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Karnal News: किताबें ही नहीं, स्टेशनरी के लिए भी दुकान निर्धारित, कॉपी के कवर पर स्कूल का नाम
Thu, 26 Mar 2026 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:30 AM IST
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न्यू गुलाटी बुक शॉप पर प्रताप स्कूल की नॉटबुक
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। निजी प्रकाशकों किताबें लगवाने के साथ ही अब स्टेशनरी के लिए भी स्कूलों ने दुकानें निर्धारित कर दी हैं। अभिभावकों को तय दुकानों से स्कूल के नाम से छपी कॉपियां और कॉपी-कवर लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। स्टेशनरी का सामान स्कूल की ओर से लगवाई गई किताबों के साथ पूरा पैकेज बनाकर बेचा जा रहा है।
स्थिति यह है कि खुले बाजार में सस्ते मिलने वाले वही सामान स्कूल के पैकेज में कहीं ज्यादा कीमत पर मिल रहे हैं, जिसमें 12 सेट के सिंगल लाइन रजिस्टर से लेकर नोटबुक, स्क्रैप बुक, ड्राइंग बुक, कलर, मिक्स ब्रश और नोटबुक कवर तक शामिल कर दिए गए हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से एक ही दुकान से पूरा स्टेशनरी सेट खरीदने के लिए कहा जा रहा है। यदि कोई अभिभावक बाहर से सामान लेने की बात करता है तो उसे मना कर दिया जाता है या फिर उसी सूची के अनुसार सामान लाने के लिए कहा जाता है, जिसमें स्कूल नाम वाली कॉपियां और रजिस्टर अनिवार्य होते हैं।
कक्षा 6 के लिए जो स्टेशनरी बाजार में करीब 360 रुपये में मिल सकती है, वही स्कूल के पैकेज में 930 रुपये तक पहुंच रही है। कक्षा 7 का जो सामान बाजार में करीब 680 रुपये का है, उसे 1355 रुपये में दिलाया जा रहा है। इस अंतर के चलते कक्षा 6 के छात्र पर करीब 570 रुपये और कक्षा 7 के छात्र पर 675 रुपये तक अतिरिक्त खर्च आ रहा है। एक ही परिवार में दो बच्चों के होने पर यह बोझ 1000 रुपये से अधिक हो जाता है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है।
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- रजिस्टर और कॉपियों में बड़ा खेल
तुलना में सामने आया है कि 20 रुपये में मिलने वाला साधारण रजिस्टर स्कूल के माध्यम से 25 रुपये में दिलाया जा रहा है। इसी तरह कॉपियों और अन्य स्टेशनरी में भी 10 से 40 रुपये तक प्रति आइटम अतिरिक्त वसूली हो रही है। स्कूल नाम प्रिंट होने के कारण अभिभावकों के पास विकल्प भी खत्म हो जाता है।
- नियमों के खिलाफ जबरदस्ती
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान, ब्रांड या विक्रेता से स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 के तहत अभिभावकों को खुले बाजार से अपनी पसंद का सामान खरीदने की स्वतंत्रता दी गई है। यदि कोई स्कूल इस तरह की जबरदस्ती करता है तो उसके खिलाफ शिकायत होने पर जांच की जाती है। दोषी पाए जाने पर स्कूल पर जुर्माना, मान्यता निलंबन या रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
- यहां कर सकते हैं शिकायत
अभिभावक ऐसे मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, शिक्षा विभाग के पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत के साथ बिल, सूची और अन्य प्रमाण देने पर कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।
कक्षा छह के लिए प्रताप स्कूल की ओर से निर्धारित सामान के दाम
सामान स्कूल की तय दुकान बाजार रेट अंतर
सिंगल लाइन कॉपी (2) 50 40 +10
इंटरलीफ (3) 75 60 +15
स्क्रैप बुक 50 40 +10
ड्राइंग बुक 100 60 +40
कलर बॉक्स 235 50 +185
ब्रश सेट 50 30 +20
नोटबुक कवर 120 80 +40
वर्जन-
स्कूल की ओर से निर्धारित दुकानों से सामान बिकवाने की अनुमति नहीं है। इसके बारे में खंड शिक्षा अधिकारियों का निर्देश देकर वहां पर सीआरसी हेड से जांच करवाई जाएगी। - नीलम कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
वर्जन
