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Karnal News: बाधाओं को पार कर वकील बनने का सपना किया पूरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कोरोना महामारी के दौरान जब देश संकट से जूझ रहा था तभी युवाओं को भी कॅरिअर की चिंता सता रही थी। उन्हें सपनों के साथ समझौता करना पड़ा था। अंजू वकालत की पढ़ाई दिल्ली से कर रही थीं लेकिन कोरोना के कारण इसे बीच में छोड़ना पड़ा मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष किया। ऐसे ही कई युवतियों ने वकालत की पढ़ाई करने के लिए मेहनत की। उन्हें समाज के कुछ लोगों ने हतोत्साहित करने का प्रयास किया फिर भी वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती गई।
कोरोना काल में छूट गई थी पढ़ाई
अंजू ने बताया कि वह दो साल से वकालत कर रही हैं। बचपन से वकील बनने का सपना था जिसमें कानून के क्षेत्र में काफी दिलचस्पी थी। 10वीं कक्षा से लक्ष्य बना लिया था कि वकालत करनी है। कोविड के समय परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई जिसके बाद पढ़ाई के लिए दिल्ली वापस नहीं जा सकी। इसके बाद किसी तरह शिक्षा पूरी कर वकालत का प्रशिक्षण लिया।
समाज की सोच को साबित किया गलत
सोनिया ने बताया कि वह बचपन से वकील बनना चाहती थी जिसके लिए उसने पूरी मेहनत की। परिवार की ओर से उन्हें पूरा साथ मिला लेकिन समाज में कई बार सुनने को मिला कि महिला को वकील बन कर कुछ हासिल नहीं होता। लेकिन समाज की इस सोच को बदलने के लिए उन्होंने वकालत की पढ़ाई अच्छे अंकों से पास की और वर्तमान में डेढ़ साल से प्रशिक्षण ले रही हूं। उन्होंने बताया कि लड़किया भी वकील बनकर लोगों को न्याय दिला सकती हैं।
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मां के सपने को किया पूरा
तमन्ना शर्मा ने बताया कि उनकी माता का सपना था कि वह वकील बने। उनके वकील बनने का मकसद था कि उन महिलाओं के हक के लिए लड़ना जो अपने लिए बोल नहीं पातीं। आज भी महिला वकीलों को हर दिन साबित करना पड़ता है कि वह भी पुरुष वकीलों के मुकाबले बेहतर तरीके से केस लड़ सकती हैं और जीत सकती हैं। इसलिए एक महिला वकील बन हर छोटी सोच को बदलना है कि लड़कियां भी कानून के क्षेत्र में आगे जा सकती हैं।
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करनाल। कोरोना महामारी के दौरान जब देश संकट से जूझ रहा था तभी युवाओं को भी कॅरिअर की चिंता सता रही थी। उन्हें सपनों के साथ समझौता करना पड़ा था। अंजू वकालत की पढ़ाई दिल्ली से कर रही थीं लेकिन कोरोना के कारण इसे बीच में छोड़ना पड़ा मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष किया। ऐसे ही कई युवतियों ने वकालत की पढ़ाई करने के लिए मेहनत की। उन्हें समाज के कुछ लोगों ने हतोत्साहित करने का प्रयास किया फिर भी वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती गई।
कोरोना काल में छूट गई थी पढ़ाई
अंजू ने बताया कि वह दो साल से वकालत कर रही हैं। बचपन से वकील बनने का सपना था जिसमें कानून के क्षेत्र में काफी दिलचस्पी थी। 10वीं कक्षा से लक्ष्य बना लिया था कि वकालत करनी है। कोविड के समय परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई जिसके बाद पढ़ाई के लिए दिल्ली वापस नहीं जा सकी। इसके बाद किसी तरह शिक्षा पूरी कर वकालत का प्रशिक्षण लिया।
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समाज की सोच को साबित किया गलत
सोनिया ने बताया कि वह बचपन से वकील बनना चाहती थी जिसके लिए उसने पूरी मेहनत की। परिवार की ओर से उन्हें पूरा साथ मिला लेकिन समाज में कई बार सुनने को मिला कि महिला को वकील बन कर कुछ हासिल नहीं होता। लेकिन समाज की इस सोच को बदलने के लिए उन्होंने वकालत की पढ़ाई अच्छे अंकों से पास की और वर्तमान में डेढ़ साल से प्रशिक्षण ले रही हूं। उन्होंने बताया कि लड़किया भी वकील बनकर लोगों को न्याय दिला सकती हैं।
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मां के सपने को किया पूरा
तमन्ना शर्मा ने बताया कि उनकी माता का सपना था कि वह वकील बने। उनके वकील बनने का मकसद था कि उन महिलाओं के हक के लिए लड़ना जो अपने लिए बोल नहीं पातीं। आज भी महिला वकीलों को हर दिन साबित करना पड़ता है कि वह भी पुरुष वकीलों के मुकाबले बेहतर तरीके से केस लड़ सकती हैं और जीत सकती हैं। इसलिए एक महिला वकील बन हर छोटी सोच को बदलना है कि लड़कियां भी कानून के क्षेत्र में आगे जा सकती हैं।