{"_id":"686451706b854b2242095961","slug":"now-every-patient-coming-to-the-hospital-will-have-anemia-test-karnal-news-c-18-knl1008-681722-2025-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: अब अस्पताल में आने वाले हर मरीज का होगा एनीमिया टेस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: अब अस्पताल में आने वाले हर मरीज का होगा एनीमिया टेस्ट
विज्ञापन
- एनीमिया मुक्त भारत अभियान शुरू, गंभीर मरीजों को किया जाएगा रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत मंगलवार से 31 जुलाई तक विशेष परीक्षण अभियान शुरू किया गया है। इसमें सभी स्वास्थ्य केंद्रों, जिला नागरिक अस्पताल और कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित सीएचसी, पीएचसी और अन्य संस्थानों की ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज का पंजीकरण करते समय अनिवार्य रूप से एनीमिया टेस्ट किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों व अन्य स्थानों पर विशेष जांच शिविर भी लगाए जाएंगे। इनमें महिलाओं, बच्चों और किशोरियों का हीमोग्लोबिन स्तर जांचा जाएगा।
उप सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि अभियान में छह वर्गों में स्क्रीनिंग की जाएगी। इसमें छह माह से कम उम्र के बच्चे, छह माह से पांच साल तक के बच्चे, पांच से नौ साल, 10 से 19 साल के किशोर-किशोरियां, 20 से 49 साल की महिलाएं और 20 से 59 साल के पुरुष शामिल हैं। जिनका हीमोग्लोबिन स्तर 7 ग्राम से कम पाया जाएगा, उन्हें पोषण, खानपान और दवाओं से जुड़े निर्देश दिए जाएंगे।
डॉ. शशि ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक के फार्मूले पर माइक्रोप्लानिंग तैयार कर ली गई है। इसमें डॉक्टरों, एएनएम, आशा वर्करों, आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हीमोग्लोबिन मीटर, माइक्रोक्यूवेट, स्ट्रिप्स, लैंसेट, अल्कोहल स्वैब, दस्ताने, टिशू पेपर, बायो हैजर्ड कंटेनर और आईएफए सिरप, टैबलेट आदि सभी जरूरी सामग्री संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है।
विज्ञापन
तीन साल तक के बच्चों को नहीं लगेगी सुई
डॉ. शशि ने बताया कि तीन साल तक के बच्चों को सुई (प्रिक) नहीं लगाई जाएगी। इन बच्चों की जांच देखने के आधार पर की जाएगी। डॉक्टर बच्चों की हथेली, पलकों और नाखूनों का रंग देखकर एनीमिया की स्थिति का अनुमान लगाएंगे। यदि एनीमिया की आशंका दिखती है तो बच्चों को आयरन सिरप दिया जाएगा। गर्भवती महिलाओं को रेड टैबलेट और अन्य वर्ग के लोगों को भी आयरन की गोली दी जाएगी।
जिले में 13 हजार गर्भवती
जिले में अब तक करीब 13 हजार गर्भवती और 1,41,038 पांच साल तक के बच्चों का अनुमानित आंकड़ा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन मरीजों में गोली या सिरप देने के बावजूद कोई सुधार नहीं होगा, उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा। वहां विशेषज्ञों की टीम उनकी जांच कर पता लगाएगी कि शरीर में आयरन नहीं चढ़ने का कारण क्या है। उसके बाद उचित उपचार किया जाएगा।
एनीमिया से बचाव जरूरी, समय पर कराएं जांच
उप सिविल सर्जन डॉ. शशि ने बताया कि एनीमिया से बचाव के लिए आयरन युक्त आहार लेना जरूरी है। हीमोग्लोबिन कम होने पर थकान, कमजोरी, चक्कर आना, बच्चों में विकास रुकना और गर्भवती महिलाओं में गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर असर पड़ता है। समय रहते जांच और इलाज से एनीमिया पर काबू पाया जा सकता है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत मंगलवार से 31 जुलाई तक विशेष परीक्षण अभियान शुरू किया गया है। इसमें सभी स्वास्थ्य केंद्रों, जिला नागरिक अस्पताल और कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित सीएचसी, पीएचसी और अन्य संस्थानों की ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज का पंजीकरण करते समय अनिवार्य रूप से एनीमिया टेस्ट किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों व अन्य स्थानों पर विशेष जांच शिविर भी लगाए जाएंगे। इनमें महिलाओं, बच्चों और किशोरियों का हीमोग्लोबिन स्तर जांचा जाएगा।
उप सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि अभियान में छह वर्गों में स्क्रीनिंग की जाएगी। इसमें छह माह से कम उम्र के बच्चे, छह माह से पांच साल तक के बच्चे, पांच से नौ साल, 10 से 19 साल के किशोर-किशोरियां, 20 से 49 साल की महिलाएं और 20 से 59 साल के पुरुष शामिल हैं। जिनका हीमोग्लोबिन स्तर 7 ग्राम से कम पाया जाएगा, उन्हें पोषण, खानपान और दवाओं से जुड़े निर्देश दिए जाएंगे।
विज्ञापन
डॉ. शशि ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक के फार्मूले पर माइक्रोप्लानिंग तैयार कर ली गई है। इसमें डॉक्टरों, एएनएम, आशा वर्करों, आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हीमोग्लोबिन मीटर, माइक्रोक्यूवेट, स्ट्रिप्स, लैंसेट, अल्कोहल स्वैब, दस्ताने, टिशू पेपर, बायो हैजर्ड कंटेनर और आईएफए सिरप, टैबलेट आदि सभी जरूरी सामग्री संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है।
विज्ञापन
तीन साल तक के बच्चों को नहीं लगेगी सुई
डॉ. शशि ने बताया कि तीन साल तक के बच्चों को सुई (प्रिक) नहीं लगाई जाएगी। इन बच्चों की जांच देखने के आधार पर की जाएगी। डॉक्टर बच्चों की हथेली, पलकों और नाखूनों का रंग देखकर एनीमिया की स्थिति का अनुमान लगाएंगे। यदि एनीमिया की आशंका दिखती है तो बच्चों को आयरन सिरप दिया जाएगा। गर्भवती महिलाओं को रेड टैबलेट और अन्य वर्ग के लोगों को भी आयरन की गोली दी जाएगी।
जिले में 13 हजार गर्भवती
जिले में अब तक करीब 13 हजार गर्भवती और 1,41,038 पांच साल तक के बच्चों का अनुमानित आंकड़ा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन मरीजों में गोली या सिरप देने के बावजूद कोई सुधार नहीं होगा, उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा। वहां विशेषज्ञों की टीम उनकी जांच कर पता लगाएगी कि शरीर में आयरन नहीं चढ़ने का कारण क्या है। उसके बाद उचित उपचार किया जाएगा।
एनीमिया से बचाव जरूरी, समय पर कराएं जांच
उप सिविल सर्जन डॉ. शशि ने बताया कि एनीमिया से बचाव के लिए आयरन युक्त आहार लेना जरूरी है। हीमोग्लोबिन कम होने पर थकान, कमजोरी, चक्कर आना, बच्चों में विकास रुकना और गर्भवती महिलाओं में गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर असर पड़ता है। समय रहते जांच और इलाज से एनीमिया पर काबू पाया जा सकता है।