नोटबुक पर स्कूल का नाम अनिवार्य नहीं है। हम स्कूल में विद्यार्थियों को ऐसे नोटबुक देते भी नहीं हैं। यदि वेंडर ने कवर पेज पर स्कूल का नाम दिया है तो अलग बात है, हमारी तरफ से किसी से जबरदस्ती नहीं की गई है। - पूनम नेवट, निदेशक प्रिंसिपल, प्रताप पब्लिक स्कूल करनाल
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करनाल। निजी प्रकाशकों किताबें लगवाने के साथ ही अब स्टेशनरी के लिए भी स्कूलों ने दुकानें निर्धारित कर दी हैं। अभिभावकों को तय दुकानों से स्कूल के नाम से छपी कॉपियां और कॉपी-कवर लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। स्टेशनरी का सामान स्कूल की ओर से लगवाई गई किताबों के साथ पूरा पैकेज बनाकर बेचा जा रहा है।
स्थिति यह है कि खुले बाजार में सस्ते मिलने वाले वही सामान स्कूल के पैकेज में कहीं ज्यादा कीमत पर मिल रहे हैं, जिसमें 12 सेट के सिंगल लाइन रजिस्टर से लेकर नोटबुक, स्क्रैप बुक, ड्राइंग बुक, कलर, मिक्स ब्रश और नोटबुक कवर तक शामिल कर दिए गए हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से एक ही दुकान से पूरा स्टेशनरी सेट खरीदने के लिए कहा जा रहा है। यदि कोई अभिभावक बाहर से सामान लेने की बात करता है तो उसे मना कर दिया जाता है या फिर उसी सूची के अनुसार सामान लाने के लिए कहा जाता है, जिसमें स्कूल नाम वाली कॉपियां और रजिस्टर अनिवार्य होते हैं।
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कक्षा 6 के लिए जो स्टेशनरी बाजार में करीब 360 रुपये में मिल सकती है, वही स्कूल के पैकेज में 930 रुपये तक पहुंच रही है। कक्षा 7 का जो सामान बाजार में करीब 680 रुपये का है, उसे 1355 रुपये में दिलाया जा रहा है। इस अंतर के चलते कक्षा 6 के छात्र पर करीब 570 रुपये और कक्षा 7 के छात्र पर 675 रुपये तक अतिरिक्त खर्च आ रहा है। एक ही परिवार में दो बच्चों के होने पर यह बोझ 1000 रुपये से अधिक हो जाता है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है।
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- रजिस्टर और कॉपियों में बड़ा खेल
तुलना में सामने आया है कि 20 रुपये में मिलने वाला साधारण रजिस्टर स्कूल के माध्यम से 25 रुपये में दिलाया जा रहा है। इसी तरह कॉपियों और अन्य स्टेशनरी में भी 10 से 40 रुपये तक प्रति आइटम अतिरिक्त वसूली हो रही है। स्कूल नाम प्रिंट होने के कारण अभिभावकों के पास विकल्प भी खत्म हो जाता है।
- नियमों के खिलाफ जबरदस्ती
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान, ब्रांड या विक्रेता से स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 के तहत अभिभावकों को खुले बाजार से अपनी पसंद का सामान खरीदने की स्वतंत्रता दी गई है। यदि कोई स्कूल इस तरह की जबरदस्ती करता है तो उसके खिलाफ शिकायत होने पर जांच की जाती है। दोषी पाए जाने पर स्कूल पर जुर्माना, मान्यता निलंबन या रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
- यहां कर सकते हैं शिकायत
अभिभावक ऐसे मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, शिक्षा विभाग के पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत के साथ बिल, सूची और अन्य प्रमाण देने पर कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।
कक्षा छह के लिए प्रताप स्कूल की ओर से निर्धारित सामान के दाम
सामान स्कूल की तय दुकान बाजार रेट अंतर
सिंगल लाइन कॉपी (2) 50 40 +10
इंटरलीफ (3) 75 60 +15
स्क्रैप बुक 50 40 +10
ड्राइंग बुक 100 60 +40
कलर बॉक्स 235 50 +185
ब्रश सेट 50 30 +20
नोटबुक कवर 120 80 +40
वर्जन-
स्कूल की ओर से निर्धारित दुकानों से सामान बिकवाने की अनुमति नहीं है। इसके बारे में खंड शिक्षा अधिकारियों का निर्देश देकर वहां पर सीआरसी हेड से जांच करवाई जाएगी। - नीलम कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
वर्जन
नोटबुक पर स्कूल का नाम अनिवार्य नहीं है। हम स्कूल में विद्यार्थियों को ऐसे नोटबुक देते भी नहीं हैं। यदि वेंडर ने कवर पेज पर स्कूल का नाम दिया है तो अलग बात है, हमारी तरफ से किसी से जबरदस्ती नहीं की गई है। - पूनम नेवट, निदेशक प्रिंसिपल, प्रताप पब्लिक स्कूल करनाल