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Karnal News: गलत डाइट से हो रही ओमेगा-3 की कमी, युवाओं में बढ़ रहा स्ट्रेस और थकान
Mon, 12 Jan 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:31 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आज के युवा इतने व्यस्त हैं कि सही भोजन और हेल्दी आदतों पर ध्यान देना भूल गए हैं। जंक फूड की आदत ने उनके स्वास्थ्य पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस जीवनशैली से युवाओं में ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी बढ़ रही है, जो न केवल मस्तिष्क और याददाश्त पर असर डाल रही है, बल्कि स्ट्रेस, थकान और मानसिक असंतुलन की समस्याओं को भी बढ़ा रही है।
जिला नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी है। यह फैट मस्तिष्क की कोशिकाओं और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन में मदद करता है। जब इसकी कमी होती है, तो युवा पढ़ाई और काम पर ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मनोरोग ओपीडी में रोजाना याददाश्त कमजोर होने और तनाव के करीब 50 मरीज आ रहे हैं जिनसे बात करने पर पता चलजा है कि वे हल्दी डाइट नहीं ले रहे हैं। रोजाना तला भुना भोजन, बिगड़ती लाइफस्टाइल उन लोगों का हिस्सा बन चुका है। इस कारण उनमें मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण स्ट्रेस और एंग्जायटी की समस्या भी आम हो गई है।
ओमेगा-3 की कमी से गिर जाता है नींद और ऊर्जा स्तर
डॉ. सौभाग्य के अनुसार, ओमेगा-3 की कमी से सिर्फ याददाश्त ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि नींद और ऊर्जा स्तर भी गिर जाता है। युवा जल्दी थकने लगते हैं और छोटी-छोटी चीजों पर गुस्सा या चिंता करने लगते हैं। आहार विशेषज्ञ वंदना ने बताया कि हम देखते हैं कि कई युवा और बच्चों में काम और पढ़ाई के बीच थकावट महसूस करते हैं और यह थकान सीधे उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ओमेगा-3 इस स्थिति में मददगार साबित हो सकता है।
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डाइट में हेल्दी फैट शामिल करना जरूरी
आहार विशेषज्ञ वंदना के अनुसार, युवाओं को अपनी डाइट में ओमेगा-3 युक्त चीजें जैसे सैल्मन, मैकेरल, अलसी के बीज, अखरोट और सोयाबीन शामिल करनी चाहिए। इसके अलावा, तली-भुनी चीजों, जंक फूड और पैकेज्ड स्नैक्स से परहेज करना जरूरी है। संतुलित आहार के साथ पर्याप्त नींद और हल्का व्यायाम भी जरूरी है। नागरिक अस्पताल से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर के अनुसाार, लगातार ओमेगा-3 की कमी होने पर दिल की बीमारियों, ब्लड प्रेशर, मोटापा और मानसिक असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय रहते अपनी जीवनशैली सुधारना आवश्यक है। उनका कहना है कि हेल्दी फैट और संतुलित भोजन अपनाकर युवाओं में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।
केवल सप्लीमेंट पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। खाने में प्राकृतिक स्रोतों से ओमेगा-3 लेना ही सबसे असरदार तरीका है। साथ ही, स्क्रीन टाइम कम करना, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है।
- डॉ. कुलबीर, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल
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करनाल। आज के युवा इतने व्यस्त हैं कि सही भोजन और हेल्दी आदतों पर ध्यान देना भूल गए हैं। जंक फूड की आदत ने उनके स्वास्थ्य पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस जीवनशैली से युवाओं में ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी बढ़ रही है, जो न केवल मस्तिष्क और याददाश्त पर असर डाल रही है, बल्कि स्ट्रेस, थकान और मानसिक असंतुलन की समस्याओं को भी बढ़ा रही है।
जिला नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी है। यह फैट मस्तिष्क की कोशिकाओं और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन में मदद करता है। जब इसकी कमी होती है, तो युवा पढ़ाई और काम पर ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मनोरोग ओपीडी में रोजाना याददाश्त कमजोर होने और तनाव के करीब 50 मरीज आ रहे हैं जिनसे बात करने पर पता चलजा है कि वे हल्दी डाइट नहीं ले रहे हैं। रोजाना तला भुना भोजन, बिगड़ती लाइफस्टाइल उन लोगों का हिस्सा बन चुका है। इस कारण उनमें मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण स्ट्रेस और एंग्जायटी की समस्या भी आम हो गई है।
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ओमेगा-3 की कमी से गिर जाता है नींद और ऊर्जा स्तर
डॉ. सौभाग्य के अनुसार, ओमेगा-3 की कमी से सिर्फ याददाश्त ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि नींद और ऊर्जा स्तर भी गिर जाता है। युवा जल्दी थकने लगते हैं और छोटी-छोटी चीजों पर गुस्सा या चिंता करने लगते हैं। आहार विशेषज्ञ वंदना ने बताया कि हम देखते हैं कि कई युवा और बच्चों में काम और पढ़ाई के बीच थकावट महसूस करते हैं और यह थकान सीधे उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ओमेगा-3 इस स्थिति में मददगार साबित हो सकता है।
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डाइट में हेल्दी फैट शामिल करना जरूरी
आहार विशेषज्ञ वंदना के अनुसार, युवाओं को अपनी डाइट में ओमेगा-3 युक्त चीजें जैसे सैल्मन, मैकेरल, अलसी के बीज, अखरोट और सोयाबीन शामिल करनी चाहिए। इसके अलावा, तली-भुनी चीजों, जंक फूड और पैकेज्ड स्नैक्स से परहेज करना जरूरी है। संतुलित आहार के साथ पर्याप्त नींद और हल्का व्यायाम भी जरूरी है। नागरिक अस्पताल से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर के अनुसाार, लगातार ओमेगा-3 की कमी होने पर दिल की बीमारियों, ब्लड प्रेशर, मोटापा और मानसिक असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय रहते अपनी जीवनशैली सुधारना आवश्यक है। उनका कहना है कि हेल्दी फैट और संतुलित भोजन अपनाकर युवाओं में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।
केवल सप्लीमेंट पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। खाने में प्राकृतिक स्रोतों से ओमेगा-3 लेना ही सबसे असरदार तरीका है। साथ ही, स्क्रीन टाइम कम करना, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है।
- डॉ. कुलबीर, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल