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Karnal News: एनआरआई से शादियों में धोखा, पीआर मिलने पर नहीं लौटते
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काजल पांचाल
करनाल। विवाह जहां जीवन भर का साथ और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, वहीं इसके बहाने कुछ महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिले में एनआरआई शादियों से जुड़ी धोखाधड़ी और उत्पीड़न के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
साल 2025 के पहले तीन महीनों में ही 76 महिलाएं ऐसी स्थिति का शिकार हुई हैं जिनमें से 25 ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है जबकि अन्य मामलों को महिला थानों में आपसी समझौते के जरिये सुलझाने का प्रयास किया गया।
ये घटनाएं तब सामने आती हैं जब विवाह के बाद पति विदेश चला जाता है और पीआर मिलने पर संपर्क खत्म कर देता है। शुरुआत में महिलाएं इस आस में रहती हैं कि पति उन्हें भी विदेश बुलाएगा या जल्द वापस लौटेगा। लेकिन समय बीतने के साथ उनके सपने चकनाचूर हो जाते हैं। कई मामलों में तो पति ने विदेश में दूसरी शादी तक कर ली है और पहली पत्नी से संबंध तोड़ लिए हैं।
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इस तरह के मामलों में महिलाएं न केवल भावनात्मक आघात झेलती हैं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक उपेक्षा का शिकार भी होती हैं।
अधिकार कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों का कहना है कि एनआरआई शादियों के मामलों में कठोर कानूनों की जरूरत है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। इस समस्या को देखते हुए प्रशासन को सतर्कता बढ़ाने और विवाह से पहले एनआरआई पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच सुनिश्चित करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही, पीड़ित महिलाओं के लिए कानूनी सहायता, परामर्श और पुनर्वास जैसी सुविधाएं भी समय की आवश्यकता बन चुकी हैं।
महिला पुलिस थाना प्रभारी कन्नुप्रिया बताती हैं कि ऐसे मामलों में महिलाओं को न केवल धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है बल्कि कई बार ससुराल वालों की ओर से भी उत्पीड़न और दहेज के लिए दबाव डाला जाता है।
कुछ मामलों में महिलाओं ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। यह मामले न केवल कानूनी समस्या हैं बल्कि समाज के लिए सजग रहने का संदेश भी है। एनआरआई दूल्हे से जुड़ी शादियों में महिलाओं को धोखाधड़ी और उत्पीड़न का शिकार होने से बचाने के लिए उनकी पूरी पृष्ठभूमि की जांच जरूरी है। संवाद
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करनाल। विवाह जहां जीवन भर का साथ और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, वहीं इसके बहाने कुछ महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिले में एनआरआई शादियों से जुड़ी धोखाधड़ी और उत्पीड़न के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
साल 2025 के पहले तीन महीनों में ही 76 महिलाएं ऐसी स्थिति का शिकार हुई हैं जिनमें से 25 ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है जबकि अन्य मामलों को महिला थानों में आपसी समझौते के जरिये सुलझाने का प्रयास किया गया।
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ये घटनाएं तब सामने आती हैं जब विवाह के बाद पति विदेश चला जाता है और पीआर मिलने पर संपर्क खत्म कर देता है। शुरुआत में महिलाएं इस आस में रहती हैं कि पति उन्हें भी विदेश बुलाएगा या जल्द वापस लौटेगा। लेकिन समय बीतने के साथ उनके सपने चकनाचूर हो जाते हैं। कई मामलों में तो पति ने विदेश में दूसरी शादी तक कर ली है और पहली पत्नी से संबंध तोड़ लिए हैं।
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इस तरह के मामलों में महिलाएं न केवल भावनात्मक आघात झेलती हैं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक उपेक्षा का शिकार भी होती हैं।
अधिकार कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों का कहना है कि एनआरआई शादियों के मामलों में कठोर कानूनों की जरूरत है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। इस समस्या को देखते हुए प्रशासन को सतर्कता बढ़ाने और विवाह से पहले एनआरआई पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच सुनिश्चित करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही, पीड़ित महिलाओं के लिए कानूनी सहायता, परामर्श और पुनर्वास जैसी सुविधाएं भी समय की आवश्यकता बन चुकी हैं।
महिला पुलिस थाना प्रभारी कन्नुप्रिया बताती हैं कि ऐसे मामलों में महिलाओं को न केवल धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है बल्कि कई बार ससुराल वालों की ओर से भी उत्पीड़न और दहेज के लिए दबाव डाला जाता है।
कुछ मामलों में महिलाओं ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। यह मामले न केवल कानूनी समस्या हैं बल्कि समाज के लिए सजग रहने का संदेश भी है। एनआरआई दूल्हे से जुड़ी शादियों में महिलाओं को धोखाधड़ी और उत्पीड़न का शिकार होने से बचाने के लिए उनकी पूरी पृष्ठभूमि की जांच जरूरी है। संवाद