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इंटरनेट पर अधिक समय बिताने से बच्चों का हो रहा ऑनलाइन उत्पीड़न
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इंटरनेट पर अधिक समय बिताने के कारण बच्चों का ऑनलाइन उत्पीड़न होने लगा है। विशेष रूप से ऑनलाइन शोषण, अश्लील संदेशों का आदान-प्रदान, पोर्नोग्राफी के संपर्क में आना और साइबर धमकी का भी बच्चे सामना कर रहे हैं। यह कहना है राजकीय कन्या महाविद्यालय चीका के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. रवि शंकर का। वे बुधवार को राजकीय कन्या महाविद्यालय के कानूनी साक्षरता प्रकोष्ठ की ओर से चल रही कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे थे। उन्होंने ‘सोशल मीडिया : समावेश, प्रतिनिधित्व एवं नारी सुरक्षा’ विषय पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर साइबर अपराध में 600 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। भारतीय परिप्रेक्ष्य में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के मामलों में लगभग 400 फीसदी बढ़त हुई है। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत मामले यौन कृत्यों से जुड़े थे।
उन्होंने कहा कि गत वर्ष बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों के कुल 842 मामले सामने आए, जिनमें से अधिकतर मामले बच्चों को यौन कृत्यों में चित्रित करने वाली सामग्री को प्रकाशित करने या प्रसारित करने से संबंधित रहे। इन हालात में नारी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश इन मामलों में प्रथम स्थान पर है जबकि कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल दूसरे और तीसरे स्थान पर है। बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाने के लिए जरूरत है कि माता-पिता और शिक्षण संस्थान मिलकर उन्हें जागरूक करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. सरिता कुमार ने की। प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. शिवाली, डॉ. विकास अत्री, डॉ. अनीता जून, डॉ. ममता, निशा, दुर्गेश, भानुप्रिया और मोनिका मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर साइबर अपराध में 600 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। भारतीय परिप्रेक्ष्य में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के मामलों में लगभग 400 फीसदी बढ़त हुई है। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत मामले यौन कृत्यों से जुड़े थे।
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उन्होंने कहा कि गत वर्ष बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों के कुल 842 मामले सामने आए, जिनमें से अधिकतर मामले बच्चों को यौन कृत्यों में चित्रित करने वाली सामग्री को प्रकाशित करने या प्रसारित करने से संबंधित रहे। इन हालात में नारी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश इन मामलों में प्रथम स्थान पर है जबकि कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल दूसरे और तीसरे स्थान पर है। बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाने के लिए जरूरत है कि माता-पिता और शिक्षण संस्थान मिलकर उन्हें जागरूक करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. सरिता कुमार ने की। प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. शिवाली, डॉ. विकास अत्री, डॉ. अनीता जून, डॉ. ममता, निशा, दुर्गेश, भानुप्रिया और मोनिका मौजूद रहे।
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