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Karnal News: डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, घाटों पर दिखी छठ की छटा
Tue, 28 Oct 2025 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 28 Oct 2025 02:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। छठ पर्व के तीसरे दिन सोमवार को श्रद्धा और आस्था का अनोखा संगम दिखा। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर संध्या अर्घ्य की रस्म निभाई। शहर के पश्चिमी यमुना नहर घाट और उत्तम नगर घाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे। जैसे-जैसे सूर्य अस्त होने लगा, वैसे-वैसे पूरा माहौल छठ मईया के जयकारों से गूंज उठा। सूर्य को अर्घ्य दिया गया।
सुबह से ही महिलाओं ने पूजा की तैयारी शुरू कर दी थी। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल की खीर, ईख, केला, नारियल और फल सजाकर रखा गया। शाम को महिलाएं तैयार होकर घाट पर पहुंची और स्नान किया। महिलाओं ने पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। पानी में घंटों खड़े रहकर उन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की। बच्चों और बुजुर्गों के चेहरे पर भक्ति और उल्लास झलक रहा था। घाट पर बच्चों के लिए झूले लगाए गए, वहीं महिलाओं के गीत और भजनों से पूरा वातावरण पावन हो उठा। घाटों पर सुरक्षा और सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। नगर निगम और पुलिस बल की तैनाती रहीं। शाम ढलते ही दीपों की लौ, भक्ति गीतों और महिलाओं की श्रद्धा से यमुना घाट और उत्तम नगर का वातावरण पूरी तरह छठमय हो उठा।
छठ के गीत गाते हुए पहुंचे घाट पर
- पश्चिमी यमुना नहर घाट पर पूजा करने आई बबीता ने बताया कि छठ माता का यह पर्व मेरे लिए बहुत खास है। कल सुबह से व्रत रखा है, दोपहर में पूजा की तैयारी की और शाम को जैसे ही सूर्य भगवान दिखे, मन में अपार शांति महसूस हुई। बबीता ने कहा कि पूरा परिवार छठ के गीत गाते हुए यहां तक पहुंचा और पति के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों ने भी घाट का अद्भुत दृश्य देखा।
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सूर्य भगवान को अर्घ्य देना सबसे पवित्र क्षण
- पश्चिमी यमुना नहर घाट पर पूजा करने आईं रेखा देवी ने कहा कि संध्या अर्घ्य के समय की ऊर्जा शब्दों में नहीं बताई जा सकती। पानी में खड़े होकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देना सबसे पवित्र क्षण होता है। इस समय लगा कि जैसे सारी थकान मिट गई और मन में केवल आस्था रह गई। रेखा ने कहा कि आस्था ऐसी है कि ऐसा लगा ही नहीं कि व्रत को रखे दो दिन बीते हैं। वहीं, सुबह उगते सूर्य देव की पूजा कर व्रत खोलेंगे।
हर साल रख रही छठ व्रत
- मीरा ने बताया कि जो पिछले हर साल छठ व्रत रख रही है। रविवार से कुछ भी नहीं खाया-पिया, फिर भी मन हल्का और शांत रहा। संध्या के समय जब पूरे परिवार के साथ घाट पर पूजा की, तो ऐसा लगा जैसे छठ मईया खुद आशीर्वाद देने आई हों। मीरा ने कहा कि हम परिवार सहित ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए और कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय जैसे गीत गाते हुए घाट तक झूमते हुए आएं।
ठेकुआ और गुड़ की खीर बनाई
- यमुना घाट पर पूजा करने आई झूना ने बताया कि प्रसाद बनाने में पूरा दिन लग गया। ठेकुआ और गुड़ की खीर खासतौर पर बनाई है। यह पर्व हमारे घर की परंपरा है, जिसे हम पूरे नियम और शुद्धता के साथ निभाते हैं। मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए, ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से गीत गाते रहे और घाट पर पहुंचकर पूरी श्रद्धा के साथ घाट में अंदर जाकर पूजा की।
बेटी के साथ घाट पर पूजा करने आईं
- यमुना घाट से आरती ने बताया कि वह अपनी छोटी-सी बेटी के साथ घाट पर पूजा करने आई हैं। दो साल से लगातार व्रत रख रही हैं। पानी में खड़े रहना भले ही कठिन रहा हो लेकिन जब सूर्य भगवान की किरणें चेहरे पर पड़ी, तो लगा है जैसे सारी मनोकामनाएं पूरी होने वाली हैं। यह व्रत हमें शक्ति और धैर्य देता है। उन्होने बताया कि घाट पर बहुत भीड़ थी लेकिन पूजा करने की श्रद्धा थी तो भीड़ में भी अंदर जाकर पूजा की।
