{"_id":"10b45830328f5f20f67a97e75fc21811","slug":"notice-eleven-councilors-would-give-fifteen-reply","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्यारह पार्षदों को नोटिस, पंद्रह तक देना होगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्यारह पार्षदों को नोटिस, पंद्रह तक देना होगा जवाब
करनाल
Updated Sun, 01 Jun 2014 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगरपालिका की जमीन पर बनाई गई दुकानें शिवपुरी सेवा समिति को सौंपने के
विज्ञापन
मामले में तरावड़ी के 11 पार्षदों को स्थानीय निकाय विभाग की ओर से भेजे गए
नोटिस शनिवार को नपा पहुंच गए।
विभाग ने 15 जून तक पार्षदों से इस मसले पर जवाब देने को कहा है। यदि पार्षदों के जवाब से विभाग संतुष्ट होता है तो ठीक, अन्यथा उन्हें नगर पालिका के पार्षद पदों से हाथ धोना पड़ सकता है। नोटिस की सूचना तीन दिन पहले ही पहुंच गई थी, लेकिन नोटिस की प्रतियां शनिवार को नपा कार्यालय पहुंची। इस मामले को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के चलते शहर का विकास रुका हुआ है। कई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाए और यहां तक कि नगरपालिका की बैठकों में यह पार्षद नहीं पहुंचे। इसके चलते कई अहम प्रस्ताव अटके पड़े हैं। शुक्रवार को बुलाई गई बैठक भी इसकी वजह से ही स्थगित हुई थी।
पहले भी हो चुके हैं सस्पेंड
यह पार्षद इसी मामले में एक बार पहले भी सस्पेंड हो चुके हैं। तब पार्षदों के खिलाफ नियमित जांच नहीं हुई थी, जिसके चलते पार्षदों को बहाल कर दिया गया था। उसके बाद तत्कालीन एडीसी चंद्रशेखर को मामले की जांच सौंपी गई थी। उनके तबादले के बाद यह जांच एडीसी बने गिरिश अरोड़ा ने की थी और अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपी थी। जांच में सामने आया था कि पालिका की बैठक में संस्था को दुकानें देने का जो प्रस्ताव पारित किया गया है, वह कानूनन सही नहीं है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही पार्षदों को नोटिस थमाए गए हैं।
यह है मामला
अंजनथली रोड पर बच्चा घाट के निकट नगरपालिका की ओर से दुकानों का निर्माण किया गया था। 11 पार्षदों ने पालिका की हाउस में मीटिंग में एक प्रस्ताव पारित कर यह दुकानें शिवपुरी सेवा समिति को देने पर मोहर लगा दी। वार्ड-6 के पार्षद प्रेमचंद ने इसकी शिकायत डीसी व निकाय विभाग को की थी। कोर्ट में भी इसका केस विचाराधीन है। प्रेम चंद ने पार्षदों पर साजिश के तहत जमीन दबाने का आरोप लगाया था।
विभाग ने 15 जून तक पार्षदों से इस मसले पर जवाब देने को कहा है। यदि पार्षदों के जवाब से विभाग संतुष्ट होता है तो ठीक, अन्यथा उन्हें नगर पालिका के पार्षद पदों से हाथ धोना पड़ सकता है। नोटिस की सूचना तीन दिन पहले ही पहुंच गई थी, लेकिन नोटिस की प्रतियां शनिवार को नपा कार्यालय पहुंची। इस मामले को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के चलते शहर का विकास रुका हुआ है। कई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाए और यहां तक कि नगरपालिका की बैठकों में यह पार्षद नहीं पहुंचे। इसके चलते कई अहम प्रस्ताव अटके पड़े हैं। शुक्रवार को बुलाई गई बैठक भी इसकी वजह से ही स्थगित हुई थी।
पहले भी हो चुके हैं सस्पेंड
यह पार्षद इसी मामले में एक बार पहले भी सस्पेंड हो चुके हैं। तब पार्षदों के खिलाफ नियमित जांच नहीं हुई थी, जिसके चलते पार्षदों को बहाल कर दिया गया था। उसके बाद तत्कालीन एडीसी चंद्रशेखर को मामले की जांच सौंपी गई थी। उनके तबादले के बाद यह जांच एडीसी बने गिरिश अरोड़ा ने की थी और अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपी थी। जांच में सामने आया था कि पालिका की बैठक में संस्था को दुकानें देने का जो प्रस्ताव पारित किया गया है, वह कानूनन सही नहीं है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही पार्षदों को नोटिस थमाए गए हैं।
यह है मामला
अंजनथली रोड पर बच्चा घाट के निकट नगरपालिका की ओर से दुकानों का निर्माण किया गया था। 11 पार्षदों ने पालिका की हाउस में मीटिंग में एक प्रस्ताव पारित कर यह दुकानें शिवपुरी सेवा समिति को देने पर मोहर लगा दी। वार्ड-6 के पार्षद प्रेमचंद ने इसकी शिकायत डीसी व निकाय विभाग को की थी। कोर्ट में भी इसका केस विचाराधीन है। प्रेम चंद ने पार्षदों पर साजिश के तहत जमीन दबाने का आरोप लगाया था।