हो रही है। रविवार को 3400 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिले हैं।