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करनाल। छठ पर्व के तीसरे दिन सोमवार को श्रद्धा और आस्था का अनोखा संगम दिखा। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर संध्या अर्घ्य की रस्म निभाई। शहर के पश्चिमी यमुना नहर घाट और उत्तम नगर घाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे। जैसे-जैसे सूर्य अस्त होने लगा, वैसे-वैसे पूरा माहौल छठ मईया के जयकारों से गूंज उठा। सूर्य को अर्घ्य दिया गया।
सुबह से ही महिलाओं ने पूजा की तैयारी शुरू कर दी थी। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल की खीर, ईख, केला, नारियल और फल सजाकर रखा गया। शाम को महिलाएं तैयार होकर घाट पर पहुंची और स्नान किया। महिलाओं ने पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। पानी में घंटों खड़े रहकर उन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की। बच्चों और बुजुर्गों के चेहरे पर भक्ति और उल्लास झलक रहा था। घाट पर बच्चों के लिए झूले लगाए गए, वहीं महिलाओं के गीत और भजनों से पूरा वातावरण पावन हो उठा। घाटों पर सुरक्षा और सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। नगर निगम और पुलिस बल की तैनाती रहीं। शाम ढलते ही दीपों की लौ, भक्ति गीतों और महिलाओं की श्रद्धा से यमुना घाट और उत्तम नगर का वातावरण पूरी तरह छठमय हो उठा।
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छठ के गीत गाते हुए पहुंचे घाट पर
- पश्चिमी यमुना नहर घाट पर पूजा करने आई बबीता ने बताया कि छठ माता का यह पर्व मेरे लिए बहुत खास है। कल सुबह से व्रत रखा है, दोपहर में पूजा की तैयारी की और शाम को जैसे ही सूर्य भगवान दिखे, मन में अपार शांति महसूस हुई। बबीता ने कहा कि पूरा परिवार छठ के गीत गाते हुए यहां तक पहुंचा और पति के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों ने भी घाट का अद्भुत दृश्य देखा।
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सूर्य भगवान को अर्घ्य देना सबसे पवित्र क्षण
- पश्चिमी यमुना नहर घाट पर पूजा करने आईं रेखा देवी ने कहा कि संध्या अर्घ्य के समय की ऊर्जा शब्दों में नहीं बताई जा सकती। पानी में खड़े होकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देना सबसे पवित्र क्षण होता है। इस समय लगा कि जैसे सारी थकान मिट गई और मन में केवल आस्था रह गई। रेखा ने कहा कि आस्था ऐसी है कि ऐसा लगा ही नहीं कि व्रत को रखे दो दिन बीते हैं। वहीं, सुबह उगते सूर्य देव की पूजा कर व्रत खोलेंगे।
हर साल रख रही छठ व्रत
- मीरा ने बताया कि जो पिछले हर साल छठ व्रत रख रही है। रविवार से कुछ भी नहीं खाया-पिया, फिर भी मन हल्का और शांत रहा। संध्या के समय जब पूरे परिवार के साथ घाट पर पूजा की, तो ऐसा लगा जैसे छठ मईया खुद आशीर्वाद देने आई हों। मीरा ने कहा कि हम परिवार सहित ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए और कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय जैसे गीत गाते हुए घाट तक झूमते हुए आएं।
ठेकुआ और गुड़ की खीर बनाई
- यमुना घाट पर पूजा करने आई झूना ने बताया कि प्रसाद बनाने में पूरा दिन लग गया। ठेकुआ और गुड़ की खीर खासतौर पर बनाई है। यह पर्व हमारे घर की परंपरा है, जिसे हम पूरे नियम और शुद्धता के साथ निभाते हैं। मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए, ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से गीत गाते रहे और घाट पर पहुंचकर पूरी श्रद्धा के साथ घाट में अंदर जाकर पूजा की।
बेटी के साथ घाट पर पूजा करने आईं
- यमुना घाट से आरती ने बताया कि वह अपनी छोटी-सी बेटी के साथ घाट पर पूजा करने आई हैं। दो साल से लगातार व्रत रख रही हैं। पानी में खड़े रहना भले ही कठिन रहा हो लेकिन जब सूर्य भगवान की किरणें चेहरे पर पड़ी, तो लगा है जैसे सारी मनोकामनाएं पूरी होने वाली हैं। यह व्रत हमें शक्ति और धैर्य देता है। उन्होने बताया कि घाट पर बहुत भीड़ थी लेकिन पूजा करने की श्रद्धा थी तो भीड़ में भी अंदर जाकर पूजा की।