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Karnal News: नहीं बिक रहा धान, रखवाली को विवश किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2024 07:32 AM IST
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Paddy not being sold, farmers forced to guard it
- किसान बोले, मंडी में लेकर आए हैं अनाज मगर खरीद एजेंसी के कर्मचारी पहुंच रहे न राइस मिलर
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। धान की सरकारी खरीद शुरू हुए छह दिन बीत चुके हैं लेकिन करनाल सहित जिले की अधिकतर अनाज मंडियों में खरीद शुरू नहीं हो पाई है। कुछ मंडियों में ही 29290 क्विंटल धान की खरीद की गई है। किसान कई दिनों से धान लेकर मंडियों में पड़े हैं, लेकिन न किसी खरीद एजेंसी के कर्मचारी पहुंच रहे हैं और न ही राइस मिलर। इसके पीछे खेल धान में नमी का है। भले ही राइस मिलरों ने अपनी मांगों को ढाल बनाया है लेकिन वास्तविकता ये है कि राइस मिलर इस समय अधिक नमी वाला धान खरीदना नहीं चाहते हैं।
दरअसल राइस मिलर ये बखूबी जानते हैं कि खरीद एजेंसियों के पास खरीदा गया धान रखने की व्यवस्था नहीं है। धान को पहुंचाने के भी संसाधन नहीं हैं। इसका फायदा उठाते हुए राइस मिलर्स एसोसिएशन ने कई मांगें रखी हैं। राइस मिलर्स का कहना है कि सरकार एक क्विंटल धान में 67 किलो चावल मांगती है लेकिन इतना चावल धान में निकलता ही नहीं है। धान हो या गेहूं जब भी सरकारी खरीद शुरू होती है, तो शुरुआती दिनों में आढ़ती हड़ताल करते हैं या फिर राइस मिलर। ये दोनों नहीं करते तो श्रमिक हड़ताल पर चले जाते हैं। ऐसा कई सालों से देखा जा रहा है।
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राइस मिलर्स एसोसिएशन करनाल के प्रधान सौरभ गुप्ता ने बताया कि सरकार ने उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया है, इसलिए अभी राइस मिलर पीआर (मोटा धान) नहीं खरीदने के निर्णय पर कायम हैं। फिलहाल अनाज मंडियों में किसान धान लेकर कई दिनों से पहुंच रहे हैं, उनका धान नहीं खरीदा जा रहा है। अनाज मंडियों में बड़ी संख्या में बेसहारा पशु हैं, जो धान खाते हैं, इसलिए किसान रातभर धान की रखवाली करते हैं। उनके सामने अन्य कई तरह की समस्याएं आ रही हैं।
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रातभर जागकर करते हैं रखवाली
किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि चार दिन हो गए हैं, वह मंडी में ही हैं। धान की खरीद न होने के कारण अपने घर नहीं जाते क्योंकि जब तक धान नहीं बिक जाती तब घर का खर्च कैसे चलेगा और अपने बच्चों के स्कूल की फीस कैसे भरेंगे। उन्होंने बताया कि रात के समय में खुद जागकर धान की रखवाली करनी पड़ती है। बेसहारा पशु रात के समय आकर हमारा धान खाते हैं।



इस बार राइस मिलर हड़ताल पर
किसान कर्नल सिंह ने बताया कि अनाज मंडी में आते हुए उनको काफी समय हो गया है और जो धान की खरीद इस बार इतनी धीरे हो रही है यह पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने पिछले साल का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले साल भी आढ़ती हड़ताल पर गए थे लेकिन उसके एक घंटे बाद धान की खरीद शुरू हो गई थी। उन्होंने बताया कि अगर धान की खरीद शुरू हो जाती है तो उनको फसल लगाने में जितनी लागत लगी है वो वापस आ जाएगी।



फोटो 53

बारिश से खराब हो सकता है धान
किसान राजवीर ने बताया कि उन्हें नई अनाज मंडी में आते हुए लगातार पांच दिन हो गए हैं लेकिन अब तक उनकी धान खरीदने कोई नहीं आया। उन्होंने बताया कि न तो धान की खरीद हुई और न ही कोई अधिकारी उनसे मिलने आया। जब तक धान की बिक्री नहीं होती तब तक वो उस फसल को नहीं काट सकते। बेमौसम की बरसात से मंडी में रखी धान खराब हो जाती है।





मोटा धान कोई खरीदने को नहीं तैयार
किसान कुलवंत सिंह ने बताया कि जो मोटी जीरी है जो सरकार लेती है उसकी खरीद का अभी तक कुछ नहीं पता की कब होगी और जो बारीक जीरी है उसकी बिक्री तो हो रही है लेकिन वो भी कम हो रही है। सरकार द्वारा दी गई तारीख के बाद भी अभी तक बिक्री नहीं हुई। मंडी में धान लाने का कोई फायदा नहीं है। रोज आते हैं और बैठकर चले जाते हैं।





कैसे होगा घर का गुजारा
किसान किफायत ने बताया कि रोज मंडी में आकर अपना नुकसान करवा रहे हैं। ट्रैक्टर में धान लेकर आते हैं और खाली हाथ जाते हैं। धान की बिक्री न होने से घर का गुजारा नहीं हो पाता। फसल में डालने वाली दवाइयों के रेट इतने बढ़ गए हैं कि जो लागत फसल में दवाई डालने में लगती है मंडी में आकर वो लागत भी पूरी नहीं हो पाती।






बच्चों की फीस भरना मुश्किल
किसान प्रमोद ने बताया कि धान की बिक्री न होने के कारण बच्चों के स्कूल की फीस भरना मुश्किल हो गया है। सरकार द्वारा निर्धारित रेट पर हम अपना धान बेचने को तैयार हैं लेकिन कोई उसे खरीद नहीं रहा। उन्होंने बताया कि सरकारी खरीद इस बार बहुत धीरे हो रही है।
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