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Karnal News: हेलमेट न पहनना पड़ा भारी, 10 माह में 71 बाइक सवारों ने गंवाई जान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jan 2026 02:01 AM IST
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Not wearing a helmet proved costly, 71 bike riders lost their lives in 10 months
गगन तलवार
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करनाल। सड़क या चौराहों पर तैनात यातायात पुलिसकर्मी उन दोपहिया वाहन चालकों पर सबसे पहले शिकंजा कसते हैं, जो बिना हेलमेट पहने वाहन दौड़ाते हैं। ताकि हादसा होने पर सिर की चोट के कारण किसी की जान न जाए लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद भी जिले के 71 दो पहिया वाहन सवारों की इसी वजह से हादसे में जान चली गई। वहीं 44 लोग गंभीर रूप से घायल या अपाहिज हुए। इसके अलावा 62 लोगों को हेलमेट न पहने होने के कारण सिर की चोट ने अस्पताल पहुंचा दिया। यह खुलासा सड़क सुरक्षा समिति की इस वर्ष 10 माह में हुए हादसों पर हुई स्टडी में हुआ है।

वर्ष 2025 में जनवरी से अक्तूबर तक हुए हादसों में 177 पीड़ित ऐसे हैं जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था। इनमें 57 वाहन चालक हैं और 120 पीछे बैठे सहयात्री। हालांकि मौत का आंकड़ा 2024 की तुलना में कुछ घटा है। जबकि अपाहिजों की संख्या बराबर और चोटिल होने वालों का आंकड़ा 21 अंक तक बढ़ा है। 2024 में 78 की मौत हुई थी, 44 गंभीर और 41 चोटिल हुए। जबकि 2025 में 71 की मौत, 44 गंभीर और चोटिल होने वालों की संख्या 62 है। पुलिस की कार्रवाई पर नजर डालें तो हर माह बिना हेलमेट पहने वाहन चलाने वाले करीब 12 हजार वाहन चालकों के चालान किए जा रहे हैं।
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एक्सपर्ट व्यू

- नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. कुलबीर का कहना है कि दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट लगाना सबसे जरूरी है। क्योंकि सिर की चोट सबसे खतरनाक होती है। इससे मौके पर ही जान जा सकती है या फिर व्यक्ति सिर की चोट के कारण कोमा में भी जा सकता है।
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- सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम भारद्वाज और एडवोकेट संदीप का कहना है कि अन्य यातायात नियमों का पालन जरूरी है। क्योंकि हेलमेट केवल सिर की चोट से बचाता है। जबकि अन्य नियम भी दुर्घटना से बचाव के लिए बने हैं। सड़क की खराब स्थिति और लापरवाही भी हादसे की वजह है।



तेज रफ्तार ने ली 102 की जान

हेलमेट पहनने के साथ-साथ अन्य यातायात नियमों का पालन भी जरूरी है क्योंकि हादसों में 102 उन बाइक सवारों की भी जान गई है, जिन्होंने हेलमेट तो पहना हुआ था लेकिन उन्होंने अपने वाहन को तेज रफ्तार से दौड़ाया या फिर अन्य यातायात नियम तोड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क की खामी भी उनके हादसे की वजह बनी। इस कारण सिर के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के कारण उनकी मौत हुई। हेलमेट पहनकर सफर करने वालों के साथ हुई दुर्घटनाओं में 65 लोग अपाहिज या गंभीर रूप से घायल हुए व 109 लोगों को भी कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।




दो पहिया वाहन चालकों के हादसों की स्थिति-

- बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले, घायलों की संख्या बढ़ी

वर्ष
2025

2024

स्थिति मौत/गंभीर/चोटिल मौत/गंभीर/चोटिल
चालक 18/20/19
37/27/17
सहयात्री 53/24/43
41/17/24
कुल 71/44/62
78/44/41


- हेलमेट लगाकर वाहन चलाने वाले, मौत की संख्या बढ़ी

वर्ष
2025

2024

स्थिति मौत/गंभीर/हल्की चोट मौत/गंभीर/हल्की चोट

चालक 98/64/108
82/58/53
सहयात्री 04/01/01
02/02/01
कुल 102/65/109
84/60/54


वर्जन

सड़क पर चलते हुए प्रत्येक दो पहिया वाहन चालक को हेलमेट लगाना चाहिए। पुलिस ने काफी सख्ती की है तो दुर्घटना में सिर की चोट से होने वाली मौत की संख्या कम हुई है। लेकिन अभी और सुधार की जरूरत है। यदि सभी दो पहिया वाहन चालक हेलमेट लगाते तो इन 71 लोगों की जान और 44 लोगों को आपाहिज होने व 62 लोगों के चोट के कारण अस्पताल पहुंचने से भी बचाया जा सकता था। अन्य नियम तोड़ने वालों पर भी कार्रवाई जारी है। जनता से भी सहयोग की अपील है। - राजीव कुमार, डीएसपी करनाल
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