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खतरनाक स्तर पर पहुंची ओजोन गैस, सुबह की सैर से बचने की सलाह
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। वातावरण में ओजोन गैस की सांद्रता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। करनाल में शनिवार शाम इस गैस की सांद्रता 39 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब आंकी गई। जबकि इस गैस की सांद्रता 3 से 4 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। रसायन शास्त्री एवं प्राचार्य डॉ. राकेश भारद्वाज ने लोगों से फिलहाल सुबह की सैर से बचने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि अस्थमा ग्रस्त लोगों के लिए सुबह के बजाय दोपहर बाद साढ़े तीन से पांच बजे के बीच सैर करने का समय उपयुक्त रहेगा।
उन्होंने बताया कि ओजोन गैस के निर्माण की प्रक्रिया में शामिल घटकों को तोड़ना होगा। प्रदूषण के तमाम बिंदुओं पर लगाम लगानी जरूरी है। ऐसी स्थिति में सावधानी बरतें और घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें। शाम को घर पहुंचने पर गर्म पानी की भांप ले लेनी चाहिए।
सांस लेने में होगी कठिनाई
ओजोन गैस सांस लेने के साथ फेफड़ों में चली जाती है और फेफड़ों में ऑक्सीजन के प्रवाह को अवरुद्ध कर देती है। वहीं फेफड़ों की क्षमता को भी कम कर देती है। ऑक्सीजन की मात्रा सीमित रहने से सांस लेने में कठिनाई महसूस होगी और हृदयघात की संभावना बन जाती है। सांस के रोगियों के स्वास्थ्य पर इसका खतरनाक असर पड़ सकता है।
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उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला विषैला धुआं बना परेशानी
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि उद्योगों और वाहनों के विषैले धुएं और दूषित धूल कणों से वातावरण में ऑक्साइट ऑफ नाइट्रोजन तथा वोलेटाइल आर्गेनिक कंपाउंड (जल्द वाष्पीकरण वाले रसायन) का उत्सर्जन होता है। इस प्रक्रिया के कारण वातावरण में स्मॉग बनती है। स्मॉग और सूर्य की किरणें आपस में प्रतिक्रिया करती हैं तो ओजोन गैस का निर्माण होता है। पृथ्वी की सतह से ढाई मीटर ऊपर तक इसकी सांद्रता पाई गई है।
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करनाल। वातावरण में ओजोन गैस की सांद्रता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। करनाल में शनिवार शाम इस गैस की सांद्रता 39 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब आंकी गई। जबकि इस गैस की सांद्रता 3 से 4 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। रसायन शास्त्री एवं प्राचार्य डॉ. राकेश भारद्वाज ने लोगों से फिलहाल सुबह की सैर से बचने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि अस्थमा ग्रस्त लोगों के लिए सुबह के बजाय दोपहर बाद साढ़े तीन से पांच बजे के बीच सैर करने का समय उपयुक्त रहेगा।
उन्होंने बताया कि ओजोन गैस के निर्माण की प्रक्रिया में शामिल घटकों को तोड़ना होगा। प्रदूषण के तमाम बिंदुओं पर लगाम लगानी जरूरी है। ऐसी स्थिति में सावधानी बरतें और घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें। शाम को घर पहुंचने पर गर्म पानी की भांप ले लेनी चाहिए।
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सांस लेने में होगी कठिनाई
ओजोन गैस सांस लेने के साथ फेफड़ों में चली जाती है और फेफड़ों में ऑक्सीजन के प्रवाह को अवरुद्ध कर देती है। वहीं फेफड़ों की क्षमता को भी कम कर देती है। ऑक्सीजन की मात्रा सीमित रहने से सांस लेने में कठिनाई महसूस होगी और हृदयघात की संभावना बन जाती है। सांस के रोगियों के स्वास्थ्य पर इसका खतरनाक असर पड़ सकता है।
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उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला विषैला धुआं बना परेशानी
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि उद्योगों और वाहनों के विषैले धुएं और दूषित धूल कणों से वातावरण में ऑक्साइट ऑफ नाइट्रोजन तथा वोलेटाइल आर्गेनिक कंपाउंड (जल्द वाष्पीकरण वाले रसायन) का उत्सर्जन होता है। इस प्रक्रिया के कारण वातावरण में स्मॉग बनती है। स्मॉग और सूर्य की किरणें आपस में प्रतिक्रिया करती हैं तो ओजोन गैस का निर्माण होता है। पृथ्वी की सतह से ढाई मीटर ऊपर तक इसकी सांद्रता पाई गई है।