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Karnal News: अब गैर-गोजातीय पशुओं के दूध में तलाशे जाएंगे चिकित्सीय गुण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Apr 2024 02:30 AM IST
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Now medicinal properties will be explored in the milk of non-bovine animals
- राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल ने शुरू किया शोध
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- दुनिया भर में पनीर बनाने के लिए बकरी और भेड़ के दूध का भी बढ़ा चलन
देव शर्मा
करनाल। गोजातीय एवं महिषवंशीय पशुओं व उनके दूध पर करीब 100 सालों से काम कर रहा राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल ने अब मानव पोषण और स्वास्थ्य के लिए गैर-गोजातीय पशु प्रजातियों के दूध पर शोध शुरू कर दिया है। इस शोध के दौरान विभिन्न गैर-गोजातीय पशुओं के दूध में इंसानों के हर आयु वर्ग के लिए लाभकारी गुण तलाशे जाएंगे।
संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के अनुसार यूं तो विभिन्न प्रजातियों के पशुओं से प्राप्त दूध की संरचना और भौतिक, रासायनिक गुण, उनकी संतानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित हुए हैं, लेकिन अब मनुष्यों के शिशुओं, बच्चों और वयस्कों के लिए उसके विशेष गुणों से अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ के लिए उपयोग की दृष्टि से भी पता लगाया जा रहा है। ताकि उनका समय पर चिकित्सीय उपयोग हो सके और उसके उत्पाद भी तैयार किए जा सकें।
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एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने बताया कि बकरी, भेड़, ऊंटनी, गधी, याक आदि गैर-गोजातीय पशुओं के दूध में कई चिकित्सीय गुण होते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक हो सकते हैं। भले ही प्रमाणिक न हो लेकिन कुछ गैर गोजातीय पशुओं के दूध का पुराने जमाने से कुछ रोगों में लाभ के लिए उपयोग होता भी आया है। ऐसी गैर गोजातीय पशु प्रजातियों पर पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। गैर-गोजातीय दूध में बड़ी मात्रा में कार्यात्मक रूप से सक्रिय लिपिड, लैक्टोज, इम्युनोग्लोबुलिन, विभिन्न पेप्टाइड्स, न्यूक्लियोटाइड्स, ऑलिगोसेकेराइड्स और मेटाबोलाइट्स पाए जाते हैं। उनके दूध में कुछ अद्वितीय माइक्रोबियल गुण भी होते हैं, जिनका मानव स्वास्थ्य में सुधार के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।
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डॉ.धीर सिंह ने बताया कि अब वह समय आ गया है, जब गैर-गोजातीय दूध व दूध घटकों के लक्षण वर्णन को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता पर लेने की जरूरत है क्योंकि इससे स्वस्थ और पौष्टिक उत्पादों के विकास के लिए दूध के विविधीकरण में काफी मदद मिलेगी और इन जानवरों को पालने वाले किसानों के लिए यह आय का एक स्रोत भी होगा।
बकरी, भेड़, ऊंटनी के दूध पर शुरू किया शोध
निदेशक ने बताया कि दुनिया भर में पनीर बनाने के लिए बकरी और भेड़ के दूध का भी चलन बढ़ गया है और एनडीआरआई भी इस पर काम शुरू कर रहा है। भेड़ का दूध बहुत गाढ़ा होता है और इसमें गाय या बकरी के दूध की तुलना में 15 से 16 प्रतिशत अधिक ठोस पदार्थ होते हैं और यह आइसक्रीम, सूखा दूध, पनीर और दही बनाने के लिए बेहतर है। उन्होंने कहा कि गधी के दूध से कई कॉस्मेटिक सौंदर्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें साबुन और क्रीम भी शामिल हैं।
एनडीआरआई ऊंट के दूध पर भी काम कर रहा है जो खनिजों से समृद्ध एक सुपर फूड है और इसमें उच्च पोषक तत्व हैं। ऊंटनी का दूध विटामिन बी 3 से भरपूर होता है जो पाचन तंत्र, त्वचा और तंत्रिकाओं के कामकाज में सहायता करता है। गैर-गोजातीय दूध पर नैदानिक परीक्षण और गुणवत्ता की निगरानी के लिए बायोमार्कर के रूप में उपयोग किए जाने वाले अद्वितीय मेटाबोलाइट्स की पहचान इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।



एनडीआरआई ने पहले ही कुछ स्वास्थ्यवर्धक दूध बायो-एक्टिव पेप्टाइड्स की पहचान कर ली है। संस्थान के वैज्ञानिक इनसे प्राप्त दूध के चिकित्सीय गुणों को निर्धारित करने के लिए इन पेप्टाइड्स को और मान्य करने जा रहे हैं। प्रोबायोटिक गैर-गोजातीय किण्वित खाद्य पदार्थों के लिए बकरी और ऊंटनी के दूध की खोज की जा रही है और एलर्जी, ऑटिज्म, मधुमेह आदि की रोकथाम के लिए इसका विश्लेषण किया जा रहा है। एनडीआरआई ने गैर-गोजातीय पशुओं के दूध पर काम करने वाले अन्य संस्थानों के साथ मिलकर यह शोध कार्य करने की पहल की है।
- डॉ. धीर सिंह, निदेशक, एनडीआरआई करनाल
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